दिल्ली-NCR में दिवाली के मौके पर पटाखे जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीमित राहत दी है। अदालत के आदेश के मुताबिक, 7 और 8 नवंबर 2026 को केवल ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति होगी। इसके लिए भी समय तय किया गया है। लोग सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही आतिशबाजी कर सकेंगे। 9 नवंबर से पटाखों पर फिर पूरी तरह प्रतिबंध लागू हो जाएगा। यह छूट अस्थायी है और इसके साथ बिक्री, इस्तेमाल तथा प्रदूषण की निगरानी को लेकर कई शर्तें भी लगाई गई हैं।
अस्पतालों और स्कूलों के 300 मीटर के दायरे में रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, बुजुर्गों के घरों और निर्धारित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे। स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा। इन स्थानों को आतिशबाजी के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र माना जाएगा।
अदालत ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए नियमों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए निर्धारित समय के अलावा और प्रतिबंधित इलाकों में आतिशबाजी की अनुमति नहीं होगी।
केवल CSIR-NEERI और PESO से मंजूर ग्रीन पटाखे
आदेश के अनुसार, दिल्ली-NCR में केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति होगी, जिन्हें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से जरूरी मंजूरी मिली हो। ऐसे पटाखों का निर्माण 2 से 6 नवंबर के बीच तय शर्तों के तहत किया जा सकेगा।
पटाखों के पैकेट पूरी तरह सील होने चाहिए, ताकि उनमें दूसरे या प्रतिबंधित पटाखे मिलाकर न बेचे जा सकें। प्रत्येक पैकेट पर एक विशिष्ट QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। इसे स्कैन करने पर निर्माता, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और जांच से संबंधित जानकारी मिलनी चाहिए। CSIR-NEERI के अनुसार, ग्रीन पटाखों की मंजूरी उत्पाद और निर्माता के आधार पर दी जाती है। इसलिए केवल पैकेट पर ‘ग्रीन’ या ‘इको-फ्रेंडली’ लिखा होना मंजूरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।अदालत ने पटाखों की लड़ियां और माला बनाने तथा बेचने पर भी रोक लगाई है। बेरियम वाले पटाखों और जरूरी मंजूरी नहीं रखने वाले उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि सामान्य पटाखों को ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचने या चलाने की अनुमति नहीं होगी।
निर्धारित दुकानों पर ही होगी बिक्री
दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए प्रशासन अधिकृत स्थान तय करेगा। पटाखे केवल इन्हीं निर्धारित दुकानों और बिक्री केंद्रों से खरीदे जा सकेंगे। किसी अन्य स्थान पर बिक्री की अनुमति नहीं होगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए पटाखे बेचने पर भी रोक रहेगी। जिन दुकानदारों के लाइसेंस पहले रद्द किए गए थे, उन्हें 4 से 6 नवंबर के बीच कुछ शर्तों के साथ अस्थायी रूप से बिक्री की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, नियमों का उल्लंघन करने पर उनका लाइसेंस दोबारा रद्द किया जा सकता है। अधिकारियों को दिल्ली-NCR में बाहर से आने वाले वाहनों की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि सामान्य और गैरकानूनी पटाखों की आपूर्ति रोकी जा सके।
प्रदूषण के आंकड़ों पर रखी जाएगी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है। इसके लिए दिवाली से पहले, त्योहार के दौरान और उसके बाद की स्थिति का अलग-अलग आकलन किया जाएगा। निर्देशों के मुताबिक, 2 से 6 नवंबर तक दिवाली से पहले की वायु गुणवत्ता की रिपोर्ट तैयार होगी। 7 और 8 नवंबर को पटाखे जलाने की अनुमति वाले दिनों के आंकड़े अलग से जुटाए जाएंगे। इसके बाद 9 से 30 नवंबर तक दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर की निगरानी की जाएगी। अदालत ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से भी प्रदूषण के कारण मरीजों की संख्या में होने वाली बढ़ोतरी का आंकड़ा जुटाने को कहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आतिशबाजी के दौरान और उसके बाद प्रदूषण का लोगों की सेहत पर कितना असर पड़ा।
29 अक्टूबर की सुनवाई के बाद आया फैसला
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 29 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अधिकारियों से पूछा था कि पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पहले लगाए गए प्रतिबंधों को लागू कराने के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि आदेश तभी प्रभावी होंगे, जब जमीन पर उनका पालन भी कराया जाए। इसके बाद 2 नवंबर को अदालत ने दिवाली के लिए 7 और 8 नवंबर को सीमित समय तक ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी। अदालत ने पहले लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने की चिंता जताई थी। इसी पृष्ठभूमि में इस बार सीमित अवधि की छूट के साथ बिक्री केंद्रों, उत्पादों की मंजूरी, QR कोड और निगरानी से जुड़ी शर्तें रखी गई हैं।
9 नवंबर से फिर लागू होगा पूर्ण प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति केवल 7 और 8 नवंबर के लिए है। 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू हो जाएगा। यानी इसके बाद ग्रीन पटाखे भी नहीं जलाए जा सकेंगे। अदालत ने दिल्ली-NCR के अधिकारियों को आदेश के पालन और प्रदूषण से जुड़ी रिपोर्ट 14 दिसंबर तक जमा करने का निर्देश दिया है। आदेशों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
लोगों से सुरक्षित दिवाली मनाने की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिवाली खुशियों और उम्मीदों का त्योहार है, लेकिन इसके कारण लोगों की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। अदालत ने फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों और अन्य जाने-माने लोगों से भी अपील की कि वे लोगों को सुरक्षित और कम प्रदूषण वाली दिवाली मनाने के लिए जागरूक करें। कोर्ट का जोर इस बात पर है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं है। सरकार, अधिकारी, पटाखा विक्रेता और आम लोगों को मिलकर नियमों का पालन करना होगा। तय समय के बाहर आतिशबाजी न करना, प्रतिबंधित पटाखों से बचना और अस्पतालों तथा स्कूलों के आसपास पटाखे नहीं जलाना इस आदेश के अहम हिस्से हैं।













