
उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा जांच के लिए 1 से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाने का निर्देश जारी किया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में साफ किया कि इस अभियान के दौरान बच्चों की सुरक्षा से समझौता बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अनफिट पाए जाने वाले किसी भी स्कूली वाहन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी, ताकि स्कूल जाते बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल के माध्यम से विवरण दर्ज करना अनिवार्य
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी स्कूल अपने वाहनों का विवरण परिवहन विभाग द्वारा विकसित इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल पर दर्ज कराएं। यह डिजिटल प्रणाली स्कूल वाहनों की निगरानी को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी। रीयल-टाइम ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम की मदद से वाहन और चालक दोनों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। बैठक में परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि पोर्टल को वाहन और सारथी डेटाबेस से जोड़ा गया है, जिससे वाहनों और चालकों का स्वतः सत्यापन संभव होगा।
दस्तावेजों की निगरानी और अभिभावकों की भूमिका
इस पोर्टल के जरिए वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेजों की निगरानी की जाएगी। अभिभावक भी इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल वाहनों की स्थिति देख सकेंगे। मुख्य सचिव ने “लखपति दीदी” कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि डिजिटल आजीविका रजिस्टर में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की त्रैमासिक आय का 100% और त्रुटिरहित डेटा दर्ज किया जाए।
विभागीय समन्वय और गो-आश्रय स्थलों पर विशेष ध्यान
मुख्य सचिव ने विभिन्न समितियों की नियमित बैठकों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। गो-आश्रय स्थलों के लिए 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर भंडारण प्रणाली को मजबूत किया जाए और खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों को शामिल न किया जाए।
इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने, गोबर-गोमूत्र के उपयोग और बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का तुरंत सर्वे कराया जाएगा और किसानों को समयबद्ध क्षतिपूर्ति दी जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में संयुक्त समिति बनाकर पारदर्शी ढंग से नुकसान का आकलन किया जाए और राहत राशि का वितरण बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए।














