उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रैफिक जाम के बीच एंबुलेंस में एक घायल सिपाही की मौत का मामला सामने आया है। फतेहपुर में सड़क हादसे के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए 22 वर्षीय सिपाही प्रांशु सचान को कानपुर के एलएलआर यानी हैलट अस्पताल ले जाया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि टाटमिल चौराहे पर एंबुलेंस करीब एक घंटे तक जाम में फंसी रही और अस्पताल पहुंचने में लगभग दो घंटे लग गए। इस दौरान पिता प्रमोद सचान बेटे को बचाने के लिए लोगों और पुलिसकर्मियों से रास्ता देने की गुहार लगाते रहे।हालांकि, ट्रैफिक पुलिस ने परिवार के आरोपों को गलत बताया है। डीसीपी ट्रैफिक अभयनाथ त्रिपाठी के मुताबिक, एंबुलेंस फतेहपुर से दोपहर 2:40 बजे रवाना हुई थी और डॉक्टरों ने शाम 4 बजे सिपाही की मौत की सूचना स्वरूपनगर थाने को दी। पुलिस का कहना है कि इस दूरी को तय करने में लगा समय सामान्य तौर पर लगने वाले समय के अनुरूप है। मामले की जांच एसीपी ट्रैफिक को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
डंपर की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए थे प्रांशु
घाटमपुर थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव निवासी किसान प्रमोद सचान के 22 वर्षीय बेटे प्रांशु सचान वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती अंबेडकरनगर जिले की डांडा कोतवाली में थी। मंगलवार को प्रांशु विभागीय काम के सिलसिले में सम्मन तामील कराने के लिए निकले थे। उन्हें कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर और रायबरेली समेत कई जिलों में जाना था। रास्ते में उन्होंने रसूलाबाद और बिधनू में सम्मन तामील कराया। इसके बाद वह फतेहपुर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पिता प्रमोद सचान से हो गई। दोनों बाइक से फतेहपुर की ओर रवाना हुए। बुधवार को फतेहपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में बक्सर मोड़ के पास पीछे से आए एक डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि पिता-पुत्र सड़क पर गिर पड़े। हादसे में प्रांशु डंपर के पहिये की चपेट में आ गए और उनके पेट के ऊपर से पहिया गुजर गया। पिता को भी चोटें आईं, लेकिन उनकी हालत गंभीर नहीं थी। ग्रामीणों की सूचना पर यूपी-112 और कल्याणपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्रांशु की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें कानपुर के एलएलआर अस्पताल रेफर कर दिया।
टाटमिल चौराहे पर जाम में फंसने का आरोप
प्रांशु के पिता प्रमोद सचान का आरोप है कि बेटे को लेकर आ रही एंबुलेंस कानपुर के टाटमिल चौराहे पर भीषण जाम में फंस गई थी। उनके मुताबिक, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछने पर पता चला कि भाजपा की पदयात्रा के कारण यातायात प्रभावित है। इसके बाद उन्होंने एंबुलेंस को रास्ता दिलाने के लिए लोगों से बार-बार गुहार लगाई। पिता का कहना है कि बेटे के शरीर से लगातार खून बह रहा था। वह कभी अपने हाथों से रक्तस्राव रोकने की कोशिश करते तो कभी गमछे की मदद से घाव पर दबाव बनाते। प्रांशु की हालत बिगड़ती देख वह एंबुलेंस से उतरकर सड़क पर मौजूद लोगों के सामने हाथ जोड़ते रहे, ताकि किसी तरह रास्ता मिल सके। परिजनों ने आरोप लगाया कि भाजपा की पदयात्रा और उसमें जुटने वाली भीड़ की जानकारी होने के बावजूद गंभीर रूप से घायल मरीज को ले जा रही एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर नहीं बनाया गया। उनका दावा है कि टाटमिल पर जाम के कारण इलाज मिलने में देरी हुई और करीब सात किलोमीटर का रास्ता तय करने में भी काफी समय लग गया।
पिता ने पुलिस विभाग को ठहराया जिम्मेदार
अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद प्रमोद सचान बदहवास हो गए। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने पर उन्होंने बेटे को समय पर इलाज नहीं मिल पाने के लिए पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वह एंबुलेंस में बेटे के साथ थे और उसे बचाने के लिए लगातार रास्ता खुलवाने की कोशिश करते रहे, लेकिन जाम के कारण उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी। पिता ने आरोप लगाया कि अगर एंबुलेंस को समय पर रास्ता मिल जाता तो बेटे को अस्पताल पहुंचाने में देरी नहीं होती। हालांकि, यह परिवार का आरोप है। सिपाही की मौत का कारण केवल ट्रैफिक जाम था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ट्रैफिक पुलिस ने आरोपों को बताया गलत
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर डीसीपी ट्रैफिक अभयनाथ त्रिपाठी ने अलग जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस फतेहपुर से दोपहर 2:40 बजे चली थी। हैलट अस्पताल के डॉक्टर ने शाम 4 बजे स्वरूपनगर थाने को सिपाही की मौत की सूचना दी। इस तरह एंबुलेंस के रवाना होने और मौत की सूचना मिलने के बीच एक घंटा 20 मिनट का अंतर था। डीसीपी के मुताबिक, घटनास्थल से हैलट अस्पताल की दूरी करीब 50 से 55 किलोमीटर है। सामान्य परिस्थितियों में इस दूरी को तय करने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। इसी आधार पर ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि एंबुलेंस अस्पताल सही समय पर पहुंची थी और जाम के कारण इलाज में देरी होने का आरोप सही नहीं है। इस मामले में पुलिस की ओर से जांच कराए जाने की जानकारी भी दी गई है। अपर पुलिस उपायुक्त यातायात पूनम सिरोही के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रकरण की जांच एसीपी ट्रैफिक को सौंपी गई है। जांच में एंबुलेंस के सफर, रास्ते की स्थिति और ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की पड़ताल अहम होगी।














