उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की परेशानी का कारण बन गया है। बक्शी तालाब इलाके में स्थित करीब 300 साल पुराने चंद्रिका देवी मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बाढ़ के पानी से घिर गया है। हालात को देखते हुए मंदिर में दर्शन बंद कर दिए गए हैं। नवरात्र में मां के दर्शन करने की उम्मीद लेकर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को रास्ते से ही वापस लौटना पड़ रहा है। मंदिर के आसपास पानी भरने के साथ रास्ते में तेज बहाव होने के कारण लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। मंदिर से लगभग 200 मीटर पहले पुलिस ने बैरियर लगा दिया है। वहां बोर्ड के जरिए श्रद्धालुओं को बताया जा रहा है कि बाढ़ की वजह से मंदिर में दर्शन नहीं हो सकेंगे। नवरात्र के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने के बीच यह स्थिति बनी है। मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, करीब 20 साल बाद गोमती नदी का पानी मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते में इस तरह आया है।
नवरात्र में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु, रास्ते से लौटने को मजबूर
लखनऊ से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष मान्यता रखता है। नवरात्र के दौरान यहां दूर-दूर से लोग मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर के रास्ते पर भीड़ है, लेकिन बाढ़ के कारण भक्तों को दर्शन किए बिना लौटना पड़ रहा है। मंदिर तक जाने वाले रास्ते में पानी का तेज बहाव और आसपास जलभराव होने से फिलहाल दर्शन करना संभव नहीं हो पा रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि एक रास्ते पर बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ है। हालांकि, इससे मंदिर में दर्शन फिर से शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। श्रद्धालुओं के नहीं पहुंच पाने का असर मंदिर के आसपास दुकान लगाने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। नवरात्र के दौरान आने वाले भक्तों पर निर्भर दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंदिर में दर्शन बंद होने और लोगों को वापस लौटने की स्थिति से उनकी कमाई प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है और इसका समापन 20 अक्टूबर को होगा। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे समय में चंद्रिका देवी मंदिर का बंद होना उन श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बना है, जो नवरात्र में यहां दर्शन करने पहुंचे थे।
फैजुल्लागंज में घरों में भरा पानी, कुछ लोग छतों पर रहने को मजबूर
गोमती नदी में बढ़े जलस्तर का असर लखनऊ के दूसरे इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। फैजुल्लागंज में सोमवार को भी पानी भरा हुआ था और कई घर जलमग्न थे। इलाके के अनेक लोग अपने घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं, जबकि कुछ लोग पानी भरने के कारण छतों पर रहने को मजबूर हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाके में करीब 90 नाव चलाई जा रही हैं। इन नावों के जरिए जलभराव वाले क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और राहत संबंधी काम किए जा रहे हैं। घरों में पानी भरे रहने के कारण प्रभावित लोगों को सामान्य जनजीवन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गोमती नदी पीलीभीत से निकलती है। सितंबर के आखिर में हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया था। लखनऊ में गोमती का पानी करीब आठ फीट तक ऊपर चढ़ गया था। बढ़ते जलस्तर का असर शहर के पॉश इलाके में स्थित प्लासियो मॉल तक भी पहुंच गया था। हालांकि, अब प्लासियो मॉल के आसपास पानी नहीं है, लेकिन गोमती रिवर फ्रंट में अभी भी पानी भरा हुआ है और वह बंद है। इस तरह नदी के बढ़े जलस्तर का असर शहर के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रहा है।
2008 के बाद 2026 में फिर बढ़ा गोमती का पानी
लखनऊ में गोमती नदी के जलस्तर में आई इस बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन ने बताया है कि साल 2008 के बाद 2026 में नदी का पानी इस स्तर तक बढ़ा है। सितंबर के अंत में हुई भारी बारिश के बाद पैदा हुई स्थिति के बीच नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन के अनुसार, राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटे में गोमती नदी का जलस्तर करीब चार सेंटीमीटर कम हुआ है। हालांकि, जलस्तर में इस गिरावट के बावजूद चंद्रिका देवी मंदिर तक जाने वाले रास्ते में पानी और शहर के कुछ इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। फिलहाल मंदिर में दर्शन बंद हैं, फैजुल्लागंज में कई घर पानी से प्रभावित हैं और गोमती रिवर फ्रंट भी बंद है। नदी का जलस्तर कम होने से राहत की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मंदिर में दर्शन दोबारा कब शुरू होंगे, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।














