दशहरे पर रावण दहन के पारंपरिक आयोजन के बीच इस बार कॉकरोच का पुतला भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। दिल्ली के बाद अब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी रावण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला जलाया जाएगा। नुमाइश मैदान में होने वाले इस आयोजन को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध के अनूठे और व्यंग्यात्मक तरीके के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल ने विजयादशमी के आयोजन में एक अलग तरह के राजनीतिक संदेश को भी चर्चा में ला दिया है।
मुजफ्फरनगर में इस बार दशानन रावण के पुतलों के साथ कॉकरोच का विशाल पुतला भी तैयार किया गया है। वहीं, दिल्ली के रामलीला मैदान में भी दशहरे पर इसी तरह का आयोजन प्रस्तावित है। वहां रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के अलावा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का पुतला भी जलाया जाएगा। इस तरह पारंपरिक रावण दहन के साथ प्रतीकात्मक विरोध को जोड़ने की तैयारी की गई है।
दिल्ली में भी तैयारियां पूरी, सफाई अभियान से जोड़ा गया आयोजन
दिल्ली में श्री केशव रामलीला कमेटी ने कॉकरोच के पुतले के दहन की तैयारी कर ली है। समिति का कहना है कि कॉकरोच गंदगी का प्रतीक है और इस पहल का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। आयोजकों ने इस कदम को ‘स्वच्छ भारत’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ जैसे सफाई अभियानों से जोड़ते हुए कहा है कि इसके जरिए साफ-सफाई के महत्व का संदेश लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
दिल्ली में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ कॉकरोच के पुतले को शामिल करने का फैसला इस आयोजन को पारंपरिक दशहरा कार्यक्रम से अलग पहचान दे रहा है। जहां अन्य पुतलों का दहन दशहरे की परंपरा का हिस्सा है, वहीं कॉकरोच का पुतला एक अतिरिक्त प्रतीक के तौर पर सामने आया है। समिति ने इसके पीछे स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य बताया है।
मुजफ्फरनगर में 60, 55 और 50 फुट के रावण के पुतले तैयार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के नुमाइश मैदान में दशहरे के आयोजन के लिए अलग-अलग आकार के रावण के पुतले बनाए गए हैं। यहां 60 फुट, 55 फुट और 50 फुट ऊंचे रावण के पुतले तैयार किए गए हैं। इनके साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी बनाया गया है, जिसे रावण दहन के दौरान जलाया जाएगा। इन पुतलों को तैयार करने के लिए ऋषिकेश से कारीगर आए हैं। रावण के पुतले का दहन जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं कॉकरोच के पुतले को विरोध और व्यंग्य के एक अलग माध्यम के रूप में पेश किया जा रहा है। आयोजकों ने इस पुतले को शामिल करके दशहरे के पारंपरिक कार्यक्रम के साथ एक अतिरिक्त संदेश देने की तैयारी की है।
श्रीराम सेवा दल ने बताया विरोध का उद्देश्य
मुजफ्फरनगर में कॉकरोच का पुतला बनाए जाने के पीछे आयोजकों ने राजनीतिक विरोध का संदेश बताया है। श्रीराम सेवा दल के कोऑर्डिनेटर विशाल डूमडा ने कहा कि उनके मुताबिक, एक राजनीतिक दल कॉकरोच के नाम से देशभर में गंदगी फैलाने और अराजकता का माहौल पैदा करने में लगा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति से निजात मिलनी चाहिए। इसी विचार के तहत कॉकरोच का पुतला तैयार कराया गया है।
विशाल डूमडा के बयान से स्पष्ट होता है कि मुजफ्फरनगर में कॉकरोच के पुतले का दहन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है। आयोजकों ने इसे एक राजनीतिक विरोध के प्रतीक के रूप में भी रखा है। पुतले के जरिए व्यंग्यात्मक ढंग से अपना संदेश सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी समस्याओं के प्रतीकात्मक पुतले जलाए जा चुके हैं
श्रीराम सेवा दल के कोऑर्डिनेटर विशाल डूमडा ने यह भी बताया कि विजयादशमी के मौके पर इससे पहले कोविड महामारी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याओं के प्रतीकात्मक पुतलों का दहन किया जा चुका है। इस बार कॉकरोच के पुतले को शामिल करके विरोध को एक नया प्रतीक दिया गया है। हालांकि, आयोजक मंडल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का सीधे तौर पर नाम लेने से परहेज कर रहा है। इसके बावजूद कॉकरोच के पुतले को लेकर दिए गए बयान और आयोजन की रूपरेखा ने इसे विरोध के एक प्रतीकात्मक तरीके के रूप में चर्चा में ला दिया है। दिल्ली और मुजफ्फरनगर, दोनों जगह दशहरे पर रावण दहन के साथ कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की तैयारी की गई है, लेकिन दिल्ली की समिति ने इसे स्वच्छता जागरूकता से जोड़ा है, जबकि मुजफ्फरनगर के आयोजक ने इसके पीछे राजनीतिक विरोध का संदेश बताया है।














