बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार और ऑनलाइन एजुकेशन कंपनी क्यू लर्न प्राइवेट लिमिटेड (Cue Learn Pvt Ltd) के बीच 4 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि को लेकर चल रहे विवाद में अब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने अभिनेता की याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है।
यह फैसला उस समय आया जब निचली अदालत — नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) — ने इस मामले को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए अक्षय की याचिका को खारिज कर दिया था।
अक्षय कुमार ने 2021 में आईबीसी (Insolvency and Bankruptcy Code) की धारा 9 के तहत NCLT में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि क्यू लर्न ने उनके साथ हुए एंडोर्समेंट एग्रीमेंट के तहत तय की गई 4.83 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया।
याचिका में अभिनेता ने बताया कि उन्होंने समझौते में तय सभी जिम्मेदारियां पूरी कर ली थीं। कंपनी ने उन्हें पहली किस्त के रूप में 4.05 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया, लेकिन दूसरी किस्त नहीं दी। कंपनी का कहना था कि उसे चालान (invoices) प्राप्त नहीं हुए और तय तारीखों पर सहमति नहीं बनी।
इस साल जनवरी में NCLT की दिल्ली बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा विवाद दिवालियापन कानून के दायरे में नहीं आता। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि,
“NCLT का कार्य केवल उन ऋणों से संबंधित मामलों की सुनवाई करना है जो ‘ऑपरेशनल’ या ‘फाइनेंशियल डेट’ की श्रेणी में आते हैं। अनुबंध संबंधी विवाद इस दायरे में नहीं आते, इसलिए यह मंच उपयुक्त नहीं है।”
इसके बाद अक्षय कुमार की कानूनी टीम ने NCLAT में अपील दायर की, जिसमें यह दलील दी गई कि अभिनेता को दूसरी किस्त का भुगतान भले ही उनकी सेवाओं का उपयोग किया गया हो या नहीं, किया जाना था, क्योंकि यह अनुबंध की शर्तों में शामिल था।
कानूनी टीम ने यह भी आरोप लगाया कि NCLT ने याचिका को खारिज करते समय समझौते की अहम धाराओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। अब NCLAT इस अपील पर सुनवाई कर रहा है और अभिनेता को उम्मीद है कि उच्च निकाय से उन्हें राहत मिलेगी।