थामा फर्स्ट रिव्यू: शुरुआत से आख़िर तक थामे रखती है 'थामा', आयुष्मान खुराना की नई पहचान

लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद आयुष्मान खुराना बड़े पर्दे पर लौटे हैं, और इस बार उनका अंदाज़ बेहद अलग है। कॉमेडी के लिए मशहूर आयुष्मान अब एक डरावने अवतार में नजर आने वाले हैं, और फिल्म है – ‘थामा’। रश्मिका मंदाना और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ इस फिल्म में वह मैडॉक फिल्म्स की चर्चित हॉरर यूनिवर्स की छठी पेशकश में वैंपायर की भूमिका निभा रहे हैं।

जहां पिछली फिल्मों जैसे ‘स्त्री’, ‘रूही’, ‘भेड़िया’, ‘मुंज्या’ और आने वाली ‘स्त्री 2’ ने इस यूनिवर्स को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया, वहीं ‘थामा’ इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाली नई और ताजगी से भरी पेशकश बनकर सामने आई है। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका फर्स्ट रिव्यू सामने आ चुका है, और यह दर्शाता है कि यह हॉरर ड्रामा दर्शकों को गुदगुदाने, डराने और बांधे रखने में पूरी तरह सफल हो सकती है।

शानदार है निर्देशन, कहानी में है नयापन


फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने ‘थामा’ की जमकर तारीफ की है। उन्होंने अपने रिव्यू में लिखा कि मैडॉक फिल्म्स ने एक और सुपरहिट फिल्म दी है। हास्य, रोमांच और रोमांस का ऐसा संयोजन लंबे समय बाद देखने को मिला है। फिल्म की कहानी पूरी तरह नई है और दर्शक इससे जो उम्मीद नहीं कर रहे थे, वो सब इसमें मौजूद है।

निर्देशक आदित्य सरपोतदार को इस रिव्यू में खासतौर पर सराहा गया है। उनका निर्देशन फिल्म को न केवल एक स्पष्ट दिशा देता है, बल्कि इसे भारतीय लोक कथाओं से जोड़ते हुए एक रहस्यमयी और दिलचस्प अनुभव में बदल देता है। फिल्म का लेखन तेज़, संवाद चुटीले और ट्विस्ट इतने सटीक हैं कि दर्शक अनुमान लगाते-लगाते चौंकते रहते हैं। हां, फिल्म का दूसरा हिस्सा कुछ हद तक धीमा जरूर महसूस होता है, लेकिन कहानी का प्रभाव कम नहीं होता।

कलाकारों की परफॉर्मेंस ने बढ़ाई फिल्म की चमक

आयुष्मान खुराना ने अपनी परंपरागत इमेज से हटकर एक डरावने लेकिन चुलबुले किरदार में जान डाल दी है। वह वैंपायर के किरदार में डराते भी हैं और हंसाते भी। उनके अभिनय में डर और हास्य का जबरदस्त संतुलन है। रश्मिका मंदाना ने इस फिल्म में अपने करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई है और हर दृश्य में उनका आत्मविश्वास साफ नजर आता है।

नवाजुद्दीन सिद्दीकी, जो पहले ही अपने अलग अंदाज के लिए मशहूर हैं, इस फिल्म में भी अपने विचित्र और हास्यपूर्ण किरदार से जान फूंक देते हैं। उनके संवाद और बॉडी लैंग्वेज फिल्म को ऊंचाई पर ले जाते हैं। परेश रावल भी फिल्म की मजबूती का एक अहम स्तंभ हैं। उनका टाइमिंग और अभिनय अनुभव हर दृश्य को गहराई देता है।

संगीत और सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म की ताकत

‘थामा’ न केवल अपने किरदारों और कहानी के लिए सराही जा रही है, बल्कि इसका संगीत भी चर्चा में है। बैकग्राउंड स्कोर जहां सस्पेंस और हॉरर को बनाए रखता है, वहीं गानों में नयापन और आकर्षण है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक सिनेमाई अनुभव बनाती है, खासकर उन सीन्स में जहां डर का माहौल बनाना जरूरी होता है।