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पूर्ण लाभ पाने के लिए यहां जानें छठ व्रत कथा, पूजन और अनुष्ठान विधि

By: Ankur Thu, 19 Nov 2020 09:14 AM

पूर्ण लाभ पाने के लिए यहां जानें छठ व्रत कथा, पूजन और अनुष्ठान विधि

दिवाली के बाद से ही कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से छठ महाव्रत शुरू हो जाता हैं जो कि सप्तमी तिथि तक मनाया जाता हैं। इस दौरान भक्तगण मां के लिए व्रत रखते हैं और सूर्य को अर्ध्य देते हैं। यह व्रत मुख्य रूप से संतान सुख के लिए किया जाता हैं। छठ के दिन व्रत रखना अत्यंत शुभ और मंगलकारी होता हैं। इसी के साथ ही इसका पूर्ण लाभ पाने के लिए इसकी पूर्ण पूजन विधि के बारे में पता होना भी जरूरी हैं। इसलिए आज इस कड़ी में हम आपके लिए छठ व्रत कथा, पूजन और अनुष्ठान विधि की जानकारी लेकर आए हैं।

छठ व्रत कथा

दिवाली के 6 दिन बाद छठ मनाया जाता है। छठ के महाव्रत को करना अत्यंत पुण्यदायक है। छठ व्रत सबसे महत्त्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को होता है। सूर्योपासना का यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। छठ पर्व के लिए कई कथाएं प्रचलित हैं, किन्तु पौराणिक शास्त्रों में इसे देवी द्रोपदी से जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा था। द्रोपदी के व्रत के फल से पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया था। इसी तरह छठ का व्रत करने से लोगों के घरों में समृद्धि और सुख आता है। छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में छठ का महत्व है।

छठ पूजा या सूर्य षष्ठी या छठ व्रत में सूर्य भगवान की पूजा होती है और धरती पर लोगों के सुखी जीवन के लिए सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन शक्ति का देवता माना जाता है। इसलिए छठ पर्व पर समृद्धि के लिए पूजा की जाती है।

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छठ व्रत पूजा विधि

छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन हैं। जिनकी पूजा के लिए छठ मनाया जाता है। छठी मैया को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठी मैया का ध्यान करते हुए लोग मां गंगा-यमुना या किसी नदी के किनारे इस पूजा को मनाते हैं। इसमें सूर्य की पूजा अनिवार्य है साथ ही किसी नदी में स्नान करना भी।

इस पर्व में पहले दिन घर की साफ सफाई की जाती है। छठ पर्व पर गांवों में अधिक सफाई देखने को मिलती है। छठ के चार दिनों तक शुद्ध शाकाहारी भोजन किया जाता है, दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है, तीसरे दिन भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन भक्त उदियमान सूर्य को उषा अर्घ्य देते हैं।

छठ व्रत अनुष्ठान विधि

- छठ के दिन सूर्योदय में उठना चाहिए।
- व्यक्ति को अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान करना चाहिए।
- स्नान करने के बाद नदी के किनारे खड़े होकर सूर्योदय के समय सूर्य देवता को नमन करें और विधिवत पूजा करें।
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सूर्य को धुप और फूल अर्पण करें।
- छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण करें।
- सर झुका कर प्रार्थना करते हुए ॐ घृणिं सूर्याय नमः, ॐ घृणिं सूर्य: आदित्य:, ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा, या फिर ॐ सूर्याय नमः 108 बार बोलें।
- अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं।
- गरीब लोगों को कपड़े, भोजन, अनाज आदि का दान करना चाहिए।

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