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एक बार फिर चर्चा में आई क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin, जाने क्या है यह जिसकी मांग कर रहा था ट्विटर अकाउंट हैक करने वाला

असल में बिटकॉइन (Bitcoin) एक क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) है। इसे सातोशी नकामोति ने 2008 में बनाया था।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 16 Jul 2020 10:04:46

एक बार फिर चर्चा में आई क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin, जाने क्या है यह जिसकी मांग कर रहा था ट्विटर अकाउंट हैक करने वाला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बुधवार की रात अब तक का सबसे बड़ा साइबर अटैक हुआ है। आईफोन कंपनी एपल, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क, अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस, माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई नामी हस्तियों और कंपनियों के ट्विटर अकाउंट बुधवार को हैक हो गए। बुधवार को अकाउंट हैक करने के बाद सभी अकाउंट्स से ट्वीट कर बिटकॉइन के रूप में पैसा मांगा जा रहा था। बिल गेट्स के ट्विटर अकाउंट से लिखा गया था कि हर कोई मुझसे कह रहा है कि ये समाज को वापस देने का वक्त है, तो मैं कहना चाहता हूं कि अगले तीस मिनट में जो पेमेंट मुझे भेजी जाएगी मैं उसका दोगुना लौटाऊंगा। आप 1000 डॉलर का बिटक्वाइन भेजो, मैं 2000 डॉलर वापस भेजूंगा। हालांकि, अभी इस मुश्किल को दूर कर लिया गया है।

ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या है बिटकॉइन और यह क्यों चर्चा में रहता है?

क्या है बिटकॉइन

असल में बिटकॉइन (Bitcoin) एक क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) है। इसे सातोशी नकामोति ने 2008 में बनाया था। हालांकि सातोशी नकामोति कौन है इस बारे में अभी किसी को पता नहीं है। कोई इंसान है या संस्था? कहां का है? इसे पहली बार 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया था। इसको कोई बैंक या सरकार कंट्रोल नहीं करती है। भारत में रिजर्व बैंक ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाज़त दे दी है। यानी भारत में भी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त हो सकती है।

क्या होती है क्रिप्टो करेंसी

क्रिप्टो का मतलब ऐसी चीज जो रियल न हो। क्रिप्टो करेंसी असली मुद्रा नहीं होती है, यह एक वर्चुअल मुद्रा होती है। इसे कंप्यूटर बेस्ड ऐल्गोरिदम्स पर बनाया जाता है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है, जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं। बगैर इंटरनेट के यह करेंसी काम नहीं करेगा। बता दें कि इस करेंसी पर किसी देश या सरकार का मालिकाना हक नहीं है। दुनिया में और भी कई डिजिटल करेंसी हैं, जैसे- चीन की e-Renminbi है। बिटकॉइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो।

क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न यानी मुनाफा काफ़ी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है। क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

बिटकॉइन की क्या है कीमत

साल 2009 में लॉन्च होने के समय बिटकॉइन की वैल्यू 0 थी। लेकिन आज इसकी कीमत हजारों डॉलर में पहुंच चुकी है। इस करेंसी का फायदा ऑनलाइन लेन-देन में होता है। इस करेंसी पर किसी तरह की नोटबंद या दुनिया में नोटों को लेकर किए जाने वाले बदलावों का असर नहीं दिखेगा।

एक बार फिर चर्चा में आई क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin, जाने क्या है यह जिसकी मांग कर रहा था ट्विटर अकाउंट हैक करने वाला

कैसे होता है बिटकॉइन से लेनदेन

बिटकॉइन (Bitcoin) के लेनदेन का एक लेज़र बनाया जाता है। दुनिया में लाखों व्यापारी भी बिटकॉइन से लेनदेन करते हैं। हालांकि किसी भी केंद्रीय बैंक ने अभी इसको मान्यता नहीं दी है। अमेरिका की कई दिग्गज कंपनियां भी बिटकॉइन को स्वीकार करती हैं। इंटरनेट की दुनिया में इसकी खरीद-फरोख्त कराने वाले कई एक्सचेंज हैं। इंटरनेट की कई वेबसाइट और ऐप के माध्यम से इसकी खरीद-फरोख्त होती है। इसमें खरीद-फरोख्त करने वालों की जानकारी छुपी रहती है।

भारी उतार-चढ़ाव और जोखिम

क्रिप्टो करेंसी के कई फ़ायदे भी हैं। पहला और सबसे बड़ा फ़ायदा तो ये है कि डिजिटल करेंसी है, जिससे इसके गायब होने या चोरी होने का खतरा नहीं होता। बिटकॉइन में निवेश से लोगों को भारी मुनाफा होता है, लेकिन इसमें काफी उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए जोखिम भी बहुत ज्यादा है।

कई बार एक ही दिन में बिटक्वाइन बिना किसी चेतावनी के 40 से 50% गिर गया। 2013 के अप्रैल में बिटकॉइन की कीमत एक ही रात में 70% से गिरकर 233 डॉलर से 67 डॉलर पर आ गई थी।

बिटकॉइन के नुकसान

बिटकॉइन का भाव देखते ही देखते कई बार काफी नीचे गिर जाता है। इस वर्चुअल करेंसी से लेन देन करना जोखिम से भरा हुआ है। हालांकि इस करेंसी का ज्यादातर इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए किया जाता है। ताकि पैसों को किसी भी एजेंसी द्वारा ट्रैक न किया जा सके। इससे कई बार साइबर अपराधों का नाम भी जुड़ चुका है। कुछ ऐसा ही आज भी देखने को मिला है।

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