आज के समय में घुटनों का दर्द केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। पहले जहां यह परेशानी मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, वहीं अब 30 से 40 साल के युवाओं में भी घुटनों में दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में असहजता जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर रोजमर्रा के कामों से लेकर ऑफिस और फिटनेस रूटीन तक पर पड़ने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार घुटनों का दर्द जितनी समस्या पैदा नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा नुकसान उस दौरान की जाने वाली गलत आदतें पहुंचाती हैं। दर्द महसूस होते ही लोग कुछ ऐसी सामान्य गलतियां करने लगते हैं, जो समय के साथ घुटनों की स्थिति और खराब कर सकती हैं। कई फिजियोथेरेपिस्ट भी सलाह देते हैं कि अगर घुटनों में दर्द है, खासकर बुजुर्गों को, तो इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।
1. दर्द होते ही पूरी तरह आराम करनाघुटनों में दर्द शुरू होते ही अधिकतर लोग चलना-फिरना लगभग बंद कर देते हैं और बिस्तर पर आराम करना ही सबसे अच्छा उपाय समझते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक पूरी तरह निष्क्रिय रहना घुटनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
ऐसा करने से घुटनों के आसपास मौजूद क्वाड्रिसेप्स (Quadriceps) मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। जब ये मांसपेशियां अपनी ताकत खो देती हैं, तो जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है, जिससे दर्द कम होने की बजाय और बढ़ सकता है।
इंडियन जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में लंबे समय तक बैठे रहने की आदत घुटनों के दर्द को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।
ऐसी स्थिति में पूरी तरह आराम करने की बजाय हल्की वॉक, स्ट्रेट लेग रेज एक्सरसाइज और सीमित समय तक साइकिलिंग जैसी हल्की गतिविधियां अधिक फायदेमंद मानी जाती हैं। इससे जोड़ों में रक्त संचार बना रहता है और रिकवरी में मदद मिल सकती है।
2. सूजन होने पर गर्म सिंकाई करनाघुटनों में दर्द के साथ यदि सूजन हो, घुटना छूने पर गर्म महसूस हो या लालिमा दिखाई दे, तो कई लोग तुरंत गर्म पानी की बोतल या हीट पैड से सिंकाई शुरू कर देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तरीका हर स्थिति में सही नहीं होता। जब किसी जोड़ में पहले से सूजन मौजूद हो, तब गर्म सिंकाई उस हिस्से में रक्त प्रवाह और बढ़ा सकती है, जिससे सूजन और अधिक बढ़ने की संभावना रहती है।
ऐसी स्थिति में 15 से 20 मिनट तक कपड़े में लपेटकर बर्फ से ठंडी सिंकाई करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
वहीं अगर घुटनों में सूजन नहीं है और केवल अकड़न या जकड़न महसूस हो रही है, तब गर्म सिंकाई राहत पहुंचा सकती है। इसलिए दर्द की वजह समझकर ही सिंकाई का तरीका अपनाना चाहिए।
3. लंबे समय तक जमीन पर पालथी मारकर बैठनाभारतीय घरों में जमीन पर बैठकर खाना खाना, पूजा करना या लंबे समय तक पालथी मारकर बैठना आम बात है। लेकिन जिन लोगों को घुटनों में दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत हो चुकी है, उनके लिए यह आदत परेशानी बढ़ा सकती है।
करीब 20 से 30 मिनट तक लगातार घुटनों को मोड़कर एक ही मुद्रा में बैठने से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे कार्टिलेज पर असर पड़ सकता है और समय के साथ दर्द और जकड़न बढ़ सकती है।
इसलिए यदि पहले से घुटनों में समस्या है, तो लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने से बचना बेहतर माना जाता है।
4. बढ़ते वजन और गलत पोश्चर को नजरअंदाज करनाघुटनों के दर्द का इलाज कराने के दौरान कई लोग दवाइयों और थेरेपी पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन अपने वजन और बैठने-चलने के तरीके को नजरअंदाज कर देते हैं।
आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, शरीर का हर अतिरिक्त एक किलो वजन चलते समय घुटनों पर लगभग चार किलो अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। यही कारण है कि बढ़ता वजन घुटनों की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
साथ ही गलत पोश्चर, झुककर चलना या गलत तरीके से बैठना भी जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पैदा करता है। इसलिए वजन नियंत्रित रखना और सही बॉडी पोश्चर अपनाना घुटनों की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
5. गलत तरीके से स्क्वाट या बैठने की आदतदेश के कई हिस्सों में आज भी इंडियन स्टाइल टॉयलेट, जमीन पर बैठकर खाना बनाना या कम ऊंचाई वाले मोढ़ों और चारपाई का इस्तेमाल आम है।
ऐसी परिस्थितियों में यदि बार-बार गलत तरीके से स्क्वाट किया जाए या घुटनों पर पूरा वजन डालकर बैठा जाए, तो जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि इन कामों को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि सही तकनीक और संतुलित तरीके से बैठना ज्यादा जरूरी है ताकि घुटनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
6. लंबे समय तक पेन किलर पर निर्भर रहनाघुटनों में दर्द होने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करते रहते हैं। इससे कुछ समय के लिए दर्द तो कम महसूस होता है, लेकिन समस्या की असली वजह जस की तस बनी रहती है।
यदि गलत पोश्चर, बढ़ता वजन, कमजोर मांसपेशियां या अन्य कारणों का समाधान नहीं किया जाता, तो अंदरूनी नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेन किलर केवल अस्थायी राहत दे सकती हैं। लंबे समय तक स्वस्थ घुटनों के लिए सही व्यायाम, संतुलित वजन, फिजियोथेरेपी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार अपनाना अधिक जरूरी है।
ध्यान दें: यदि घुटनों का दर्द लगातार बना रहे, सूजन बढ़ती जाए, चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत हो या दर्द लंबे समय तक ठीक न हो, तो स्वयं इलाज करने की बजाय ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लें।