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BRICS के लिए भारत आ सकते हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, गलवान संघर्ष के बाद होगी पहली यात्रा

यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार होती है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इसे भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रहे सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Fri, 31 Jul 2026 1:48:30

BRICS के लिए भारत आ सकते हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, गलवान संघर्ष के बाद होगी पहली यात्रा

नई दिल्ली। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार होती है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इसे भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रहे सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

लगभग छह वर्ष बाद भारत दौरे की संभावना

सूत्रों के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। इसी सम्मेलन में भाग लेने के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है। इससे पहले वह वर्ष 2019 में भारत आए थे। इसके कुछ ही महीनों बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ा और जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद द्विपक्षीय संबंध कई दशकों के सबसे कठिन दौर में पहुंच गए।

कूटनीतिक गतिविधियां होंगी तेज

संभावित यात्रा से पहले भारत और चीन के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्क बढ़ने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के भी चीन दौरे की संभावना जताई जा रही है, जहां दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की बैठक भी जल्द आयोजित होने की संभावना है।

इसके बाद सीमा विवाद पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता भी प्रस्तावित है। इस बैठक को विशेष महत्व इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में दोनों देशों ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर आगे की बातचीत के लिए नए विशेषज्ञ समूह और कार्य समूह गठित करने पर सहमति बनाई थी।

सीमा विवाद के समाधान की दिशा में प्रयास

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बना हुआ है। दोनों देश लगातार सैन्य और राजनयिक स्तर पर वार्ताओं के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रस्तावित बैठकों का उद्देश्य सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाना, तकनीकी और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाना तथा भविष्य में किसी नए तनाव को रोकने के लिए विश्वास बहाली के उपायों को आगे बढ़ाना है।

ब्रिक्स सम्मेलन से आगे भी रहेगा महत्व

यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह यात्रा केवल ब्रिक्स सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगी। माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। इस बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संबंधों और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

वैश्विक परिस्थितियों के बीच बढ़ा महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और चीन के बीच संवाद का महत्व और बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी शुल्क नीतियों तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दोनों एशियाई शक्तियां अपने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर बनाए रखने की दिशा में प्रयासरत हैं।

फिलहाल शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर नई दिल्ली और बीजिंग की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह यात्रा होती है तो इसे भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पड़ाव के रूप में देखा जाएगा।

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