मुझे बर्बाद कर दिया था लगान ने... आमिर खान की फिल्म के अभिनेता अमीन हाजी का चौंकाने वाला बयान

सिल्वर जुबली वर्ष के मौके पर इससे जुड़े कलाकार और तकनीशियन अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इसी दौरान फिल्म में बागा का किरदार निभाने वाले अभिनेता और लेखक अमीन हाजी ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

अमीन का कहना है कि 'लगान' ने उन्हें जितनी पहचान दिलाई, उतनी ही बड़ी चुनौती भी उनके सामने खड़ी कर दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह फिल्म एक तरह से उन्हें बर्बाद कर गई थी।

'सच कहूं तो लगान ने मुझे बर्बाद कर दिया'

फिल्म में गूंगे क्रिकेटर बागा की भूमिका निभाने वाले अमीन हाजी ने पीटीआई से बातचीत के दौरान अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने कहा कि 'लगान' जैसी फिल्म में काम करने के बाद उनके लिए आगे का सफर आसान नहीं रहा।

अमीन ने कहा, अगर मैं सच बोलूं तो लगान ने मुझे बर्बाद कर दिया था। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उन्होंने मशहूर शायरी का सहारा भी लिया। उन्होंने कहा, हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले... बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले।

उनके मुताबिक, 'लगान' का अनुभव इतना बड़ा और प्रभावशाली था कि उसके बाद उन्हें कोई भी प्रोजेक्ट उसी स्तर का महसूस नहीं हुआ।

ऑफर्स तो आए, लेकिन मन नहीं माना

अमीन हाजी ने बताया कि फिल्म की सफलता के बाद उन्हें कई फिल्मों के प्रस्ताव मिले, लेकिन वह किसी भी भूमिका को स्वीकार नहीं कर पाए। उनका मानना था कि जो किरदार और कहानियां उन्हें ऑफर की जा रही थीं, वे 'लगान' के स्तर तक नहीं पहुंचती थीं।

उन्होंने कहा, फिल्म पूरी होने के बाद मैंने अभिनय से लगभग दूरी बना ली थी। ऑफर्स लगातार मिल रहे थे, लेकिन मुझे ऐसा कोई किरदार नहीं मिल रहा था जो मुझे उत्साहित कर सके। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि मैं खुद भी समझ नहीं पा रहा था कि आगे क्या करना है।

अमीन ने बताया कि एक समय ऐसा आया जब निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और उनकी पत्नी ने उनसे पूछा कि आखिर वह आगे क्या करना चाहते हैं। तब उनके पास इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं था।
सम्मान खोने का डर भी था

अमीन का कहना है कि 'लगान' के बाद उन्होंने जो सम्मान और पहचान हासिल की थी, उसे वह किसी कमजोर भूमिका के कारण खोना नहीं चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने लंबे समय तक कोई फैसला नहीं लिया।

उन्होंने कहा, मैंने जो प्रतिष्ठा अर्जित की थी, उसे बचाकर रखना चाहता था। सच कहूं तो मैं खुद को बहुत बड़ा अभिनेता भी नहीं मानता था। मैंने सिर्फ ईमानदारी से अपना काम किया था। अगर मेरी परफॉर्मेंस लोगों को पसंद आई, तो उसका श्रेय फिल्म की स्क्रिप्ट, निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और पूरी टीम को जाता है। इन सभी ने मुझे बेहतर काम करने में मदद की।

यहीं से शुरू हुआ लेखक बनने का सफर

जब अभिनय को लेकर असमंजस बना रहा, तब आशुतोष गोवारिकर ने अमीन को एक नया रास्ता सुझाया। उस समय वह अपनी अगली फिल्म पर काम कर रहे थे, जो बाद में शाहरुख खान अभिनीत 'स्वदेस' बनी।

अमीन ने बताया कि उस दौर में फिल्म का नाम 'देश' रखा गया था। आशुतोष ने उनसे पूछा कि क्या वह फिल्म की लेखन प्रक्रिया में उनका साथ देना चाहेंगे।

उन्होंने याद करते हुए कहा, मैंने उनसे कहा कि आपके साथ काम करने के लिए तो कई बड़े लेखक तैयार होंगे, फिर आप मुझे क्यों बुला रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि तुम ईमानदार हो, तुम्हारी सोच साफ है और तुम कहानी पर सच्ची प्रतिक्रिया देते हो।

आशुतोष ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं और यही बातचीत उनके लेखन करियर की शुरुआत बन गई।

पत्नी की नाराजगी और आमिर खान का साथ

अमीन ने आगे बताया कि उस समय उनकी पत्नी भी इस बात से परेशान थीं कि वह कोई काम नहीं कर रहे थे और घर पर ही बैठे रहते थे। ऐसे में आशुतोष ने उन्हें समझाया कि यदि परिवार और भविष्य की जिम्मेदारियां निभानी हैं तो सक्रिय होकर काम करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, आशुतोष ने मुझसे कहा कि अगर तुम्हें अपना परिवार संभालना है तो कुछ न कुछ करना ही होगा। इसके बाद आमिर खान प्रोडक्शंस ने मुझे इस प्रोजेक्ट में शामिल किया। मुझे मेहनताना मिला और आमिर खान ने भी मेरा समर्थन किया।

अमीन के अनुसार, आमिर ने उनकी पत्नी को भी टीम का हिस्सा बनाने की बात कही क्योंकि उन्होंने भी इस पूरे सफर में उनका साथ दिया था। इसी तरह धीरे-धीरे एक नया अध्याय शुरू हुआ।

'लगान' बनी मेरी सबसे बड़ी पाठशाला

अमीन हाजी का कहना है कि 'लगान' के बाद उन्होंने बहुत ज्यादा अभिनय नहीं किया। उन्होंने कुछ चुनिंदा फिल्मों में काम जरूर किया, लेकिन उनका झुकाव लेखन और फिल्म निर्माण की ओर बढ़ता चला गया।

उन्होंने कहा, मैंने बाद में कुछ ही फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन लेखन की दुनिया में मेरी पहचान बनी। इसका सबसे बड़ा श्रेय आशुतोष गोवारिकर और 'लगान' को जाता है।

अमीन ने आगे कहा कि यह फिल्म उनके लिए किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं थी। उनके शब्दों में, लगान मेरी यूनिवर्सिटी रही है। इस फिल्म ने मुझे सिनेमा को समझना सिखाया, कहानी कहने की कला सिखाई और फिल्म निर्माण की बारीकियों से परिचित कराया।

गौरतलब है कि अमीन हाजी बाद में लेखक के रूप में भी सक्रिय रहे। उन्होंने विक्रम भट्ट की फिल्मों 'हॉन्टेड 3डी' और 'डेंजरस इश्क' के लिए सह-लेखक के तौर पर काम किया। इसके अलावा उन्होंने अपनी फिल्म 'कोई जाने ना' का निर्देशन भी किया। आज वह अपने करियर के सफर को याद करते हुए मानते हैं कि 'लगान' ने भले ही उन्हें कठिन दौर में धकेला हो, लेकिन उसी फिल्म ने उन्हें नई दिशा और नई पहचान भी दी।