
इस कोरोनाकाल में सभी को अपनी सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी जा रही हैं ताकि कोरोना से लड़ने में मदद मिल सकें, खासतौर से अस्थमा मरीजों को। आने वाले दिनों में दिवाली का त्यौहार है जिसपर पटाखे जलाए जाते हैं जो कि अस्थमा रोगियों के लिए इस कोरोनाकाल में खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके लिए राज्य मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश में दिवाली पर पटाखों पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने पर सहमति दी है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के चार डॉक्टर्स की ओर से कॉलेज प्राचार्य को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए आयोग ने सीएस, गृह विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस और सभी कलेक्टर-एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में 12 अक्टूबर को रिपोर्ट भी तलब की है। गौरतलब है कि दैनिक भास्कर में डॉक्टरों के प्रकाशित पत्र पर प्रसंज्ञान लेते हुए रविवार को कार्रवाई की निर्देश जारी किए। आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष जस्टिस महेशचंद्र शर्मा का कहना है कि इस समय पूरा संसार कोरोना संक्रमण से पीड़ित है और दिवाली पर पटाखें जलाए तो मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन रोग विभागाध्यक्ष डा. एस.बनर्जी, सीनियर प्रोफेसर डा. रमन शर्मा, डा. अभिषेक अग्रवाल एवं डा. सुनील महावर ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखकर यह भावना व्यक्त करते हुए मांग की है कि कोरोना बीमारी के चलते दिवाली पर पटाखों पर पूरी रोक लगाई जाए।
हर साल पटाखों के 1500 अस्थाई लाइसेंस जारी होते हैं, लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 15 करोड़ रुपए से अधिक के पटाखों की बिक्री होती है। जयपुर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में इस वर्ष 1 नवंबर से 16 नवंबर की अवधि के लिए अस्थाई लाइसेंस दिए जाएंगे। हर वर्ष जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में करीब 1550 और ग्रामीण क्षेत्रों के 20 कस्बों में करीब 40 अस्थायी लाइसेंस जारी होते हैं।
इस बार आवेदन तो आ गए, लेकिन लाइसेंस कब जारी होंगे यह तय नहीं। शहर में 108 स्थाई लाइसेंसधारी पटाखा विक्रेता है। साथ ही भारी विस्फोटकों के लिए 52 लाइसेंस एक्सप्लोजिव्स डिपार्टमेंट नागपुर ने जारी किए हुए हैं। पुलिस कमिश्नरेट एवं जिला प्रशासन पटाखों पर रोक संबंधी सुझाव पर सरकार के आदेशों की प्रतीक्षा में है।














