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'अगर डील करनी होती तो 26 दिन अनशन क्यों करता?' सीक्रेट डील के आरोपों पर सोनम वांगचुक का करारा जवाब

26 दिन का आमरण अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने वीडियो जारी कर सीक्रेट डील के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर समझौता करना होता तो 26 दिन भूखे नहीं रहते और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की वजह भी बताई।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Sat, 25 Jul 2026 8:35:02

'अगर डील करनी होती तो 26 दिन अनशन क्यों करता?' सीक्रेट डील के आरोपों पर सोनम वांगचुक का करारा जवाब

नई दिल्ली: 26 दिनों तक चले आमरण अनशन को समाप्त करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक नया वीडियो संदेश जारी कर अपने फैसले पर उठ रहे सवालों का विस्तार से जवाब दिया है। उन्होंने उन लोगों पर नाराजगी जताई, जो उनके अनशन समाप्त करने के पीछे किसी कथित "सीक्रेट डील" की आशंका जता रहे हैं। वांगचुक ने साफ कहा कि यदि उन्हें किसी तरह का समझौता ही करना होता, तो वे 26 दिनों तक अपनी जान जोखिम में डालकर भूखे नहीं रहते।

गौरतलब है कि गुरुवार रात केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन समाप्त किया था। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आखिर क्यों उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पहले छात्रों की सुरक्षा और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने को प्राथमिकता दी।

सोशल मीडिया पर उठे सवालों पर जताई नाराजगी

अनशन समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक के फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई पोस्ट में यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरकार के साथ कोई पर्दे के पीछे समझौता किया है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने शुक्रवार देर रात वीडियो जारी किया और अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि इतने लंबे और कठिन संघर्ष के बाद भी यदि लोगों को उनकी नीयत पर संदेह है, तो यह बेहद दुखद है। वांगचुक ने सवाल किया कि क्या अब उन्हें अपने संघर्ष की सच्चाई साबित करने के लिए किसी से "कैरेक्टर सर्टिफिकेट" भी लेना पड़ेगा?

'क्या हर फैसले का हिसाब देना होगा?'

वीडियो में सोनम वांगचुक ने भावुक अंदाज में कहा कि यह संदेश वह दुख, हैरानी और गुस्से की मिली-जुली भावना के साथ रिकॉर्ड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और देश के युवाओं के लिए 26 दिनों तक बिना भोजन के बैठे रहने के दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया। उनकी मांसपेशियां कमजोर हो गईं और लगातार भूखे रहने की वजह से शरीर के कई अंगों तथा दिमाग पर स्थायी नुकसान का खतरा पैदा हो गया था।

उन्होंने कहा कि लद्दाख की ठंडी जलवायु से निकलकर दिल्ली की भीषण गर्मी में सड़क किनारे बैठकर इतना लंबा अनशन करने के बाद भी यदि लोगों को यह पूछना पड़े कि उन्होंने अनशन किसके हाथों समाप्त किया, क्यों किया और इसके पीछे क्या कारण था, तो यह बेहद निराशाजनक है।

वांगचुक ने कहा, "क्या मुझे अब यह भी बताना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था? किसके हाथों अनशन तोड़ा, क्यों तोड़ा और किससे नहीं तुड़वाया? क्या हर बात का जवाब मुझे ही देना होगा?"

सीक्रेट डील के आरोपों पर दिया सीधा जवाब


सोनम वांगचुक ने उन आरोपों को भी पूरी तरह खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने सरकार के साथ कोई गुप्त समझौता किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनका उद्देश्य केवल कोई सौदा करना होता, तो उसके लिए अपनी सेहत और जीवन को दांव पर लगाने की कोई जरूरत नहीं थी।

उन्होंने कहा कि देश में कई तरह के राजनीतिक समझौते बंद कमरों में हो जाते हैं, लेकिन उन्होंने खुलेआम सड़क पर बैठकर 26 दिनों तक संघर्ष किया। ऐसे में उन पर "सीक्रेट डील" का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है।

वीडियो में उन्होंने कहा, "अगर मुझे कोई डील ही करनी होती, तो क्या मैं 26 दिन तक भूखा रहता? क्या समझौते इसी तरह किए जाते हैं? क्या मैं किसी एयर कंडीशन कमरे में बैठकर बात नहीं कर सकता था? मुझे दिल्ली की गर्मी में सड़क किनारे बैठकर अपनी जान जोखिम में डालने की क्या जरूरत थी?"

आलोचकों पर जताई नाराजगी

वीडियो के आखिर में सोनम वांगचुक ने उन लोगों पर भी नाराजगी जाहिर की, जो बिना किसी तथ्य के उनके आंदोलन और नीयत पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप न केवल उनके संघर्ष का अपमान हैं, बल्कि उन हजारों छात्रों और युवाओं के प्रयासों को भी कमतर आंकते हैं, जिन्होंने इस आंदोलन का समर्थन किया।

उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने बड़े त्याग और संघर्ष के बाद भी कुछ लोग केवल आरोप लगाने में लगे हैं। वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण छात्रों की सुरक्षा और उनके हित थे, और उसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना निर्णय लिया।

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