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उत्तर कोरिया में लोगों को करनी पड़ती हैं रोने की प्रैक्टिस, नहीं तो हो सकती हैं जेल की सजा

तानाशाही रवैये के चलते यहां लोगों को रोने की प्रैक्टिस भी करनी पड़ती हैं। जी हां, उत्तर कोरिया में शासक की मौत के बाद उसके लिए रोने का भी रिवाज है।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Wed, 09 Dec 2020 2:34:01

उत्तर कोरिया में लोगों को करनी पड़ती हैं रोने की प्रैक्टिस, नहीं तो हो सकती हैं जेल की सजा

जब भी कभी उत्तर कोरिया की बात की जाती हैं तो वहां के अनोखे और अजीबोगरीब कानून की बात भी सामने आती हैं। 'तानाशाह' किम जोंग उन को अपने फैसलों के लिए जाना जाता हैं। इसी तानाशाही रवैये के चलते यहां लोगों को रोने की प्रैक्टिस भी करनी पड़ती हैं। जी हां, उत्तर कोरिया में शासक की मौत के बाद उसके लिए रोने का भी रिवाज है। अगर कोई इस रिवाज को नहीं पूरा करता है, तो किम परिवार उसे सजा देता है।

किम जोंग उन साल 2011 में अपने पिता किम जोंग इल की मौत के बाद उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता बने थे। उनके दादा किम-II सुंग उत्तर कोरिया के संस्थापक और पहले नेता थे, जिनकी मौत साल 1994 में हुई थी। इसके बाद किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल ने सत्ता संभाली। कहते हैं कि उत्तर कोरिया के हर घर में किम जोंग के पिता और उनके दादा की तस्वीरें लगाना अनिवार्य है।

उत्तर कोरिया में लोगों को करनी पड़ती हैं रोने की प्रैक्टिस, नहीं तो हो सकती हैं जेल की सजा

किम जोंग इल की मौत के बाद प्रजा को शोक सभा में खुलकर रोने का आदेश मिला। इस शोक सभा में लोग पूरे दम से चिल्ला-चिल्लाकर और छाती पीटकर रोए और जो ठीक से नहीं रो सका, वो अगले ही दिन गायब हो गया। इस बात की मीडिया में भी काफी चर्चा रही थी। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शासक की मौत के बाद नए राजा किम जोंग उन ने पिता के लिए बहुत सी शोकसभाएं रखीं। इन शोकसभाओं में जनता को आकर रोकर ये साबित करना था कि वे पुराने राजा से प्यार करते थे।

शोकसभाओं में रोना किम परिवार के लिए उनकी वफादारी का भी सबूत था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये शोकसभाएं 10 दिनों तक चलीं, जिसमें युवा, बच्चे, बूढ़े, औरत-मर्द सबके लिए रोना अनिवार्य था। इतना ही नहीं इन शोकसभाओं के दौरान ये नोट किया गया कि कौन-कौन उतनी ठीक तरह से नहीं रो रहा था। इसे किम परिवार के प्रति वफादारी में कमी माना गया।शोकसभाओं में रोना किम परिवार के लिए उनकी वफादारी का भी सबूत था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये शोकसभाएं 10 दिनों तक चलीं, जिसमें युवा, बच्चे, बूढ़े, औरत-मर्द सबके लिए रोना अनिवार्य था। इतना ही नहीं इन शोकसभाओं के दौरान ये नोट किया गया कि कौन-कौन उतनी ठीक तरह से नहीं रो रहा था। इसे किम परिवार के प्रति वफादारी में कमी माना गया।

10 दिन की शोकसभा के बाद क्रिटिसिज्म सेशन हुआ, जिसमें किम खुद उपस्थित थे। इस सेशन में तय हुआ कि ठीक से नहीं रोने वालों को तुरंत 6 महीने की कड़ी कैद में रखा जाए। इसके बाद हजारों दोषियों को रातोंरात घर से उठा लिया गया। कम रोने की वजह से बहुतों का पूरा का पूरा परिवार ही महीनों लेबर कैंप में रहा।

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