कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की मुख्य चुनाव आयुक्त तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया है। याचिका में रजिस्ट्री की ओर से बताई गई तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद इसे रिट पिटीशन नंबर दिया गया है। फिलहाल अदालत के सिस्टम में सुनवाई की संभावित तारीख 26 अक्टूबर दिखाई दे रही है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील जल्द सुनवाई के लिए प्रयास करते हैं तो मामला इससे पहले भी सूचीबद्ध हो सकता है। इस मामले में विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी, सहमति या मंजूरी के बिना एकतरफा फैसले लिए। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने और सुनवाई पूरी होने तक देशभर में SIR पर रोक लगाने की मांग भी की है।
26 अक्टूबर को सुनवाई की संभावित तारीख
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से तकनीकी कमियों की जानकारी दिए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने उन्हें ठीक कराया। मंगलवार, 13 अक्टूबर को ये कमियां दूर किए जाने के बाद याचिका को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया। अब अदालत के सिस्टम में 26 अक्टूबर को संभावित सुनवाई की तारीख दिखाई दे रही है। दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का कामकाज दोबारा शुरू होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, अदालत 16 अक्टूबर तक खुली है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के वकील यदि जल्द सुनवाई के लिए प्रयास करते हैं, तो इस सप्ताह भी मामले पर सुनवाई संभव हो सकती है। फिलहाल 26 अक्टूबर संभावित तारीख है, इसे अदालत की ओर से अंतिम रूप से तय सुनवाई की तारीख नहीं माना जाना चाहिए।
विपक्षी याचिका में अब 13 याचिकाकर्ता
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, याचिका में दो और नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें टी. थिरुमावलवन और सज्जात अहमद किचलू शामिल हैं। इनके जुड़ने के बाद याचिकाकर्ताओं की कुल संख्या 13 हो गई है। इससे पहले राहुल गांधी के साथ 10 विपक्षी नेता इस याचिका में शामिल थे। टी. थिरुमावलवन विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) के संस्थापक हैं, जबकि सज्जात अहमद किचलू नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हैं। दोनों के नाम शामिल होने से याचिका में विपक्षी नेताओं की संख्या बढ़ गई है।
रजिस्ट्री ने बताई थीं 14 तकनीकी कमियां
विपक्षी नेताओं की याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसमें 14 तरह की तकनीकी कमियां बताई थीं। इन कमियों में कुछ जगह प्रतिवादियों के नामों में गड़बड़ी, निजी पक्षकारों को प्रतिवादी बनाने के संबंध में जरूरी स्पष्टीकरण का अभाव और पुराने फैसले की प्रति संलग्न नहीं होना शामिल था। इसके अलावा राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को छोड़कर बाकी नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से वकालतनामा जमा नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी। खड़गे के पहचान पत्र की प्रति स्पष्ट नहीं थी और 220 रुपये की कोर्ट फीस भी कम जमा होने का उल्लेख किया गया था। दस्तावेजों की छपाई से जुड़ी कमियां भी रजिस्ट्री की आपत्तियों में शामिल थीं। अदालत की प्रक्रिया के तहत ऐसी तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए न्यायाधीशों के सामने रखा जा सकता है। इन आपत्तियों को ठीक किए जाने के बाद अब याचिका औपचारिक रूप से दर्ज हो चुकी है।
SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी नेताओं की याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी, सहमति या मंजूरी के बिना एकतरफा फैसले लिए। यह याचिकाकर्ताओं का आरोप है, जिस पर अदालत में सुनवाई होनी बाकी है। याचिकाकर्ताओं ने देशभर में SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित फाइलें, नोटिंग और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका यह भी अनुरोध है कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक देशभर में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। याचिका में इन मांगों के अलावा अन्य राहत दिए जाने की मांग भी की गई है।
असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
इसी बीच, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर अदालत ने उनके वकील से यह सूची देने को कहा है कि SIR से संबंधित कौन-कौन सी याचिकाएं पहले से लंबित हैं।
इस तरह SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं सामने आई हैं। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका औपचारिक रूप से दर्ज हो चुकी है, जबकि ओवैसी की याचिका के संदर्भ में अदालत ने संबंधित लंबित मामलों की जानकारी मांगी है। अब विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई की तारीख और अदालत में उठाए जाने वाले मुद्दों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।













