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दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश की तैयारी तेज, इस गर्मी में फिर हो सकता है क्लाउड सीडिंग का ट्रायल

दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश (क्लाउड सीडिंग) की तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार उड़ान मंजूरी, विमान और एजेंसियों के समन्वय पर काम कर रही है। मौसम अनुकूल रहा तो इस गर्मी में कृत्रिम बारिश का नया ट्रायल किया जा सकता है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 19 Jun 2026 8:50:57

दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश की तैयारी तेज, इस गर्मी में फिर हो सकता है क्लाउड सीडिंग का ट्रायल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) को लेकर तैयारियां एक बार फिर गति पकड़ रही हैं। दिल्ली सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभिन्न स्तरों पर आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, उड़ान संचालन की मंजूरी प्राप्त करने, उपयुक्त विमान और प्रशिक्षित पायलटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गुरुवार को अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर व्यापक तैयारी की जा रही है ताकि मौसम अनुकूल होने पर बिना किसी बाधा के कृत्रिम बारिश का परीक्षण किया जा सके।

क्या है कृत्रिम बारिश की तकनीक?

कृत्रिम बारिश, जिसे क्लाउड सीडिंग भी कहा जाता है, मौसम संशोधन की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य ऐसे बादलों की वर्षा क्षमता को बढ़ाना होता है जिनमें पहले से नमी मौजूद हो। इस तकनीक के तहत विशेष विमान के माध्यम से बादलों में सिल्वर आयोडाइड और अन्य रासायनिक यौगिकों का छिड़काव किया जाता है।

इन यौगिकों की मदद से बादलों के भीतर जलकणों और बर्फ के क्रिस्टलों का निर्माण तेज होता है, जिससे वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह मौसम की अनुकूल परिस्थितियों पर निर्भर करती है और केवल उपयुक्त बादलों की मौजूदगी में ही प्रभावी साबित हो सकती है।

परिचालन तैयारियों को अंतिम रूप देने की कवायद

अधिकारियों के अनुसार फिलहाल परियोजना के संचालन संबंधी पहलुओं को अंतिम रूप देने पर काम किया जा रहा है। पिछले प्रयासों में तकनीकी तैयारियों से अधिक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां सामने आई थीं, जिनसे इस बार पहले ही निपटने की रणनीति बनाई जा रही है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं का विकास भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर द्वारा किया जा रहा है, जबकि दिल्ली सरकार और अन्य प्रशासनिक एजेंसियां इसके क्रियान्वयन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान दे रही हैं। लक्ष्य यह है कि मौसम अनुकूल होने पर किसी भी प्रकार की देरी या अव्यवस्था के कारण अवसर हाथ से न निकल जाए।

उड़ान अनुमति और समन्वय सबसे बड़ी चुनौती

इस परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पिछली बार सबसे बड़ी दिक्कत सीमित समय के भीतर आवश्यक उड़ान अनुमति प्राप्त करने में आई थी। इसके अलावा विमान की उपलब्धता, पायलट की व्यवस्था और उड़ान के दौरान क्लाउड सीडिंग सामग्री के छिड़काव को लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ था।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बारिश का अभियान कई विभागों और संस्थाओं की भागीदारी से संचालित होता है। इसमें विमानन नियामकों, मौसम वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सटीक समन्वय आवश्यक होता है। ऐसे में मौसम अनुकूल होने के बाद निर्णय लेने के लिए समय बेहद सीमित रह जाता है।

पहले से तैयारियां पूरी करने पर जोर

अधिकारियों का कहना है कि इस बार रणनीति यह है कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार करने के बजाय अधिकतर व्यवस्थाएं पहले से पूरी कर ली जाएं। इसके तहत परियोजना में शामिल एजेंसियों की पहचान की जा रही है और उनके बीच कार्य विभाजन तथा समन्वय तंत्र विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रयास यह है कि जैसे ही मौसम वैज्ञानिक क्लाउड सीडिंग के लिए उपयुक्त परिस्थितियों की पुष्टि करें, उसी समय अभियान शुरू किया जा सके। यदि सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पहले से तैयार रहेंगी तो संचालन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी।

पिछली कोशिशों से मिली महत्वपूर्ण सीख

अधिकारियों ने माना कि पहले किए गए प्रयोगों से कई महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए हैं। उन अनुभवों ने यह स्पष्ट कर दिया कि कृत्रिम बारिश जैसी प्रक्रिया के लिए अग्रिम योजना बनाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चूंकि यह तकनीक केवल विशेष मौसमीय परिस्थितियों में ही लागू की जा सकती है और ऐसे अवसर बहुत सीमित समय के लिए उपलब्ध होते हैं, इसलिए मंजूरी, विमान या चालक दल की व्यवस्था में थोड़ी भी देरी पूरे अभियान को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण इस बार पहले से सभी तैयारियों को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस गर्मी में फिर हो सकता है परीक्षण


परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने संकेत दिया कि दिल्ली में इस गर्मी के दौरान कृत्रिम बारिश का एक और परीक्षण किए जाने की संभावना है। यदि मौसम की आवश्यक परिस्थितियां बनती हैं, तो संबंधित एजेंसियां क्लाउड सीडिंग अभियान को अंजाम देने के लिए तैयार रहेंगी।

गौरतलब है कि दिल्ली के पर्यावरण विभाग और आईआईटी कानपुर के बीच 25 सितंबर 2025 को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय राजधानी में कृत्रिम बारिश कराने के दो प्रयास किए गए थे। हालांकि उन परीक्षणों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और शहर में वर्षा नहीं हो सकी थी।

इसके बावजूद सरकार और वैज्ञानिक संस्थान इस तकनीक की संभावनाओं पर काम जारी रखे हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर तैयारी और अनुकूल मौसम मिलने पर भविष्य में यह प्रयोग अधिक सफल साबित हो सकता है।

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