भारत में जन्मीं नित्या रमन ने अमेरिका के लॉस एंजिल्स मेयर चुनाव में बड़ा उलटफेर करते हुए मौजूदा मेयर करेन बास को हरा दिया है। इस जीत के साथ वह शहर की अगली मेयर बनने जा रही हैं। बास ने गुरुवार, 5 नवंबर को अपनी हार स्वीकार करते हुए रमन को फोन कर जीत की बधाई दी। लॉस एंजिल्स में दो दशक से अधिक समय बाद किसी मौजूदा मेयर को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
लॉस एंजिल्स काउंटी के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, 5 नवंबर को जारी मतगणना में नित्या रमन को 52.70 प्रतिशत यानी 4,60,772 वोट मिले थे, जबकि करेन बास को 47.30 प्रतिशत यानी 4,13,519 वोट हासिल हुए। मतगणना की प्रक्रिया जारी रहने के बीच बास के हार स्वीकार करने से रमन की जीत का रास्ता साफ हो गया।
बेघर लोगों की समस्या और सार्वजनिक सेवाएं बने चुनाव के बड़े मुद्दे
नित्या रमन को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका का समर्थन हासिल था। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में शहर की सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने, बेघर लोगों की समस्या से निपटने और पुलिस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया था।
रमन ने आवास की उपलब्धता, आम लोगों के लिए किफायती घर, बच्चों के लिए पार्क और बेहतर सार्वजनिक परिवहन को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। उनका कहना था कि लॉस एंजिल्स गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है और शहर को मौजूदा हालात से बाहर निकालने के लिए नए तरीके अपनाने होंगे। बेघर लोगों की समस्या चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा रही।
पहले करेन बास का किया था समर्थन, फिर खुद चुनाव में उतरीं
नित्या रमन की उम्मीदवारी ने शुरुआत में ही चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया था। वह पहले करेन बास की राजनीतिक सहयोगी रही थीं और उन्होंने शुरुआत में बास का समर्थन भी किया था। लेकिन बाद में उन्होंने खुद मेयर पद का चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया।
रमन ने नामांकन की समय-सीमा समाप्त होने से कुछ समय पहले अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। उन्होंने शहर की स्थिति को लेकर कहा था कि लॉस एंजिल्स अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां बदलाव की जरूरत है। उनके इस फैसले ने चुनावी मुकाबले का समीकरण बदल दिया।
नित्या रमन ने खुद को एक स्वतंत्र सोच वाली प्रगतिशील नेता के तौर पर पेश किया। उन्होंने यह भी दिखाने की कोशिश की कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी पार्टी के रुख से अलग राय रखने को तैयार हैं। उनकी जीत को अमेरिका में स्थापित डेमोक्रेटिक नेताओं के सामने प्रगतिशील उम्मीदवारों की बढ़ती चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है।
करेन बास ने फोन कर स्वीकार की हार
चुनाव में हार के बाद करेन बास ने नित्या रमन को फोन करके बधाई दी। अपने बयान में उन्होंने कहा कि भले ही यह वह नतीजा नहीं है जिसकी उन्हें उम्मीद थी, लेकिन लॉस एंजिल्स की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुचारू बनाने का भरोसा भी दिया।
इस हार के साथ बास पिछले दो दशकों से अधिक समय में लॉस एंजिल्स की ऐसी पहली मेयर बन गई हैं, जिन्हें दोबारा चुनाव में जीत नहीं मिली। उनके पहले कार्यकाल पर जनवरी 2025 में लगी पैलिसेड्स आग का असर भी रहा। आग और उसके बाद शहर की प्रतिक्रिया को लेकर उनके प्रशासन की आलोचना हुई थी। इस घटना ने उनके चुनावी अभियान को भी प्रभावित किया।
नित्या रमन की जीत से अमेरिकी राजनीति में क्या संकेत मिला?
नित्या रमन की जीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका के कई शहरों में प्रगतिशील और डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट विचारधारा वाले उम्मीदवार स्थापित नेताओं को चुनौती दे रहे हैं। इससे पहले न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी ने मेयर चुनाव जीता था। रमन की जीत को भी इसी राजनीतिक बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, रमन ने अपनी पहचान एक स्वतंत्र नेता के तौर पर बनाए रखने पर जोर दिया है। उन्होंने ममदानी से तुलना के सवाल पर कहा था, "मैं अलग हूं। मैं खुद अपनी पहचान हूं।" लॉस एंजिल्स की अगली मेयर के तौर पर उनके सामने आवास, बेघर लोगों की समस्या, सार्वजनिक परिवहन और शहर की बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने जैसी चुनौतियां होंगी।













