मुंबई के भायखला में मुहर्रम जुलूस के दौरान कथित सामूहिक विषाक्तता (मास पॉइजनिंग) की साजिश से जुड़े मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। गिरफ्तार आरोपी फैयाज प्रेमजी से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उसने इस कथित साजिश को अंजाम देने के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से ऑनलाइन माध्यम से 40 किलोग्राम से अधिक जिंक फॉस्फाइड और बड़ी संख्या में खाली कैप्सूल मंगवाए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर इन कैप्सूलों में जहरीला पदार्थ भरने की तैयारी भी शुरू कर दी थी। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी की कथित नाराजगी समुदाय के भीतर हुए चुनाव और पुरानी रंजिश से जुड़ी थी। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसकी कथित योजना और तैयारियों से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
चुनावी हार और पुरानी रंजिश को बताया जा रहा वजह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फैयाज प्रेमजी अपने ही समुदाय के कुछ लोगों और नेतृत्व को लेकर लंबे समय से नाराज था। जांच में पता चला है कि उसने पहले ख्वाजा शिया समुदाय (जमात) के चुनाव में हिस्सा लिया था, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था।
बताया जा रहा है कि चुनाव में मिली इस हार के बाद समुदाय के कुछ पदाधिकारियों और नेताओं के साथ उसके संबंध लगातार बिगड़ते गए। पुलिस का मानना है कि इसी नाराजगी और पुरानी रंजिश ने आरोपी के मन में बदले की भावना पैदा की। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इसी वजह से उसने मुहर्रम के अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाने की कथित योजना बनाई।
इंदौर से ऑनलाइन मंगाया गया था जहरीला रसायन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कथित योजना को अमल में लाने के लिए पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी। अधिकारियों के मुताबिक, उसने ऑनलाइन माध्यम से मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक सप्लायर से 40 किलोग्राम से अधिक जिंक फॉस्फाइड मंगवाया था। यह वही रसायन है, जिसका उपयोग सामान्य तौर पर चूहे मारने की दवा के रूप में किया जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में यह बेहद खतरनाक माना जाता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि बरामद सामग्री की मात्रा को देखते हुए यह मामला गंभीर है और इसी आधार पर आगे की जांच जारी है।
खाली कैप्सूल खरीदकर गेस्ट हाउस में भर रहा था जहरीला पदार्थ
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने केवल रसायन खरीदने तक ही अपनी तैयारी सीमित नहीं रखी थी, बल्कि उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए भी कथित तौर पर अलग योजना बनाई थी। जांच में सामने आया है कि उसने इंदौर के ही एक अन्य सप्लायर से बड़ी संख्या में खाली कैप्सूल भी खरीदे थे।
आरोप है कि मुंबई के एक गेस्ट हाउस में ठहरकर वह इन खाली कैप्सूलों में जिंक फॉस्फाइड पाउडर भरने का काम कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी तैयारी पर आरोपी ने करीब 45 हजार रुपये खर्च किए। इनमें लगभग 15 हजार रुपये रसायन खरीदने और करीब 30 हजार रुपये खाली कैप्सूल मंगाने पर खर्च किए गए थे।
सप्लाई चेन और लेनदेन की जांच में जुटी पुलिस
मामले के खुलासे के बाद मुंबई पुलिस अब आरोपी की पूरी सप्लाई चेन, ऑनलाइन लेनदेन और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियां ऑनलाइन भुगतान, कूरियर डिलीवरी और संबंधित दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि शुरुआती जांच में पुलिस को यह संकेत मिले हैं कि जिन सप्लायर्स से जिंक फॉस्फाइड और खाली कैप्सूल खरीदे गए थे, उन्हें आरोपी के कथित आपराधिक इरादों की कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस के अनुसार, यह खरीदारी सामान्य व्यावसायिक लेनदेन के रूप में की गई थी, जिसके कारण किसी को संदेह नहीं हुआ। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की विस्तार से जांच कर रही हैं और सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने का प्रयास जारी है।













