पानी की टंकी पर चढ़े अभिजीत दीपके, सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था पर उठाए सवाल

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने शनिवार को अपने गृह जिले हिंगोली के औंधा स्थित एक सरकारी स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल में छात्रों के लिए रखी खाद्य सामग्री, पानी की व्यवस्था और कक्षाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सवाल उठाए। दीपके का दावा है कि स्कूल में रखे कुछ मसालों के पैकेट की इस्तेमाल की अवधि फरवरी में ही समाप्त हो चुकी थी।

दीपके ने स्कूल में मौजूद खाद्य सामग्री के पैकेट मीडियाकर्मियों को दिखाए। उनका आरोप था कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी इनका इस्तेमाल छात्रों के लिए भोजन तैयार करने में किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यही व्यवस्था मंत्रियों के बच्चों के लिए होती तो क्या उन्हें भी ऐसी खाद्य सामग्री से तैयार भोजन दिया जाता।

पानी की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

स्कूल का निरीक्षण करते हुए अभिजीत दीपके पानी की टंकी तक पहुंचे और उसके भीतर मौजूद पानी की जांच की। उन्होंने इस संबंध में इलाके के संबंधित अधिकारी से फोन पर बातचीत भी की।

दीपके के मुताबिक, स्कूल में लगा पानी का फिल्टर काम नहीं कर रहा है। उनका कहना था कि फिल्टर मौजूद होने के बावजूद छात्र बोरवेल का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने स्कूल के शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं होने की समस्या भी सामने रखी।

उन्होंने अधिकारी से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि स्कूल में रखी खाद्य सामग्री के कुछ पैकेट लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, संदर्भ सामग्री में संबंधित स्कूल या अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
87 छात्रों के लिए दो कक्षाओं का मुद्दा

दीपके ने स्कूल में उपलब्ध कक्षाओं की संख्या को लेकर भी सवाल उठाया। उनका दावा है कि स्कूल में 87 छात्रों के लिए केवल दो कक्षाएं उपलब्ध हैं, जबकि चार कक्षाएं स्वीकृत हैं।

उन्होंने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई और छात्रों के साथ खराब व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया। यह दौरा उनके ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का हिस्सा था, जिसे CJP ने 15 अगस्त को शुरू किया था। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाना और सरकार से जवाबदेही की मांग करना बताया गया है।

सोनम वांगचुक के अनशन पर भी बोले दीपके

एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर दें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि आंदोलन को कमजोर किया जाए।

दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक ने अपनी जान दांव पर लगाकर देश को जागरूक किया और आंदोलन को एक बड़े स्तर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके अनुसार, आंदोलन अब सोनम वांगचुक से भी आगे बढ़ चुका है, लेकिन इसे इस मुकाम तक पहुंचाने का सबसे बड़ा श्रेय वांगचुक को दिया जाना चाहिए।

‘मुझे मिलने नहीं दिया गया’: दीपके


दीपके ने इंटरव्यू में यह भी दावा किया कि जब सोनम वांगचुक को वहां से ले जाया गया, तब उन्हें उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर ‘किडनैप’ किए जाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का कहना था कि सरकार से जुड़े लोगों के हाथों वांगचुक ने अनशन तोड़ा। दीपके के मुताबिक, अनशन खत्म करना उचित था क्योंकि उनकी जान बचाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि वह खुद भी चाहते थे कि वांगचुक अनशन समाप्त कर दें।