अरुण गोविल ने एआर रहमान के कम्युनल बयान पर रखी अपनी बेबाक राय, जताई असहमति, बोले- 'शाहरुख-सलमान ही असली सुपरस्टार'

ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान हाल ही में BBC एशियन नेटवर्क को दिए गए एक इंटरव्यू के बाद चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। म्यूजिक इंडस्ट्री में बदलते फैसलों और रचनात्मक स्वतंत्रता पर बात करते हुए रहमान ने कहा था कि आज कई अहम निर्णय ऐसे लोग ले रहे हैं, जो खुद क्रिएटिव नहीं हैं। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति कहीं न कहीं सांप्रदायिक सोच से भी जुड़ी हो सकती है। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक बहस छिड़ गई। अब इस पूरे विवाद में ‘रामायण’ फेम अभिनेता अरुण गोविल की एंट्री हुई है, जिन्होंने रहमान की बात से साफ तौर पर असहमति जताई है।

अरुण गोविल ने रखी अपनी बेबाक राय

रामानंद सागर की ऐतिहासिक सीरियल ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अरुण गोविल ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। शुक्रवार शाम फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) और सिने आर्टिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट (CAWT) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में सांप्रदायिक भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

“फिल्म इंडस्ट्री में कभी भेदभाव नहीं रहा”

अरुण गोविल ने कहा, “मेरे अनुभव में हमारी फिल्म इंडस्ट्री में कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी को उसके धर्म या समुदाय की वजह से काम से वंचित किया गया हो। यहां हर धर्म और हर पृष्ठभूमि के लोगों ने काम किया है और आज भी कर रहे हैं। सच कहूं तो फिल्म इंडस्ट्री शायद एकमात्र ऐसी इंडस्ट्री है, जहां सांप्रदायिक भेदभाव देखने को नहीं मिलता।”

शाहरुख-सलमान का दिया उदाहरण

अपनी बात को मजबूती देने के लिए गोविल ने हिंदी सिनेमा के दिग्गज सितारों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अगर इंडस्ट्री में सांप्रदायिक सोच हावी होती, तो दिलीप कुमार जैसे कलाकार अपने दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार कैसे बनते? आज भी शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे सितारे इंडस्ट्री के सबसे बड़े नाम हैं। यह अपने आप में इस बात का सबूत है कि यहां टैलेंट को प्राथमिकता दी जाती है, न कि धर्म को।”

रहमान के बयान से क्यों मचा विवाद?

दरअसल, ए.आर. रहमान ने BBC एशियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में यह बताया था कि बीते कुछ वर्षों में क्रिएटिव पावर स्ट्रक्चर में बदलाव आया है। उन्होंने कहा था कि कई बार फैसले ऐसे लोग ले रहे हैं, जो खुद रचनात्मक प्रक्रिया से जुड़े नहीं होते। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति सांप्रदायिक सोच से जुड़ी हो सकती है, हालांकि उन्होंने साफ किया कि उन्होंने इसे सीधे तौर पर महसूस नहीं किया है। रहमान ने यह भी कहा कि ऐसे फैसले अक्सर उन तक घुमाकर पहुंचते हैं और उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की तुलना ‘चाइनीज विस्पर्स’ से की।

सफाई में जारी किया वीडियो संदेश

बयान पर बढ़ते विवाद के बाद ए.आर. रहमान ने एक वीडियो मैसेज जारी कर अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया है और उनका मकसद किसी भी समुदाय या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था। बावजूद इसके, उनके बयान ने इंडस्ट्री में रचनात्मक स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है, जिसमें अब अरुण गोविल जैसे वरिष्ठ कलाकारों की राय भी सामने आ चुकी है।