दिशा सालियान केस: पिता सतीश सालियान ने CBI को सौंपे वीडियो और अन्य सबूत, आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों पर कार्रवाई की मांग

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही दिशा सालियान की मौत के मामले में उनके पिता सतीश सालियान ने CBI को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपकर कई अहम बिंदुओं की जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने CBI को वीडियो समेत अन्य सबूत सौंपने का दावा किया है। प्रतिनिधित्व में शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, पुलिस निरीक्षक अर्जुन राजाने, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, SIT सदस्य शैलेंद्र नागरकर और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

सतीश सालियान ने संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के बाद कानून के मुताबिक गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ पर भी निर्णय लेने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, पुलिस जांच से जुड़े रिकॉर्ड और कुछ अधिकारियों के बयानों की विस्तृत पड़ताल जरूरी है।

DVR फुटेज को लेकर सतीश सालियान का दावा

सतीश सालियान के प्रतिनिधित्व में CCTV फुटेज और DVR से जुड़े मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि महत्वपूर्ण अवधि की CCTV फुटेज डिलीट होने के बाद DVR को जांच के लिए भेजा गया था।

प्रतिनिधित्व में 11 दिसंबर 2025 की FSL, कलिना, मुंबई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि DVR में 4 जून 2020 से 9 जून 2020 तक की फुटेज मौजूद नहीं थी। सतीश सालियान ने CBI से यह पता लगाने की मांग की है कि संबंधित फुटेज किस तरह हटाई गई, क्या उसे डिलीट या नष्ट किया गया था और इस प्रक्रिया के लिए कौन जिम्मेदार था।

उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि जांच एजेंसी यह पता लगाए कि गायब फुटेज की कोई दूसरी कॉपी या बैकअप अभी भी बरामद किया जा सकता है या नहीं।

बैकअप हार्ड डिस्क की भूमिका की जांच की मांग

प्रतिनिधित्व में बैकअप हार्ड डिस्क का भी उल्लेख किया गया है। सतीश सालियान ने आरोप लगाया है कि बैकअप हार्ड डिस्क को भी नष्ट, हटाया या दबाया गया हो सकता है। उन्होंने CBI से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कस्टडी और उन्हें संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।

उनके प्रतिनिधित्व में PSI हसन मकबूल मुलानी के 7 अप्रैल 2026 को SIT सदस्य शैलेंद्र नागरकर द्वारा दर्ज किए गए बयान का भी हवाला दिया गया है। इसके अलावा तत्कालीन जांच अधिकारी अर्जुन राजाने का 8 अप्रैल 2026 को दर्ज बयान भी जांच के दायरे में लेने का अनुरोध किया गया है। प्रतिनिधित्व के मुताबिक, इन बयानों में गायब हार्ड डिस्क और बैकअप फुटेज से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है।
परमबीर सिंह के पुराने बयान पर भी सवाल

सतीश सालियान ने पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के 3 अगस्त 2020 के कथित प्रेस कॉन्फ्रेंस बयान का भी हवाला दिया है। उनके मुताबिक, परमबीर सिंह ने उस समय कहा था कि पुलिस ने पूरा CCTV फुटेज देखा था और दिशा सालियान के फ्लैट में छह चिन्हित लोगों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति दाखिल नहीं हुआ था।

वहीं, सतीश सालियान के प्रतिनिधित्व के अनुसार API कनौजे और अन्य पुलिस अधिकारियों ने 6 अगस्त 2020 को बैकअप हार्ड डिस्क आधिकारिक तौर पर खोली थी और उसमें 4 जून 2020 की फुटेज मौजूद होने की पुष्टि की थी।

इसी आधार पर उन्होंने CBI से यह जांच करने की मांग की है कि 6 अगस्त की आधिकारिक प्रक्रिया से तीन दिन पहले 3 अगस्त को परमबीर सिंह ने CCTV फुटेज को लेकर ऐसा दावा किस आधार पर किया था। प्रतिनिधित्व में यह भी आरोप लगाया गया है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस आदित्य ठाकरे की कथित भूमिका से जुड़ी खबरों के जवाब में की गई थी।

सतीश सालियान ने जांच एजेंसी से यह भी पता लगाने की मांग की है कि क्या परमबीर सिंह को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तक पहले से पहुंच, उनसे संबंधित जानकारी या किसी तरह का नियंत्रण प्राप्त था।

दो अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की मांग

प्रतिनिधित्व में दो अन्य व्यक्तियों को महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी बताया गया है। सतीश सालियान ने CBI से दोनों से तत्काल पूछताछ करने और उनके बयान दर्ज करने की मांग की है।

इसके अलावा प्रतिनिधित्व में दावा किया गया है कि मोबाइल टावर लोकेशन से आदित्य ठाकरे और शिकायत में नामित अन्य लोगों की घटना स्थल के आसपास मौजूदगी से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सामने आते हैं। सतीश सालियान ने इन रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच किए जाने का भी अनुरोध किया है।

FIR में IPC की धारा 409 जोड़ने की मांग

सतीश सालियान ने CBI से FIR में IPC की धारा 409 जोड़ने पर भी विचार करने की मांग की है। उनके प्रतिनिधित्व के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों को सौंपे गए DVR, हार्ड डिस्क या अन्य सरकारी संपत्ति के कथित बेईमानी से दुरुपयोग, गबन, हटाने, नष्ट करने या गलत तरीके से निपटाने की स्थिति में धारा 409 के तहत अपराध बनता है या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने इस पहलू को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कस्टडी और उनसे जुड़ी कथित अनियमितताओं के संदर्भ में जांचने का अनुरोध किया है।

कई लोगों की भूमिका की जांच और हिरासत में पूछताछ की मांग

सतीश सालियान ने अपने प्रतिनिधित्व में आदित्य ठाकरे, परमबीर सिंह, सचिन वाजे, शैलेंद्र नागरकर, अर्जुन राजाने, उद्धव ठाकरे और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।

उन्होंने अदालतों के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि गंभीर आरोपों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े मामलों में, जहां जांच के लिए आवश्यकता हो, हिरासत में पूछताछ पर विचार किया जा सकता है। प्रतिनिधित्व में Gulabrao Baburao Deokar v. State of Maharashtra मामले का भी उल्लेख किया गया है।

सतीश सालियान ने CBI से अनुरोध किया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और संबंधित लोगों की भूमिका के आधार पर कानून के मुताबिक गिरफ्तारी तथा हिरासत में पूछताछ पर तत्काल निर्णय लिया जाए।

मामले में उनके प्रतिनिधित्व का मुख्य जोर CCTV फुटेज, DVR और बैकअप हार्ड डिस्क से जुड़े रिकॉर्ड की जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कस्टडी तय करने, संबंधित पुलिस अधिकारियों के बयानों की पड़ताल और नामित लोगों की भूमिका की जांच पर है।