नए किसान कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन का आज 11वां दिन है। किसान कृषि कानूनों की वापसी के सवाल पर सरकार से 'हां' या 'ना' के जवाब का इंतजार कर रहा है। किसान 8 दिसंबर को 'भारत बंद' पर अड़े हुए हैं। इस बंद को 11 राजनीतिक दलों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन है।
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करेगी। पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे राहुल गांधी के किसानों को समर्थन को मजबूत करने वाला कदम करार दिया। इसके अलावा लेफ्ट पार्टियों ने भी एक संयुक्त बयान जारी कर भारत बंद का खुलकर समर्थन किया।
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC), लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD), तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS), राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी राष्ट्रव्यापी बंदी का साथ देने का फैसला किया है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी बंद के समर्थन का ऐलान किया है। केजरीवाल ने एक ट्वीट में 'सभी देशवासियों से अपील की कि सब लोग किसानों का साथ दें और इसमें हिस्सा लें।'
![8 दिसंबर को 'भारत बंद': किसानों के सपोर्ट में 11 पार्टियां और 10 ट्रेड यूनियन; सरकार ने कहा - निरस्त नहीं होंगे कृषि कानून farmers protest,kisan andolan,bharat bandh,delhi kisan protest,news]()
किसान द्वारा चल रहे आंदोलन के बीच सरकार ने यह तो जाहिर कर दिया है कि नए कृषि कानूनों को वापस लेने का उनका कोई मूड नहीं है। इसकी पुष्टि रविवार को केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के एक बयान से भी होती है। उन्होंने साफ कहा कि कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जो तीनों कानून लाए हैं, वो किसानों के हित में हैं। चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार प्रदर्शनकारी किसानों की मांग के अनुसार इन कानूनों में कुछ संशोधन कर देगी। उन्होंने कहा, 'ये कानून किसानों को आजादी देंगे। हमने हमेशा कहा कि किसानों को अपनी मर्जी से फसल बेचने का अधिकार होना चाहिए। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में भी यही सिफारिश की गई है। मुझे नहीं लगता है कि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। अगर जरूरत पड़ी तो इनमें कुछ संशोधन किए जा सकते हैं ताकि आंदोलनकारी किसानों को मनाया जा सके।'
चौधरी ने कहा, 'मुझे लगता है (राज्यों में) कांग्रेस सरकार और विपक्ष किसानों को भड़का रहे हैं। देश के किसान इन कानूनों के साथ हैं लेकिन कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने की कोशिश में हैं। मुझे पीएम (नरेंद्र) मोदी के नेतृत्व और किसानों पर भूरा भरोसा है। मुझे यकीन है कि किसान कोई ऐसा फैसला नहीं करेंगे जिससे देश में कहीं भी अशांति हो। इन कानूनों से उन्हें आजादी मिली है। मुझे नहीं लगता कि जो असली किसान हैं, अपने खेतों में काम कर रहे हैं, इससे परेशान हैं।'
किसानों की मांगों के आगे नरम पड़ी सरकार
ध्यान रहे कि किसान संगठनों से कई दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद केंद्र सरकार थोड़ी नरम जरूर पड़ी है। चौधरी ने कहा कि सरकार लिखित में दे सकती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बरकरार रखा जाएगा। हालांकि चौधरी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में किसान आंदोलन को डिसक्रेडिट करते हुए यह भी कह दिया कि उन्हें नहीं लगता कि ये असली किसान हैं। चौधरी ने कहा, 'मैं नहीं मानता कि असली किसान, जो अपने खेतों में काम कर रहे हैं, वे इस बारे में चिंतित हैं।'
किसान आंदोलन के साथ खड़े हुए हैं ये संगठनकिसानों ने भारत बंद के तहत 'दिल्ली आने वाली सभी सड़कें ब्लॉक' करने की चेतावनी दी है। टोल प्लाजाओं पर भी कब्जे की योजना है। केंद्र सरकार और कॉर्पोरेट्स के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा। राजनीतिक हलकों से इतर कई व्यापारिक यूनियनों और संगठनों ने भी भारत बंद का समर्थन किया है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
- ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमिटी (AIKSCC)
- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
- इंडियन नैशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
- हिंद मजदूर सभा (HMS)
- ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
- सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)
- ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
किसान नेताओं ने बताया कि उनका यह आंदोलन अब सिर्फ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका स्वरूप देशव्यापी बन चुका है और इसकी तस्वीर 8 दिसंबर को भारत बंद के दौरान साफ हो जाएगी।
दिलजीत ने किसानों को दिए एक करोड़पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ द्वारा किसानों को एक करोड़ रुपए की मदद करने की खबर सामने आई है। पंजाबी सिंगर सिंगा ने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि किसानों को गर्म कपड़े मुहैया कराने के लिए दिलजीत ने एक करोड़ रुपए दिए हैं।
उधर, ओलंपिक मेडलिस्ट विजेंदर सिंह ने सिंघू बॉर्डर पहुंचकर किसान आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार काला कानून वापस नहीं लेती, तो मैं अपना राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार वापस कर दूंगा।