ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर डबल डेकर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत की सूचना के बाद बस के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई बस के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के 19 चालान पहले से लंबित थे। इन चालानों की कुल रकम करीब 1.75 लाख रुपये बताई जा रही है। इसके बावजूद बस यात्रियों को लेकर लगातार एक्सप्रेसवे पर चल रही थी।
जांच में बस के परमिट और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बस के खिलाफ बिना वैध परमिट संचालन को लेकर भी कार्रवाई की गई थी। 19 अगस्त को दिल्ली के मयूर विहार इलाके में बस का 18,500 रुपये का चालान किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें बस की छत पर अवैध तरीके से सामान ले जाने से जुड़ा उल्लंघन भी दर्ज था। इसी अवधि में बिना परमिट बस चलाने के मामले में 15 हजार रुपये का चालान किए जाने की भी जानकारी है।
पहले भी कई बार हुआ था चालान
बस के पुराने रिकॉर्ड में अलग-अलग तारीखों पर कई चालान दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। 7 अप्रैल को 6,900 रुपये का चालान किया गया था। इसमें चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने और निर्धारित यूनिफॉर्म नहीं पहनने से संबंधित उल्लंघन दर्ज था।
इसके अलावा 21 जुलाई को 10 हजार रुपये, 15 जून को 4 हजार रुपये, 14 मई को 10,500 रुपये, 6 मई को 500 रुपये, 1 मार्च को 5 हजार रुपये, 21 फरवरी को 500 रुपये और 19 जनवरी को 12 हजार रुपये के चालान किए जाने की जानकारी है। इन कार्रवाई के बावजूद बस का संचालन जारी रहा।
यही वजह है कि अब जांच के दायरे में सिर्फ बस में आग लगने की वजह ही नहीं, बल्कि उसके संचालन से जुड़े दस्तावेज और सुरक्षा मानक भी शामिल हैं। यह देखा जा रहा है कि बस का परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी मानक क्या थे और पूर्व में दर्ज उल्लंघनों के बावजूद उसे यात्रियों को लेकर चलने की अनुमति किस तरह मिलती रही।
AC सिस्टम में खराबी के बाद आग लगने की शुरुआती जानकारी
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, बस में आग एयर कंडीशनिंग सिस्टम में ब्लास्ट के बाद लगी। जानकारी के अनुसार, सिस्टम में खराबी आने के बाद आग इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल तक पहुंची और इसके बाद आग तेजी से फैल गई।
डबल डेकर स्लीपर बस होने के कारण कई यात्री उस समय ऊपरी बर्थ पर सो रहे थे। अचानक आग लगने और तेजी से फैलने के कारण यात्रियों को संभलने तथा बस से बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कुछ ही समय में आग ने बस के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।
खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकले यात्री
आग लगने के बाद बस के अंदर अफरा-तफरी मच गई। आग और धुएं के बीच फंसे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़े और किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब हुए।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा। रेस्क्यू टीम ने बस के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कई घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
अब किन पहलुओं की जांच हो रही है?
भीषण अग्निकांड के बाद जांच एजेंसियां बस के संचालन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इनमें बस का परमिट, फिटनेस, चालक की योग्यता, पहले से दर्ज चालान, सुरक्षा मानकों का पालन और आग लगने की वास्तविक वजह शामिल है।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यदि बस के खिलाफ पहले से यातायात नियमों के उल्लंघन के कई मामले दर्ज थे और करीब 1.75 लाख रुपये के चालान लंबित थे, तो इसके बावजूद उसका यात्री सेवा में संचालन कैसे जारी रहा। इसी के साथ यह भी जांच का विषय है कि बस में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
फिलहाल शुरुआती जांच में AC सिस्टम में खराबी के बाद आग फैलने की बात सामने आई है, लेकिन आग लगने के वास्तविक कारण और बस के संचालन से जुड़े नियमों के पालन की स्थिति की विस्तृत जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।













