केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को सलाह दी कि वह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन करने के बजाय छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाए। आठवले का कहना है कि CJP की स्थापना नीट परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर हुई थी और पार्टी की ओर से तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की गई थी। उनके मुताबिक, उस समय पार्टी की मांगें पूरी हो चुकी थीं, इसलिए अब मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। रामदास आठवले ने विपक्ष के प्रस्तावित प्रदर्शन पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन करना बेबुनियाद है और इससे जानबूझकर अराजकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनावी नतीजों और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर इस तरह के आरोप लगाने से पहले विपक्ष को भी अपने राजनीतिक प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए।
रामदास आठवले ने CJP को क्यों दी छात्रों के मुद्दे उठाने की सलाह?
रामदास आठवले ने रविवार को CJP को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी को अपनी स्थापना के मूल मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, नीट परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर CJP अस्तित्व में आई थी और इसी मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया था। आठवले ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया था और पार्टी की मांगें पूरी हो गई थीं। केंद्रीय मंत्री ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि अब CJP को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मामले में आंदोलन करने की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने पार्टी को सलाह दी कि वह छात्रों की शिक्षा, परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया और शिक्षा नीति जैसे विषयों पर आंदोलन करे। आठवले के मुताबिक, छात्रों को किस तरह की शिक्षा मिलनी चाहिए, परीक्षाएं किस व्यवस्था के तहत आयोजित की जानी चाहिए और परीक्षा प्रणाली में किन मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है, ये ऐसे विषय हैं जिन पर CJP को अपनी मांगें रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन करने के बजाय छात्रों के हितों से जुड़े सवालों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए मतदाता सूची के आंकड़ों का किया जिक्र
रामदास आठवले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बारे में आंकड़े भी बताए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने जिन 13 करोड़ वोटों को हटाया है, उनमें अलग-अलग कारणों से हटाए गए नाम शामिल हैं। आठवले के मुताबिक, इनमें करीब 6 करोड़ ऐसे लोग हैं, जो नौकरी या कारोबार के सिलसिले में एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 1 करोड़ लोगों के नाम दो जगहों पर दर्ज थे, इसलिए ऐसे मामलों में एक नाम हटाया गया। इसके अलावा उन्होंने करीब 3 करोड़ लोगों के लापता होने की बात भी कही। केंद्रीय मंत्री ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके बयान में बताए गए आंकड़ों के समर्थन में कोई अलग दस्तावेज या विस्तृत आधिकारिक विवरण शामिल नहीं है। इसलिए इन संख्याओं को रामदास आठवले के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर आठवले ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी को लेकर उठाए जा रहे मुद्दे पर भी रामदास आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि यदि चुनाव में वोट चोरी हुई है, तो क्या कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी इसी तरह का तर्क दिया जा सकता है। आठवले ने अपने बयान में कांग्रेस की सीटों की संख्या 42 से बढ़कर 99 होने का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि उनकी पार्टी के वोट चोरी हो गए। उन्होंने यह भी पूछा कि जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, तब क्या उसने वोट चोरी की थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार को लोगों के वोट मिलने के कारण सत्ता मिली है। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन को बेबुनियाद बताया। आठवले ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर अराजकता को निमंत्रण दे रहा है और अपने प्रदर्शनों के जरिए लोगों को परेशानी में डाल रहा है। ये आरोप केंद्रीय मंत्री ने अपने राजनीतिक बयान में लगाए हैं।
अभिजीत दीपके को लेकर भी पहले बयान दे चुके हैं आठवले
रामदास आठवले इससे पहले भी CJP के नेताओं को लेकर बयान दे चुके हैं। 3 अक्टूबर को उन्होंने अभिजीत दीपके के बयानों पर आपत्ति जताई थी। आठवले ने आरोप लगाया था कि दीपके ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में गलत बयान दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बारे में भी आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां कीं। उस समय आठवले ने दीपके को इस तरह के बयान बंद करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं होने पर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। यह बयान CJP नेताओं के साथ आठवले के पहले के विवाद से जुड़ा हुआ है।
दिल्ली में कांग्रेस और CJP के प्रदर्शन की तैयारी
राजधानी दिल्ली में सोमवार को बड़े स्तर पर राजनीतिक प्रदर्शन होने की संभावना जताई गई है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है और इसके लिए देशभर से पार्टी कार्यकर्ताओं को दिल्ली बुलाया गया है। इस मार्च के पीछे SIR के मुद्दे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवाल हैं। दूसरी ओर, CJP भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए सोमवार सुबह 10 बजे पुलिस स्टेशन जाने वाली है। पार्टी ने कहा है कि यदि उसे 24 घंटे के भीतर प्रदर्शन के लिए समय नहीं दिया जाता है, तो वह स्वयं आंदोलन की जगह और समय का ऐलान कर देगी। ऐसे में दिल्ली में कांग्रेस और CJP की प्रस्तावित गतिविधियों के बीच रामदास आठवले का बयान राजनीतिक बहस का एक और हिस्सा बन गया है। केंद्रीय मंत्री ने जहां CJP को छात्रों के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी है, वहीं राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को भी चुनौती दी है।














