कांतारा चैप्टर 1: क्या थिएटर्स में बने रहकर पार कर पाएगी 500 करोड़ का आंकड़ा, या डिजिटल रिलीज़ की आंधी ले डूबेगी सपना?

ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। एक ओर जहां सिनेमाघरों में इसकी ओपनिंग ने झंडे गाड़ दिए हैं, वहीं दूसरी ओर फिल्म के डिजिटल रिलीज़ को लेकर सामने आई खबरों ने इसकी थिएटर परफॉर्मेंस को लेकर कुछ अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह फिल्म भी अपने पूर्ववर्ती भाग की तरह बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच पाएगी? या फिर डिजिटल की तेज़ हवा सिनेमाघरों के दीयों को बुझा देगी?

याद करें, साल 2022 में रिलीज़ हुई 'कांतारा' ने किस तरह शून्य प्रचार के बावजूद दर्शकों के दिलों में जगह बनाई थी। उस फिल्म ने न सिर्फ भारत में ₹300 करोड़ से ज्यादा का नेट कलेक्शन किया था, बल्कि वर्ल्डवाइड ₹400 करोड़ से अधिक की कमाई करते हुए एक संस्कृति और आस्था से जुड़ी कहानी को वैश्विक स्तर पर पहुंचा दिया था।

अब 'कांतारा चैप्टर 1' के रूप में उसका प्रीक्वल बड़े परदे पर उतरा है — बड़े बजट, भव्य दृश्य, और पहले से बनी एक फैन फॉलोइंग के साथ। ऋषभ शेट्टी इस बार निर्देशक और अभिनेता दोनों की भूमिका में पहले से कहीं ज्यादा निपुण नजर आ रहे हैं। ओपनिंग डे के आंकड़े दमदार हैं और पहले दिन सिनेमाघरों में इस फिल्म के लिए जो भीड़ उमड़ी उससे यह उम्मीद जगी है कि यह फिल्म अपने 4 दिन लम्बे वीकेंड़ में आसानी से 100 करोड़ के आंकड़े को छूने में कामयाब हो जाएगी।

मगर इस बार परिदृश्य थोड़ा अलग है


अब फिल्म के डिजिटल राइट्स और ओटीटी रिलीज़ को लेकर खबरें पहले हफ्ते में ही सुर्खियों में आ चुकी हैं। प्राप्त समाचारों के अनुसार कांतारा चैप्टर 1 अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। इसके डिजिटल राइट्स को अमेजन प्राइम वीडियो ने 125 करोड़ रुपये में खरीदा है। इतनी मोटी डील के साथ यह पहली कन्नड़ फिल्म बन गई है जिसका डिजिटल राइट्स इतने भारी दाम में बिके हैं। इस सूची में दूसरे नंबर पर केजीएफ 2 का नाम आता है। डिजिटल राइट्स सभी भाषाओं में खरीदे गए हैं। दर्शक इसे 30 अक्टूबर से अमेज़न प्राइम पर देख पाएंगे। फिल्म सिनेमाघरों पर रिलीज होने के चार हफ्ते बाद ही ओटीटी पर उपलब्ध होगी। कन्नड़, तेलुगू, तमिल और मलयालम वर्जन 30 अक्टूबर को आएंगे, जबकि हिंदी वर्जन आठ हफ्तों बाद रिलीज होगा।
यह खबर भले ही प्रोड्यूसर्स के लिए फायदे का सौदा हो, लेकिन इसका असर थिएटर कलेक्शन पर पड़ सकता है। शहरी दर्शक वर्ग, जो पहले से ही ओटीटी पर निर्भर होता जा रहा है, अब फिल्म को बड़े परदे की बजाय कुछ हफ्तों बाद अपने स्क्रीन पर देखने का विकल्प चुनेगा। इससे खासकर दूसरे और तीसरे सप्ताह में फुटफॉल में गिरावट आ सकती है। यही वह मोड़ होता है जहां फिल्मों का लॉन्ग रन तय होता है।

अब सवाल ये है: क्या 'कांतारा चैप्टर 1' अपने पहले भाग से आगे निकल पाएगी?


जहां तक शुरुआत की बात है, 'कांतारा चैप्टर 1' ने पहले भाग से कहीं अधिक बजट और प्रचार के साथ मैदान में कदम रखा है। फिल्म का कंटेंट भी गहरा और जड़ से जुड़ा हुआ है, जो दर्शकों को भावनात्मक स्तर पर बांधता है। लेकिन इस बार यह मुकाबला सिर्फ दर्शकों की पसंद का नहीं, बल्कि धैर्य का भी है।

पहली फिल्म ने अपने कंटेंट के दम पर लंबी रेस तय की थी, जबकि इस बार डिजिटल रिलीज़ की जल्दबाज़ी थिएटर की उम्र को छोटा कर सकती है।

यदि फिल्म तीसरे सप्ताह तक अपनी गति बनाए रखने में कामयाब रहती है और वर्ड-ऑफ-माउथ की ताकत पहले की तरह काम करती है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘कांतारा चैप्टर 1’ ₹500 करोड़ के क्लब में शामिल होने की पूरी क्षमता रखती है।

लेकिन अगर ओटीटी के असर और मल्टीपल रिलीज़ (जैसे 'जॉली LLB 3', 'तुलसी कुमारी') के बीच दर्शकों का ध्यान बंटा, तो फिल्म की लाइफटाइम कमाई 350-400 करोड़ के बीच रुक सकती है।

अंततः, यह लड़ाई सिर्फ कमाई की नहीं, दर्शकों के धैर्य और सिनेमाघरों में अनुभव के महत्व की भी है। कांतारा चैप्टर 1 के पास विरासत है, दमदार कहानी है, और एक समर्पित दर्शक वर्ग भी। अब देखना ये है कि क्या ये सब मिलकर इसे ₹500 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंचा पाएंगे या नहीं।