उत्तर प्रदेश में कंपोजिट विद्यालयों के विस्तार के साथ सरकारी स्कूलों में आधुनिक शैक्षिक सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। यू-डायस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में प्रदेश में ऐसे सिर्फ 225 विद्यालय थे, जिनकी संख्या वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,605 हो गई। यानी इस अवधि में कंपोजिट विद्यालयों की संख्या 24,380 बढ़ी है।
इन विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा 8 तक एक ही परिसर में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा को एकीकृत करते हुए उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को एक ही परिसर में आगे की कक्षाओं की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलने के साथ स्कूलों में आधुनिक शिक्षण संसाधनों का विस्तार भी किया जा रहा है।
स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब पर जोर
कंपोजिट विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। डिजिटल पुस्तकालय और खेलकूद से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इन संसाधनों के जरिए विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कंपोजिट विद्यालयों के विकास के पीछे विद्यार्थियों को एक ही परिसर में निरंतर शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षिक संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य बताया गया है।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में सरकारी विद्यालयों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, कंपोजिट विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ विद्यार्थियों के शैक्षिक और समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
150 मॉडल कंपोजिट विद्यालय किए जा रहे विकसित
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के मुताबिक, प्रदेश में स्कूली शिक्षा को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से 150 मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों को करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इनमें बालवाटिका से कक्षा 12 तक एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
इन मॉडल विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं के साथ डिजिटल पुस्तकालय, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, वाई-फाई, मिनी स्टेडियम और बड़े खेल मैदान जैसी सुविधाएं होंगी। शिक्षकों के लिए आवास और सीसीटीवी की व्यवस्था भी इन विद्यालयों में शामिल है।
मोनिका रानी ने कहा कि इन विद्यालयों को विद्यार्थियों के शैक्षिक, तकनीकी, शारीरिक और समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस तरह कंपोजिट विद्यालयों के विस्तार के साथ सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को एकीकृत करने और आधुनिक संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।














