कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। दिल्ली में हुई पार्टी की रैली के बाद अब नेतृत्व का ध्यान उत्तर प्रदेश पर है। इसी सिलसिले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार, 3 नवंबर को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर तैयारी और समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ संभावित गठबंधन के मुद्दों पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस भी इस बार चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने और गठबंधन की रणनीति स्पष्ट करने में जुटी है।
प्रियंका गांधी के आवास पर हुई तीन घंटे की बैठक
मंगलवार को दिल्ली में प्रियंका गांधी के आवास पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक हुई। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और आगामी चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक के प्रमुख मुद्दों में प्रदेश कार्यकारिणी का गठन, बूथ स्तर पर पार्टी की मौजूदगी मजबूत करना और चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय बनाना शामिल रहा। पार्टी की कोशिश है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले प्रदेश में संगठनात्मक तैयारियों को व्यवस्थित किया जाए, ताकि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा सकें।
सपा के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग पर भी चर्चा
बैठक में समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर भी बातचीत हुई। कांग्रेस और सपा पहले भी उत्तर प्रदेश में साथ चुनाव लड़ चुकी हैं। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति बनाना चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर बातचीत पहले से चल रही है। अक्टूबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने सपा के साथ बातचीत के लिए करीब 170 विधानसभा सीटों की सूची साझा की थी। पार्टी ने इन सीटों को अपनी चुनावी संभावनाओं और संगठन की स्थिति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा था। हालांकि, अंतिम सीट बंटवारे पर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति जरूरी होगी। कांग्रेस की रणनीति उन सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत करने की है, जहां पार्टी को जीत की संभावना दिखाई देती है। वहीं, सपा के साथ गठबंधन की स्थिति में दोनों दलों को सीटों के चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सहमति बनानी होगी।
संगठन मजबूत करने पर कांग्रेस का जोर
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्यभर में अपना संगठन मजबूत करने की है। बैठक में बूथ स्तर तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने और प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर चर्चा इसी दिशा में अहम मानी जा रही है। पार्टी चुनाव से पहले अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने के लिए संगठनात्मक जिम्मेदारियों और अभियान की रूपरेखा पर भी विचार किया गया।
अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव लड़ने से किया इनकार
कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वह आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और लोकसभा सदस्य रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की उम्मीद रखते हैं।अखिलेश यादव ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, ''हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं। इसलिए वही करेंगे जो हमारे लिए शुभ है।'' उन्होंने याद दिलाया कि 2012 में भी वह लोकसभा सांसद रहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनका कहना था कि इस बार भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पहुंचेंगे।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सपा और कांग्रेस दोनों ही 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले से यह साफ होता है कि वह फिलहाल विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरने की योजना नहीं जता रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी टिप्पणी राजनीतिक बयान है; चुनाव के बाद की स्थिति मतदाताओं के जनादेश और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगी।













