राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में गुरुवार रात से मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत दिलाई, वहीं कई इलाकों में तेज हवा के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है और लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इस बीच, उत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं और मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच सकता है। हालांकि राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का प्रकोप बरकरार है और गुरुवार को जैसलमेर में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में और प्रगति की है। मानसून अब कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अतिरिक्त इलाकों, तमिलनाडु और पुडुचेरी के शेष भागों, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है। बिहार के मधुबनी जिले में मानसून की दस्तक दर्ज की गई है। विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मानसून महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा अन्य राज्यों के और अधिक क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है।
दिल्ली में मौसम का बदला मिजाज
दिनभर चिलचिलाती गर्मी और उमस झेलने के बाद गुरुवार देर रात दिल्लीवासियों को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। राजधानी के कई हिस्सों में अचानक काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। कई स्थानों पर बिजली चमकने और गरज के साथ वर्षा दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को राहत महसूस हुई।
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली में तेज आंधी, बिजली गिरने और भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। विभाग के अनुसार हवाओं की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। इसी वजह से दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
IMD ने नागरिकों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें, कमजोर इमारतों और अस्थायी ढांचों से दूरी बनाए रखें तथा खिड़कियों के पास खड़े होने से बचें। लोगों को पेड़ों के नीचे शरण न लेने और तालाब, झील या अन्य जलाशयों के आसपास जाने से भी मना किया गया है।
बिहार तक पहुंचा मानसून, आगे बढ़ने की रफ्तार तेज
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और बिहार के कई इलाकों में भी मानसूनी बारिश शुरू हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की रफ्तार आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
इस सप्ताह मानसून के कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के शेष क्षेत्रों में पहुंचने के साथ-साथ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे इन क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
पिछले सप्ताह सामान्य से कम हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते सप्ताह एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर भारत, पूर्वी भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में आंधी-तूफान तथा वज्रपात की घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आईं।
इसके बावजूद देशभर में कुल वर्षा सामान्य स्तर से कम रही। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह देश में औसतन 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। दक्षिण-पश्चिम मानसून से जुड़ी वर्षा भी सामान्य से करीब 26 प्रतिशत कम रही, जिससे कई क्षेत्रों में मानसून की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो सकी।
अगले सप्ताह कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के दीर्घकालिक अनुमान के अनुसार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर तमिलनाडु, उत्तरी केरल, कर्नाटक और पंजाब में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। वहीं गोवा, तटीय कर्नाटक और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है।
राजस्थान और गुजरात को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में अगले सप्ताह बारिश की गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि 12 जून तक अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती है। हालांकि इसके बाद तापमान में फिर से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की आगे की प्रगति और प्री-मानसून गतिविधियों की तीव्रता पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल सकता है।














