दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की रैली में जुटी भीड़ को लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। निर्दलीय राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को दावा किया कि रैली में करीब पांच से छह लाख लोग पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान तक पहुंचने में उन्हें एक से डेढ़ घंटे का समय लगा, क्योंकि रास्ते और आसपास के इलाके लोगों से भरे हुए थे। भीड़ इतनी अधिक थी कि पुलिस ने बैरिकेड खोलने से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई और उन्हें कुछ देर रुकना पड़ा। सिब्बल ने रैली में मौजूद लोगों की संख्या का अपना अनुमान साझा करते हुए कहा कि मैदान के अलावा आसपास के पार्क, कनॉट प्लेस और दूसरे रास्तों पर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वहीं, रैली में शामिल विपक्षी नेताओं ने इसे सफल बताते हुए अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कहा है। दूसरी तरफ, बीजेपी नेताओं ने भीड़ के दावों पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में रैली में वास्तव में कितने लोग शामिल हुए, इसको लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
कपिल सिब्बल ने बताया कैसे पहुंच पाए रामलीला मैदान
कपिल सिब्बल ने सोमवार को रैली के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि रविवार को दिल्ली में जनसैलाब देखने को मिला। उनके मुताबिक, रामलीला मैदान पहुंचने में ही करीब एक से डेढ़ घंटे लग गए। जब वे आयोजन स्थल के पास पहुंचे तो वहां बैरिकेडिंग की गई थी और आगे बढ़ने का रास्ता भीड़ के कारण बाधित हो रहा था। सिब्बल ने बताया कि पुलिस ने उन्हें समझाया कि बैरिकेड खोलते ही बड़ी संख्या में लोग उस तरफ बढ़ सकते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इस वजह से उन्हें करीब 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने पुलिस से कहा कि उन्हें किसी भी स्थिति में अंदर पहुंचना है, क्योंकि उनके पहुंचने के बिना रैली की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी।
सिब्बल का अनुमान- रैली में पांच से छह लाख लोग थे
राज्यसभा सांसद ने भीड़ की संख्या को लेकर अपना अनुमान भी बताया। उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से रैली में पांच से छह लाख लोग मौजूद थे। सिब्बल के मुताबिक, केवल रामलीला मैदान ही नहीं, बल्कि आसपास के पार्कों में भी लोग भरे हुए थे। कनॉट प्लेस और आसपास की सड़कों पर भी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही थी। हालांकि, पांच से छह लाख की संख्या कपिल सिब्बल का व्यक्तिगत अनुमान है। इसे किसी आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से सत्यापित भीड़ गणना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रैली से पहले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने आयोजन स्थल की क्षमता और सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए करीब 50 हजार लोगों के आने का अनुमान जताया था। बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा घेरे और आवाजाही के रास्तों के कारण मैदान में एक समय पर लगभग 30 से 40 हजार लोगों के समा पाने की बात कही गई थी।
बीजेपी पर भी साधा निशाना, रोहतक की रैली का किया जिक्र
कपिल सिब्बल ने रैली की भीड़ का उल्लेख करने के साथ बीजेपी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि बीजेपी को विपक्ष की इस रैली से चिंता हो रही है। सिब्बल ने दावा किया कि उन्होंने सुना है कि बीजेपी के नेता लोकतंत्र बचाने के नाम पर रैलियां कर रहे हैं। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रोहतक पहुंचने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 100-200 लोगों के साथ पहुंचने के बजाय पार्टी को ऐसी रैली करनी चाहिए, जिसका संदेश हो कि उसे बचाया जाए। सिब्बल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि बीजेपी को लोकतंत्र बचाने के बजाय खुद को बचाने के लिए रैली करनी चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुई थी रैली
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित की थी। विपक्षी दलों के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। रैली का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां थीं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। गठबंधन के नेताओं ने इसे मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। वहीं, निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना और अपात्र, मृत या दोहराए गए नामों को हटाना है। आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उनके पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने का विकल्प मौजूद है।
रैली में कई बड़े विपक्षी नेता हुए शामिल
इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हुए। इनके अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा सहित कई विपक्षी नेता मंच पर मौजूद रहे। रैली में अलग-अलग विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। आयोजन से पहले गठबंधन की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई गई थी। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस ने 4,000 से अधिक जवानों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियों को तैनात किया था। मैदान और आसपास के इलाकों को सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया था तथा निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों और अन्य व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने बाद में रैली के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने और किसी बड़ी कानून-व्यवस्था संबंधी घटना की सूचना नहीं दी।
भीड़ की संख्या को लेकर बीजेपी और विपक्ष के अलग-अलग दावे
रैली के बाद भीड़ की संख्या को लेकर बीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी देखने को मिली। विपक्षी नेताओं ने इसे बड़ी भागीदारी वाला आयोजन बताया, जबकि बीजेपी नेताओं ने मैदान में खाली जगह और खाली कुर्सियों का हवाला देकर विपक्ष के दावों पर सवाल उठाए। बीजेपी नेताओं ने कहा कि रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने का दावा वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। पार्टी की ओर से मैदान की तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए खाली कुर्सियों की बात भी कही गई। दूसरी तरफ, कांग्रेस नेताओं ने मैदान के बाहर और दिल्ली के दूसरे इलाकों में मौजूद लोगों को भी भीड़ के आंकड़े में शामिल करने की बात कही। फिलहाल, रैली में शामिल लोगों की कुल संख्या का कोई स्वतंत्र रूप से पुष्ट अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है।
NDA नेताओं ने विपक्ष पर लगाए आरोप
जहां विपक्षी दलों ने रैली को सफल बताते हुए इसे मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का मंच बताया, वहीं NDA के नेताओं ने इस आयोजन की आलोचना की। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का आरोप है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। इस तरह रामलीला मैदान की रैली के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और SIR का मुद्दा ही नहीं रहा, बल्कि इसमें शामिल लोगों की संख्या को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच दावे और प्रतिदावे सामने आए हैं।













