अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद ईरान के साथ युद्ध को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। खुद ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा और इसकी वजह से उनकी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने माना कि युद्ध के दौरान पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने अमेरिकी मतदाताओं की नाराजगी बढ़ाई। हालांकि, चुनावी हार के बावजूद ट्रंप अपने फैसले का बचाव करते नजर आए। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर उन्हें फिर से यही फैसला लेने का मौका मिला तो वह दोबारा ईरान पर हमला करेंगे। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी चुनाव परिणामों को ट्रंप के लिए रणनीतिक और राजनीतिक हार बताया है। ईरान के सुरक्षा नेतृत्व ने दावा किया कि अमेरिका को युद्ध के मैदान के साथ-साथ अपने ही देश की राजनीति में भी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी चुनाव में सत्ता का समीकरण बदलने के बावजूद तेहरान के प्रति वॉशिंगटन की नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं जताई है।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप ने क्या स्वीकार किया?
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया गया कि क्या फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई उनकी रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार की एक प्रमुख वजह बनी? इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि उनकी बात काफी हद तक सही है। दरअसल, जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे ईरान युद्ध को प्रमुख कारण बताया था। उनका कहना था कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले कई मतदाता मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से नाराज थे। इसी नाराजगी के कारण उन्होंने इस बार रिपब्लिकन उम्मीदवारों से दूरी बना ली और डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया। ट्रंप ने भी माना कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इसका सीधा असर आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर पड़ा और मतदाताओं के बीच असंतोष बढ़ा। हालांकि, उन्होंने युद्ध को लेकर अपनी रणनीति में किसी गलती को स्वीकार नहीं किया।
'दोबारा मौका मिला तो फिर करूंगा हमला'
चुनावी हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार मानने के बावजूद ट्रंप अपने सैन्य फैसले पर कायम हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर उन्हें दोबारा ऐसा करने का अवसर मिलता है तो वह फिर वही कदम उठाएंगे। ट्रंप के मुताबिक, लंबे समय के लिहाज से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उनका तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है तो भविष्य में वहां मौजूद कई चीजें शायद सुरक्षित नहीं रह पाएंगी। एक अन्य सवाल के जवाब में भी ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर वह अपना फैसला नहीं बदलते। 4 नवंबर को चुनाव परिणामों के बाद ट्रंप की टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ कि वह चुनावी नुकसान और युद्ध के आर्थिक प्रभाव को स्वीकार करने के बावजूद सैन्य कार्रवाई को सही मानते हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कितना नुकसान हुआ?
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया। इस परिणाम को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव में मतदाताओं के बीच महंगाई, रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती लागत, ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। ईरान के साथ संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार और पेट्रोल की कीमतों पर पड़े असर ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को इन मुद्दों पर रिपब्लिकन सरकार के खिलाफ जनता की नाराजगी का फायदा मिला। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चुनाव परिणामों के बाद युद्ध को पार्टी की हार की वजह बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि मतदाताओं का एक वर्ग चाहता था कि ट्रंप प्रशासन युद्ध खत्म करने, महंगाई पर नियंत्रण करने और अमेरिकी नागरिकों की आर्थिक परेशानियों पर ध्यान दे। इस तरह चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया कि विदेश नीति से जुड़े सैन्य फैसलों का असर केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनका घरेलू अर्थव्यवस्था और राजनीतिक समर्थन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान ने ट्रंप को बताया रणनीतिक और राजनीतिक रूप से पराजित
अमेरिकी चुनाव परिणामों के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने बुधवार, 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान ने ट्रंप को रणनीतिक और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर पराजित किया है। रजाई ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरानी जनता ने युद्ध के मैदान और होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रंप को रणनीतिक शिकस्त दी, जबकि वॉशिंगटन में उन्हें राजनीतिक हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण को ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव बताया। रजाई के मुताबिक, युद्ध का आर्थिक बोझ अमेरिकी जनता को उठाना पड़ रहा है और आम नागरिकों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी ईरान से टकराएगा, उसे युद्ध के मैदान से लेकर अपने घर तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान ने संघर्ष के दौरान इस समुद्री मार्ग को अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में पेश किया है। रजाई का दावा है कि इस मोर्चे पर भी अमेरिका को दबाव का सामना करना पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के दौरान इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और आवाजाही को लेकर तनाव बना रहा। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव पड़ा। यही वजह है कि मोहसिन रजाई ने अपने बयान में होर्मुज का उल्लेख करते हुए इसे ईरान की रणनीतिक सफलता से जोड़ा। हालांकि, यह ईरानी अधिकारी का राजनीतिक और सैन्य आकलन है, न कि किसी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित चुनावी निष्कर्ष का हिस्सा।
मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को दी चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में राजनीतिक दलों के बीच सत्ता का समीकरण बदलने से ईरान के प्रति वॉशिंगटन की विदेश नीति में बदलाव आने की उम्मीद करना गलत होगा। अपने लिखित बयान में खामेनेई ने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि अमेरिकी राजनीतिक दलों या गुटों में बदलाव आने से उसकी दबदबे वाली व्यवस्था का व्यवहार बदल जाएगा, वे गलतफहमी में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को रियायतें देने से ईरान के प्रति उसकी दुश्मनी समाप्त हो जाएगी, ऐसी उम्मीद करना भी बड़ी भूल है। खामेनेई ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के खिलाफ दोबारा आक्रामक कार्रवाई की गई तो इस बार युद्ध का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान हुआ है और डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता का संदेश स्पष्ट है कि अमेरिका में सत्ता का राजनीतिक समीकरण बदलने से तेहरान के प्रति उसकी नीति अपने आप नहीं बदलेगी।













