
देश में बढ़ता कोरोना बड़ा संकट बढ़ता जा रहा हैं। सामने आने वाले आंकड़े आए दिन नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। बीते 24 घंटों में देश में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 83,883 नए मामले सामने आए थे जिसके चलते अब संक्रमितों की संख्या 38 लाख को पार कर चुकी हैं। हांलाकि देश के रिकवरी रेट में सुधार आया हैं लेकिन मौत का आंकड़ा भी चिंताजनक हैं। ऐसे में कई मरीजों में लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं जो कि और भी चिंताजनक हैं क्योंकि एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीजों में वायरस की संख्या अधिक होती है। हैदराबाद में 200 कोरोना मरीजों पर हुए शोध अध्ययन में यह दावा किया गया है। मरीजों से वायरस का सैंपल लेकर उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग के आधार पर यह जानकारी सामने आई है। इस शोध में कई अन्य तथ्यों के बारे में भी पता चला है।
हैदराबाद के सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोटिक के शोधकर्ताओं ने कोरोना के एसिम्प्टोमैटिक मरीजों में वायरस की संख्या अधिक पाई है। भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इनसे संक्रमण फैला तो इम्यूनिटी कम होने की स्थिति में मौत की दर बढ़ सकती है। शोधकर्ताओं ने 200 मरीजों पर अध्ययन करने के बाद बताया कि बिना लक्षण वाले मरीजों में कोरोना का असर न दिख रहा हो, लेकिन उनसे कम इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण फैलने पर मौत भी हो सकती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, हैदराबाद में कोरोना के मरीजों से वायरस का सैंपल लेने के बाद उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि इनमें तेजी से म्यूटेशन हुआ है। शोधकर्ता मुरलीधरन के मुताबिक, 95 फीसदी संक्रमित आबादी में कोरोना के 20B क्लेड स्ट्रेन से संक्रमण फैला है।
मई से जुलाई के बीच कोरोना वायरस के 20B क्लेड स्ट्रेन का संक्रमण 100 फीसदी तक हुआ। हैदराबाद में यह वायरस दूसरे स्ट्रेन के जरिए फैला। 20B क्लेड स्ट्रेन वाले वायरस ने खुद को तैयार किया और मई से संक्रमण फैलाना शुरू किया। 20B स्ट्रेन वाले वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव देखा गया, जिसकी वजह से वर्तमान में संक्रमण की दर अधिक हो चुकी है।
इस शोध अध्ययन के लिए मई से जुलाई के बीच सैंपल लिए गए थे। इस दौरान एसिम्प्टोमैटिक कोरोना मरीजों की संख्या अधिक थी। जिनसे भी वायरस के सैंपल लिए गए उनकी उम्र 15 से 62 साल के बीच थी। इनमें 61 फीसदी पुरुष और 39 फीसदी महिलाएं थीं। शोधकर्ताओं ने इस वायरस से जुड़े ऐसे म्यूटेशन की पहचान की, जो देश में हुए दूसरे शोधों में पकड़ में नहीं आए हैं।














