राजस्थान में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जयपुर में रविवार को 100 कालिका पेट्रोलिंग यूनिट का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन यूनिट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनकी तैनाती का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस की मदद मुहैया कराना है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में तैनात पुलिसकर्मियों को भी थानों में तैनात कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) की तरह यात्रा भत्ता देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2023 की तुलना में 2026 में महिला उत्पीड़न के मामलों में करीब 48 प्रतिशत की कमी आई है। कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, जयपुर सांसद मंजू शर्मा, जयपुर महापौर सुनील कोठारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और प्रमुख सचिव गृह भास्कर ए. सावंत सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपराधियों पर सख्ती जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह महिलाओं के सम्मान, स्वतंत्रता और समान अवसरों से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी डर के शिक्षा प्राप्त कर सकें, नौकरी कर सकें और सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकें। उन्होंने जोर दिया कि इस तरह का माहौल बनाने के लिए असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना जरूरी है। साथ ही महिलाओं के मन में सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम करना भी पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कालिका पेट्रोलिंग यूनिट में तैनात महिला पुलिसकर्मियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी भूमिका केवल गश्त लगाने तक सीमित नहीं है। स्कूल, कॉलेज या बाजार जाने के दौरान यदि किसी बेटी को परेशानी होती है अथवा कोई महिला खुद को असुरक्षित महसूस करती है, तो ऐसी स्थिति में पुलिस का संवेदनशील व्यवहार उसके लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है।
47 हजार असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कालिका यूनिट के कामकाज की सराहना करते हुए बताया कि प्रदेशभर में करीब 47 हजार असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उन्हें जागरूक बनाने के लिए भी अलग-अलग स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 50 लाख महिलाओं को कानूनी जानकारी देकर जागरूक किया गया है। इसके अलावा करीब 18 लाख महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, जबकि 16.70 लाख महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं से छेड़छाड़ और उनसे जुड़े अन्य अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस का सक्रिय रहना आवश्यक है। सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने और महिलाओं तथा बेटियों को सुरक्षित वातावरण देने के उद्देश्य से राजस्थान में 65 एंटी रोमियो एस्कॉर्ट तैनात हैं।
महिला हेल्पलाइन 1090 से तीन साल में 28 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण
महिलाओं की सहायता के लिए संचालित व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला हेल्पलाइन 1090 के माध्यम से पिछले तीन वर्षों में 28 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में करीब 22 हजार सुरक्षा सखियां तैयार की गई हैं, जो महिला सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से 12,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। इन कैमरों के जरिए सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी रखने की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महिला अत्याचार से जुड़े मामलों में अनुसंधान का औसत समय घटकर 48 दिन रह गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और शिकायतकर्ता को समय पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
महिला पुलिसकर्मियों को निजता और गरिमा का ध्यान रखने की सलाह
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की महिला सिपाहियों से बातचीत के दौरान कार्यस्थलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित तथा प्रभावी निगरानी करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर पीड़ित महिला की बात ध्यानपूर्वक और संवेदनशीलता के साथ सुनी जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि शिकायत से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित महिला की निजता और गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाए। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे पीड़ित महिला खुद को सुरक्षित महसूस कर सके और अपनी बात बिना किसी संकोच के रख सके।
मुख्यमंत्री ने कालिका पेट्रोलिंग टीमों को अपने कामकाज की नियमित समीक्षा करने और सकारात्मक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां वे दिन हो या रात, बिना किसी भय के घर से बाहर निकल सकें।
सामुदायिक पुलिसिंग से जुड़ेंगे 2.60 लाख से अधिक सदस्य
महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने में सामुदायिक पुलिसिंग की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत 2 लाख 60 हजार से अधिक सदस्यों को जोड़ा गया है। इनमें करीब 84 हजार युवा और 29 हजार ग्राम रक्षक भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि पुलिस थानों में हर दो महीने में एक बार बैठक आयोजित की जाए। इन बैठकों में सामुदायिक पुलिसिंग से जुड़े सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हो सके। उन्होंने जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को अपराधों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जा सकता है और अपराधियों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है। सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
नवरात्रि में महिला सुरक्षा का संकल्प
कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने नवरात्रि के अवसर पर कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की शुरुआत को महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये यूनिट पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। बेढम ने महिला सीएलजी सदस्यों के गठन को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। गृह राज्य मंत्री के मुताबिक, कालिका पेट्रोलिंग यूनिट की सक्रियता से महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। इसका उद्देश्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां महिलाएं और बेटियां बिना किसी भय के घर से बाहर निकल सकें और अपने दैनिक कार्य कर सकें।














