मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में अजनार नदी को साफ करने के लिए आठ महीने तक मेहनत करने वाले युवा पर्यावरण कार्यकर्ता बिट्टू तबाही एक बार फिर नदी की सफाई में जुट गए हैं। उनकी मेहनत से साफ हुई नदी कुछ ही हफ्तों में दोबारा प्लास्टिक, पॉलीथिन, फूल-माला और दूसरे कचरे से भर गई। नदी की यह स्थिति देखकर बिट्टू ने सोशल मीडिया पर निराशा जाहिर की, लेकिन उन्होंने सफाई का काम छोड़ने के बजाय दोबारा शुरुआत करने का फैसला किया। बिट्टू तबाही का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि आठ महीने की मेहनत इस तरह बर्बाद हो जाएगी। वीडियो में नदी किनारे फैला कचरा दिखाई देता है। इसके बाद भी बिट्टू ने हार नहीं मानी और नदी को फिर से साफ करने के लिए जुट गए।
सफाई के कुछ ही हफ्तों बाद फिर कचरे से भर गई नदी
बिट्टू ने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था। नदी में प्लास्टिक, कचरे और पूजा सामग्री का ढेर लगा हुआ था। पानी से बदबू आती थी और जलीय जीवन लगभग खत्म हो चुका था। ऐसे हालात में उन्होंने अकेले ही नदी की सफाई शुरू की। खास बात यह थी कि उन्हें तैरना भी नहीं आता था, फिर भी उन्होंने नदी से कचरा निकालने का काम जारी रखा। कई महीनों की मेहनत के बाद 1 सितंबर 2026 को उन्होंने नदी की सफाई का काम पूरा किया। इस अभियान पर उन्होंने अपनी जेब से करीब 30,000 रुपये खर्च किए। शुरुआत में उनके पास जरूरी उपकरण भी नहीं थे और उन्हें सरकारी मदद भी नहीं मिली थी। इसके बावजूद लगातार मेहनत करके उन्होंने नदी से कचरा हटाया। उनके काम की चर्चा सोशल मीडिया पर हुई और कई लोगों ने उनकी सराहना की। लेकिन सफाई पूरी होने के करीब एक महीने बाद ही नदी की हालत फिर बिगड़ने लगी। नदी किनारे पॉलीथिन, फूल-माला और अन्य कचरा जमा हो गया। 12 अक्टूबर को बिट्टू ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर लोगों से नदी में कचरा नहीं फेंकने की अपील की। उन्होंने लिखा कि नदी को गंदा करना आसान है, लेकिन उसे साफ करने में बहुत मेहनत लगती है।
तैरना नहीं आता, फिर भी नदी साफ करने में जुटे बिट्टू
13 अक्टूबर को बिट्टू एक बार फिर अजनार नदी के किनारे पहुंचे। उन्होंने दस्ताने पहनकर किनारे पर फैला कचरा उठाया और पानी में उतरकर पॉलीथिन निकालने लगे। एक ही दिन में उन्होंने नदी से 10 बड़ी पॉलीथिन निकालीं। बिट्टू ने वीडियो में कहा कि उन्हें तैरना नहीं आता, लेकिन इसके बावजूद वे सफाई जारी रखेंगे और रोज थोड़ा-थोड़ा कचरा हटाकर नदी को फिर से साफ करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने अपने फॉलोअर्स से यह सुझाव भी मांगा कि नदी में जमा कचरे को बड़े पैमाने पर किस तरह हटाया जा सकता है। बिट्टू की चिंता केवल नदी की मौजूदा स्थिति तक सीमित नहीं है। उनकी आठ महीने की मेहनत के बाद कचरे का दोबारा जमा होना इस बात को सामने लाता है कि सफाई अभियान के बाद नदी को साफ बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया दुख, सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
बिट्टू के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने नदी को दोबारा गंदा देखकर दुख जताया और बिट्टू का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें हीरो बताया। एक अन्य यूजर ने लोगों की नागरिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाया। कई लोगों ने यह भी कहा कि नदी की सफाई केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को आगे आना होगा। बिट्टू की मेहनत के बाद नदी का फिर से गंदा हो जाना उनके सामने एक नई चुनौती लेकर आया है। यदि सफाई के बाद भी लोग नदी में पॉलीथिन, फूल-माला और अन्य कचरा डालते रहेंगे, तो नदी को साफ बनाए रखना मुश्किल होगा। बिट्टू ने लोगों से सीधे अपील की है कि वे नदी में कचरा न फेंकें और सफाई के प्रयासों को बेकार न होने दें।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं तारीफ
ब्यावरा के रहने वाले 21 वर्षीय बीएससी छात्र बिट्टू तबाही का सफाई अभियान पहले भी चर्चा में रहा है। अजनार नदी की सफाई के लिए उनके अकेले प्रयास और अपनी जेब से पैसे खर्च करने की पहल की कई नामचीन हस्तियों ने सराहना की थी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उद्योगपति आनंद महिंद्रा और नीदरलैंड की संस्था द ओशन क्लीनअप के सीईओ बोयान स्लाट ने भी उनके काम की तारीफ की थी। बोयान स्लाट ने उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी दिया था। बिट्टू इससे पहले यमुना नदी और अन्य जगहों पर भी सफाई अभियान चला चुके हैं। अजनार नदी को स्थानीय लोगों की जीवनरेखा माना जाता था, लेकिन इसके दोबारा प्रदूषित होने से बिट्टू की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल वे फिर से सफाई में जुटे हैं और लोगों से सहयोग तथा कचरा प्रबंधन को लेकर सुझाव मांग रहे हैं। अजनार नदी की मौजूदा स्थिति उनके अभियान के सामने खड़ी उस चुनौती को दिखाती है, जिसमें नदी को एक बार साफ करना ही पर्याप्त नहीं है। उसे दोबारा प्रदूषित होने से बचाने के लिए लोगों की भागीदारी और जिम्मेदार व्यवहार भी जरूरी है।













