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क्यों दिया जाता हैं छठ पूजा के दौरान सूर्य को अर्घ्य, यहां जानें इसके फायदे

By: Ankur Fri, 20 Nov 2020 08:45 AM

क्यों दिया जाता हैं छठ पूजा के दौरान सूर्य को अर्घ्य, यहां जानें इसके फायदे

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक चार दिन छठ महाव्रत रहता हैं। आज षष्ठी तिथि हैं जब छठी मैया की पूजा की जाती हैं और शाम लके समय सूर्य को अर्ध्य भी दिया जाता हैं। छठ पर्व पर सूर्य देव की पूजा का बड़ा महत्व माना जाता हैं जिसमें अर्घ्य देने से जीवन में संपन्नता का आगमन होता हैं। इसी के साथ ही इस दिन पूजा के दौरान अर्ध्य दिया जाए तो इसके कई फायदे होते हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में।

- छठ पर्व चार दिन का होता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी और सप्तमी। षष्ठी के दिन शाम को सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें शाम को सूर्य को अर्घ्‍य दिया जाता है जिसे संध्या अर्घ्य कहते हैं। इस समय सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसीलिए प्रत्यूषा को अर्घ्य देने का लाभ मिलता है। कहते हैं कि शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है।

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- षष्ठी के दूसरे दिन सप्तमी को उषाकाल में सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है जिसे पारण कहते हैं। अंतिम दिन सूर्य को वरुण वेला में अर्घ्य दिया जाता है। यह सूर्य की पत्नी उषा को दिया जाता है। इससे सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है।

- कहते हैं कि सुबह के सूर्य की आराधना से सेहत बनती है, रोग मिटते हैं, दोपहर की सूर्य आराधना से नाम और यश बढ़ता है और शाम के समय की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है।

- यह भी माना जाता है कि उषाकाल के सूर्य की उपासना करने से मुकदमें में फंसे हो तो निकल जाते हैं। आंखों की रोशनी में लाभ मिलता है, अटके काम सलट जाते हैं। पेट की समस्या समाप्त हो जाती है। परीक्षा में लाभ मिलता है।

- माना जाता है कि सुबह के समय सूर्य को जल चढ़ाते समय इन किरणों के प्रभाव से रंग संतुलित हो जाते हैं और साथ ही साथ शरीर में प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ती है।

- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है कहते हैं कि उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है और वे निराशावादी हो जाते हैं। प्रात:काल सूर्य देव के दर्शन से शरीर में स्फूर्ति आती है और यदि शरीर अच्छा महसूस करेगा तो मन भी सकारात्मक होकर निराशावाद को भगाकर आत्मविश्वास बढ़ाता है।

- माना जाता है कि जल की धारा में से उगते सूरज को देखना चाहिए इससे धातु और सूर्य कि किरणों का असर आपकी दृष्टि के साथ-साथ आपके मन पर भी पड़ेगा और आपको सकारात्मक उर्जा का आभास होता रहेगा।

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- धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्यदेव को आत्मा का कारक माना गया है। ऐसा भी माना जाता है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने से वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। और अपने भक्त के जीवन को अंधकार से निकालकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर लेकर जाते हैं।

- मान्यता अनुसार अर्घ्य देने से घर-परिवार में मान-सम्मान बढ़ता है।

- सूर्य को प्रतिदिन अर्घ्य देने से व्यक्ति कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होती है। छठ पर्व को विधिवत मनाने से मिट जाता है सभी तरह का सूर्य दोष।

- ज्योतिषविद्या के मुताबिक हर दिन सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति की कुंडली में यदि शनि की बुरी दृष्टि हो तो उसका प्रभाव भी कम होता है। इससे करियर में भी लाभ मिलता है।

- सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत है और प्रकाश को सनातन धर्म में सकारात्मक भावों का प्रतीक माना गया है। इस प्रकार में सभी तरह के रोग और शोक को मिटान के क्षमता है। प्रतिदिन प्रात:काल सूर्य के समक्ष कुछ देर खड़े रहने से सभी तरह के पौषक तत्व और विटामिन की पूर्ति होने की संभावन बढ़ जाती है।

- जिस तरह पौधों के लिए जल के अलावा सूर्य के प्रकाश की भी जरूरत होती है उसी तरह मनुष्य के जीवन के लिए भी सूर्य के प्रकाश या धूप की अत्यंत ही आवश्यकता होती है।

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