मिर्गी के मरीजों में जब दौरा सामान्य से ज्यादा देर तक चलता है तो उसे रोकने के लिए तुरंत इलाज की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में डॉक्टरों के सामने ऐसी दवा चुनने की चुनौती रहती है जिसे अस्पताल के बाहर भी अपेक्षाकृत आसानी से दिया जा सके। इसी मुद्दे पर AIIMS नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं की नई स्टडी में mouth-dissolving clobazam की तुलना intranasal midazolam से की गई है।
यह शोध 9 सितंबर 2026 को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Epilepsia में प्रकाशित हुआ। अध्ययन का मकसद यह देखना था कि लंबे समय तक चलने वाले मिर्गी के दौरे को रोकने में मुंह में घुलने वाला क्लोबाजाम नाक के रास्ते दी जाने वाली मिडाजोलम की तुलना में कितना प्रभावी है। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि दोनों उपचारों के बीच दौरा रोकने के समय में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।
क्या था AIIMS का अध्ययन?यह एक single-center, prospective, randomized trial था, जिसे लगभग डेढ़ साल की अवधि में किया गया। इसमें drug-resistant epilepsy यानी ऐसी मिर्गी वाले मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें कई दवाओं के बावजूद दौरे नियंत्रित नहीं हो रहे थे और जिनकी treatment regimen में clobazam पहले से शामिल था।
कुल 95 मरीज अध्ययन में शामिल हुए। इनमें 47 मरीजों को intranasal midazolam दिया गया, जबकि 48 मरीजों को mouth-dissolving clobazam दिया गया। दोनों समूहों में दवा उस समय दी गई जब मरीज को दो मिनट से ज्यादा समय तक चलने वाला prolonged seizure हुआ। इसके बाद शोधकर्ताओं ने clinical और EEG यानी electrographic तरीके से देखा कि दौरा कितनी जल्दी समाप्त हुआ।
दौरा रोकने में क्या मिला?अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि clobazam और intranasal midazolam के बीच clinical seizure termination और electrographic seizure termination के समय में statistically significant difference नहीं पाया गया।
अध्ययन में clinical seizure termination के लिए hazard ratio 0.39 रहा, जबकि electrographic seizure termination के लिए यह 0.56 था। हालांकि दोनों परिणामों में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर स्थापित नहीं हुआ। Clinical seizure के लिए log-rank test का p-value 0.17 और electrographic seizure के लिए 0.39 रहा।
इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों दवाएं हर मरीज में बिल्कुल समान तरीके से काम करती हैं। बल्कि अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि mouth-dissolving clobazam एक संभावित rescue option हो सकता है और इस पर आगे बड़े अध्ययन किए जाने की जरूरत है।
क्लोबाजाम क्यों महत्वपूर्ण है?Clobazam benzodiazepine वर्ग की antiseizure medicine है। इसका इस्तेमाल लंबे समय से epilepsy के इलाज में अन्य anti-seizure medicines के साथ किया जाता रहा है।
AIIMS की पुरानी clinical study में भी epilepsy patients के बीच clobazam को add-on treatment के तौर पर इस्तेमाल करने का आकलन किया गया था। उस observational study में 417 मरीजों का विश्लेषण किया गया था और clobazam के इस्तेमाल के दौरान कुछ मरीजों में seizure freedom तथा कुछ में seizure severity में कमी देखी गई थी। हालांकि उस अध्ययन का उद्देश्य लंबे acute seizure को तुरंत रोकने की क्षमता की तुलना करना नहीं था।
नई स्टडी की खास बात यह है कि इसमें clobazam को एक acute prolonged seizure के समय दिया गया और इसकी तुलना intranasal midazolam से की गई।
अस्पताल के बाहर इलाज की चुनौतीलंबे समय तक चलने वाला seizure एक मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है। खासतौर पर convulsive seizure अगर पांच मिनट या उससे ज्यादा समय तक जारी रहे या एक दौरे के बाद दूसरा दौरा शुरू हो जाए और मरीज को होश वापस न आए, तो तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
