रणबीर कपूर की आगामी फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्साह है। पहले लुक में रणबीर और यश को देखने के बाद से ही यह फिल्म सुर्खियों में है। फिल्म की स्टारकास्ट अब धीरे-धीरे सामने आ रही है और इनमें एक अहम नाम है टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अदाकारा इंदिरा कृष्णन का, जो इस फिल्म में ‘कौशल्या’ की भूमिका में नजर आएंगी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में इंदिरा ने न सिर्फ रणबीर कपूर के साथ अपने अनुभव साझा किए, बल्कि आज के समय में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के एक्टिंग में कदम रखने को लेकर अपनी साफ राय भी रखी।
इंदिरा की साफ टिप्पणी – “इंफ्लुएंसर और कलाकार में फर्क होता है”बॉलीवुड बबल्स को दिए इंटरव्यू में इंदिरा कृष्णन ने अपने अब तक के करियर, टीवी शोज़ और फिल्मों के सफर पर विस्तार से बात की। इंदिरा ने पहले रणबीर कपूर के साथ फिल्म एनिमल में काम किया था और अब वे उनके साथ रामायण में भी नजर आएंगी। लेकिन इस बातचीत में असली चर्चा छिड़ी जब बात सोशल मीडिया पर मशहूर चेहरों, यानी इन्फ्लुएंसर्स की आई।
इंदिरा ने साफ शब्दों में कहा – “सिर्फ सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स होने से कोई एक्टर नहीं बन सकता। एक्टिंग एक कला है, जिसके लिए समर्पण और अभ्यास चाहिए। अगर आपमें कोई विशेष प्रतिभा नहीं है, तो सिर्फ लोकप्रियता के दम पर आप परदे पर टिक नहीं सकते। दर्शक अंततः उस किरदार को स्वीकारते हैं जो दमदार हो और जिसे मेहनत से निभाया गया हो। इसलिए मेरा मानना है कि इन्फ्लुएंसर्स को अपनी क्रिएटिव फील्ड तक सीमित रहना चाहिए और एक्टिंग जैसी गंभीर विधा में तभी कदम रखना चाहिए जब वे वास्तव में तैयार हों।”
सुंदर दिखने से अभिनय नहीं आताइंदिरा ने आगे अपने एक हालिया अनुभव को साझा करते हुए कहा – “मैं एक बार एक कैफे में बैठी थी, और वहां एक लड़की को देखकर किसी ने कह दिया कि ये तो बहुत सुंदर है, इसे एक्ट्रेस बना देना चाहिए। अब ये ट्रेंड बन गया है कि बस चेहरा अच्छा हो और सोशल मीडिया पर कुछ हज़ार फॉलोअर्स हों, तो वो एक्टिंग करने आ जाए। लेकिन लोग अब जागरूक हो रहे हैं, उन्हें खुद भी एहसास हो रहा है कि महज खूबसूरती से बात नहीं बनती।”
उन्होंने यह भी जोड़ा – “टीवी इंडस्ट्री में फिल्म्स जैसी एक्टिंग वर्कशॉप नहीं होती। यहां कलाकारों को कैमरे के सामने तुरंत परफॉर्म करना होता है। ऐसे में जब स्क्रिप्ट और किरदार की गहराई समझने का समय नहीं मिलता और कलाकार पूरी तरह तैयार नहीं होता, तो वो परफॉर्मेंस प्रभावित होती है। यही वजह है कि कई बार शो या किरदारों का डाउनफॉल हो जाता है।”
एक्टिंग का सम्मान करें, शोहरत की जल्दबाज़ी नहींइंदिरा कृष्णन की बातें स्पष्ट रूप से इस ओर इशारा करती हैं कि एक्टिंग सिर्फ कैमरे के सामने खड़े हो जाने का नाम नहीं, बल्कि एक गहरी कला है जिसे सीखने और समझने की जरूरत है। सोशल मीडिया के जमाने में जहां हर कोई सेलिब्रिटी बनने की होड़ में है, वहां इंदिरा जैसे अनुभवी कलाकार की सीख यह याद दिलाती है कि अभिनय का क्षेत्र सतही नहीं, बल्कि बहुत ही गहन और जिम्मेदारी भरा है।