राजस्थान में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चलाए जा रहे एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। प्रदेश ने महज एक महीने में देशभर की रैंकिंग में बड़ा सुधार करते हुए 17वें स्थान से चौथा स्थान हासिल कर लिया है। 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच राजस्थान में 2 लाख 15 हजार 704 बेटियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। इसके साथ ही 17 अक्टूबर तक प्रदेश में कुल टीकाकरण का आंकड़ा बढ़कर 5 लाख 20 हजार 87 पहुंच गया।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राजस्थान में अगस्त तक करीब 2.75 लाख बेटियों का टीकाकरण हुआ था। उस समय प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 17वें स्थान पर था। इसके बाद टीकाकरण अभियान को गति देने के लिए विभाग ने जागरूकता बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने और वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में मौजूद भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया। इन प्रयासों के बाद टीकाकरण के आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई और राजस्थान देश के शीर्ष चार राज्यों में शामिल हो गया।
एक महीने में 2.15 लाख से ज्यादा बेटियों को लगा टीका
एचपीवी टीकाकरण अभियान में सितंबर के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। 16 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच ही 2,15,704 नई बेटियों को वैक्सीन लगाई गई। इस एक महीने की प्रगति के साथ प्रदेश में कुल टीकाकरण की संख्या 5,20,087 हो गई। राजस्थान में इस अभियान के तहत कुल 7.24 लाख बेटियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया जा चुका है। विभाग की कोशिश है कि अभियान की मौजूदा गति बरकरार रखी जाए, ताकि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के साथ ज्यादा से ज्यादा पात्र बेटियों तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाई जा सके।
तीन विभागों के समन्वय से अभियान को मिली गति
राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की भी अहम भूमिका रही है। तीनों विभागों ने आपसी समन्वय के जरिए अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में काम किया। इन प्रयासों के तहत बेटियों और उनके अभिभावकों तक टीकाकरण से जुड़ी जानकारी पहुंचाने, वैक्सीन के प्रति विश्वास बढ़ाने और सर्वाइकल कैंसर से बचाव के महत्व को समझाने पर विशेष जोर दिया गया। विभागीय स्तर पर किए गए समन्वित प्रयासों का उद्देश्य लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक करना और अभियान में उनकी भागीदारी बढ़ाना रहा। इन कोशिशों के बाद टीकाकरण के आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया।
सोशल मीडिया के जरिए दूर हो रहीं वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां
एचपीवी टीकाकरण अभियान में तेजी आने के पीछे सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ी जागरूकता को भी एक अहम वजह माना जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों और गायनी डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर सर्वाइकल कैंसर के खतरे, एचपीवी संक्रमण और इससे बचाव में वैक्सीन की भूमिका से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारियां साझा कीं। इन जानकारियों से लोगों को टीकाकरण के महत्व को समझने और वैक्सीन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिली।
निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा के अनुसार, टीकाकरण अभियान की रफ्तार बढ़ाने में जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि गायनी डॉक्टरों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के खतरे और एचपीवी वैक्सीन से बचाव के बारे में जानकारी दी। इससे लोगों के बीच टीके को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।
वैक्सीन लगवा चुकी बेटियां दूसरी बेटियों को कर रहीं प्रेरित
राजस्थान में एचपीवी टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने में उन बेटियों के अनुभव भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, जो पहले ही वैक्सीन लगवा चुकी हैं। उनके सकारात्मक अनुभव दूसरी बेटियों और उनके अभिभावकों को टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे वैक्सीन के प्रति विश्वास बढ़ाने और अधिक पात्र बेटियों को अभियान से जोड़ने में मदद मिल रही है। डॉ. रवि प्रकाश शर्मा के मुताबिक, अब बेटियां खुद आगे आकर एचपीवी का टीका लगवाने में रुचि दिखा रही हैं। उनकी बढ़ती भागीदारी अभियान को गति देने में सहायक हो रही है। राजस्थान में एक महीने के भीतर टीकाकरण के आंकड़ों में हुई बढ़ोतरी और राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार को जागरूकता, विभागीय समन्वय तथा लोगों के बढ़ते भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है।