ऐसे समय में दवा को जल्दी देना महत्वपूर्ण होता है। लेकिन हर prolonged seizure अस्पताल के अंदर शुरू नहीं होता। कई बार मरीज घर, सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर होता है। इसलिए ऐसी rescue medicines की जरूरत रहती है जिन्हें प्रशिक्षित caregiver या स्वास्थ्यकर्मी उचित निर्देशों के तहत जल्दी दे सके।
इसी वजह से mouth-dissolving clobazam जैसे विकल्प पर शोध महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे निगलने के लिए पानी की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे कुछ परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल आसान हो सकता है। हालांकि अध्ययन ने यह साबित नहीं किया है कि इसे हर व्यक्ति खुद से इस्तेमाल कर सकता है।
क्या क्लोबाजाम अब पहली पसंद की दवा है?नई स्टडी को इस तरह समझना सही नहीं होगा कि लंबे मिर्गी के दौरे में अब clobazam ही पहली पसंद की दवा बन गई है। अध्ययन का उद्देश्य मुख्य रूप से यह तुलना करना था कि mouth-dissolving clobazam और intranasal midazolam लंबे दौरे को कितनी प्रभावी ढंग से रोकते हैं।
शोधकर्ताओं ने खुद clobazam को एक संभावित सुविधाजनक और कम लागत वाले विकल्प के तौर पर आगे और शोध के योग्य बताया है। इसका अर्थ यह है कि इसके इस्तेमाल की संभावना उत्साहजनक है, लेकिन व्यापक clinical practice में इसकी जगह तय करने के लिए और मजबूत evidence की जरूरत है।
पहले के शोध से क्या पता चला था?Clobazam को status epilepticus यानी लंबे या बार-बार आने वाले दौरे की स्थिति में इस्तेमाल किए जाने पर पहले भी शोध किया जा चुका है। एक systematic review में उपलब्ध अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था। उसमें clobazam इस्तेमाल किए गए 76 reported status epilepticus patients में 36 मरीजों में remission की रिपोर्ट मिली थी। लेकिन समीक्षा ने यह भी स्पष्ट किया था कि उपलब्ध evidence सीमित है और clobazam की safety तथा efficacy पर पक्के निष्कर्ष निकालने के लिए prospective studies की जरूरत है।
इसलिए 2026 की नई randomized study का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें clobazam की तुलना एक established rescue option intranasal midazolam से सीधे की गई है।
मरीजों और परिवार वालों को क्या समझना चाहिए?मिर्गी के किसी मरीज को लंबे समय तक दौरा पड़ने पर परिवार को केवल दवा के असर का इंतजार नहीं करना चाहिए। अगर seizure पांच मिनट से ज्यादा चलता है, बार-बार दौरे आते हैं और बीच में व्यक्ति पूरी तरह होश में नहीं आता, सांस लेने में परेशानी होती है या दौरे के दौरान चोट लगती है, तो तुरंत emergency medical help लेनी चाहिए।
अगर किसी मरीज को डॉक्टर ने पहले से rescue medicine दी है, तो उसे केवल डॉक्टर की बताई योजना और सही प्रशिक्षण के अनुसार ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा या अपनी तरफ से clobazam की dose तय करना सुरक्षित नहीं है।
कुल मिलाकर क्या निकला?AIIMS नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं की यह नई randomized study बताती है कि mouth-dissolving clobazam लंबे समय तक चलने वाले कुछ epileptic seizures को रोकने में उपयोगी हो सकता है। अध्ययन में इसे intranasal midazolam से तुलना करने पर clinical और EEG-based seizure termination में statistically significant अंतर नहीं मिला।
हालांकि, सिर्फ 95 मरीजों के single-center trial के आधार पर clobazam को सभी मरीजों के लिए समान रूप से प्रभावी या हर prolonged seizure की standard emergency medicine घोषित नहीं किया जा सकता। शोधकर्ताओं ने भी इसके उपयोग की संभावनाओं को बेहतर तरीके से समझने के लिए आगे research की जरूरत बताई है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबे या लगातार दौरे को मेडिकल इमरजेंसी माना जाए और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता ली जाए।