महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सहयोगी दलों के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर अप्रत्यक्ष तौर पर निशाना साधते हुए उनके पुराने राजनीतिक कदम की याद दिलाई। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (यूबीटी) की ओर से शरद पवार द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में एनसीपी (एसपी) की बैठक आयोजित किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए और उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर टिप्पणी की गई।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट थी और इसे किसी राजनीतिक संदेश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सुले ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मेरे पिता शरद पवार और एकनाथ शिंदे के बीच केवल संक्षिप्त मुलाकात हुई थी। शिंदे राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं और संवैधानिक पद पर बैठे नेताओं से मुलाकात करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। मैंने संजय राउत से भी बात की है और यह पूरा मामला केवल गलतफहमी का परिणाम था।"
उद्धव ठाकरे की पुरानी मुलाकात का दिलाया हवाला
सुप्रिया सुले ने इस विवाद के बीच उद्धव ठाकरे और अजीत पवार की उस मुलाकात का भी जिक्र किया, जो एनसीपी में विभाजन के कुछ ही दिनों बाद हुई थी। उन्होंने कहा कि जब अजीत पवार पार्टी छोड़कर एनडीए में शामिल हुए थे, तब विभाजन के महज 17 दिन बाद उद्धव ठाकरे ने उनसे मुलाकात की थी। उस समय एनसीपी (एसपी) ने उस बैठक को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया था।
उन्होंने कहा, "हमने उस मुलाकात को केवल उपमुख्यमंत्री के साथ एक संवैधानिक बैठक माना था। हमें पूरा विश्वास था कि उद्धव जी ने महाराष्ट्र से जुड़े विषयों पर चर्चा करने के लिए अजीत दादा से मुलाकात की होगी। इसलिए हमने कभी उस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। लोकतंत्र में संवाद बनाए रखना जरूरी होता है और विभिन्न संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के बीच बातचीत होना स्वाभाविक है।"
संजय राउत ने बदले तेवर, किया डैमेज कंट्रोल
एक दिन पहले शरद पवार की साख को लेकर तीखी टिप्पणी करने वाले शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अगले ही दिन अपने रुख में नरमी दिखाई। उन्होंने अपने बयान को संतुलित करने की कोशिश करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। राउत ने कहा, "कल हम नाराज थे, लेकिन आज ऐसा नहीं है। पवार साहब हमारे वरिष्ठ नेता हैं और महा विकास अघाड़ी के मार्गदर्शक भी हैं। हमने सिर्फ अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं।"
हालांकि, अपने बयान में नरमी लाने के बावजूद उन्होंने यह भी दोहराया कि महा विकास अघाड़ी के सभी सहयोगी दलों को उन नेताओं और राजनीतिक समूहों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, जिन्होंने राजनीतिक दलों में विभाजन कराया है। उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि गठबंधन के भीतर मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
पार्टी में टूट की अटकलों पर भी दिया जवाब
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा किए गए उस दावे को भी सुप्रिया सुले ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनसीपी (एसपी) के पांच से छह लोकसभा सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। सुले ने इन अटकलों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी सांसद के दूसरी पार्टी में जाने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने दोहराया कि एनसीपी (एसपी) के सभी सांसद और नेता पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। पार्टी में किसी तरह की टूट या असंतोष की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और इस तरह की चर्चाएं केवल राजनीतिक अटकलें हैं।













