महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल देखने को मिली है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को अपनी पार्टी के विधायकों के साथ बैठक की, लेकिन इस बैठक की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी जगह को लेकर हुई। दरअसल, यह मुलाकात किसी विपक्षी दल के दफ्तर में नहीं, बल्कि राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक कार्यालय में आयोजित की गई। महाविकास अघाड़ी (MVA) के प्रमुख नेताओं में शामिल शरद पवार का सत्तारूढ़ महायुति सरकार के अहम नेता के कार्यालय में पहुंचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया। बैठक की तस्वीरें सामने आते ही अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि बाद में दोनों पक्षों ने इस मुलाकात को महज औपचारिक और परिस्थितिजन्य बताया।
जानकारी के अनुसार शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद के समाधान के लिए गठित राज्य सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में हिस्सा लेने विधान भवन पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों से भी मुलाकात की।
शिंदे के कार्यालय में बैठक क्यों हुई?
सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि विपक्ष के वरिष्ठ नेता ने अपने विधायकों के साथ बैठक के लिए सत्ता पक्ष के उपमुख्यमंत्री का कार्यालय ही क्यों चुना। इस पर एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने विस्तार से सफाई देते हुए कहा कि इस फैसले के पीछे केवल व्यावहारिक कारण थे और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
जयंत पाटिल ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद पार्टी के विधायक शरद पवार से मिलना चाहते थे। लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें विधान भवन के भीतर लंबी दूरी तय करना उचित नहीं था। विपक्षी दलों का कमरा अपेक्षाकृत दूर था, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कार्यालय निकास द्वार के बिल्कुल नजदीक स्थित है। ऐसे में शरद पवार को अनावश्यक रूप से पैदल चलने से बचाने के लिए वहीं बैठक करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब शरद पवार वहां पहुंचे, तब एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। जयंत पाटिल के मुताबिक, उन्होंने स्वयं पवार को वहीं बैठकर विधायकों से मुलाकात करने का सुझाव दिया था। बाद में जब एकनाथ शिंदे को वरिष्ठ नेता की मौजूदगी की जानकारी मिली तो वे भी कार्यालय पहुंचे और करीब दस मिनट तक शिष्टाचार मुलाकात की।
शिंदे खेमे ने भी दी सफाई
बैठक को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह केवल सम्मान और शिष्टाचार के तहत हुई मुलाकात थी, जिसका किसी राजनीतिक बदलाव या गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।
बताया गया कि समिति की बैठक समाप्त होने के बाद जब शरद पवार उपमुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे तो एकनाथ शिंदे ने उनका शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री उदय सामंत ने भी कहा कि शरद पवार देश के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल हैं और यदि वे किसी कार्यालय में आते हैं तो उनका सम्मान करना महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात में किसी प्रकार का राजनीतिक संदेश तलाशना उचित नहीं होगा।
NDA में शामिल होने की चर्चाओं पर लगाया विराम
शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं। कुछ लोगों ने इसे महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच संभावित नए राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। वहीं कुछ चर्चाओं में यह भी दावा किया गया कि शरद पवार की पार्टी भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकती है।
हालांकि एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन सभी अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शरद पवार विधानसभा सत्र के दौरान अपने विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से मिलने पहुंचे थे। यह एक सामान्य संगठनात्मक बैठक थी और इसका किसी राजनीतिक गठबंधन, पार्टी विलय या एनडीए में शामिल होने से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इस तरह की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है।













