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'राम मंदिर के मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए', कांग्रेस की मांग- संतों और धर्माचार्यों को सौंपी जाए जिम्मेदारी

राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर कांग्रेस ने मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की है। राजीव शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, संतों-धर्माचार्यों को ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंपने और दान प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 26 Jun 2026 3:22:40

'राम मंदिर के मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए', कांग्रेस की मांग- संतों और धर्माचार्यों को सौंपी जाए जिम्मेदारी

नई दिल्ली: राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी धर्माचार्यों, शंकराचार्यों और संत-महात्माओं को सौंपी जानी चाहिए। साथ ही पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने और मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

दान और आभूषणों के रिकॉर्ड पर उठाए सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का पारदर्शी तरीके से लेखा-जोखा नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए दावा किया कि यदि किसी श्रद्धालु ने 13 लाख रुपये का दान दिया, तो रिकॉर्ड में केवल 10 लाख रुपये दर्ज किए गए और शेष राशि का कोई स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं है। उनका कहना था कि कई श्रद्धालुओं ने यह शिकायत भी की है कि उन्हें दान देने के बाद रसीद तक नहीं मिली। इसके अलावा भगवान श्रीराम को अर्पित हीरे के हार के कथित रूप से गायब होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और नए ट्रस्ट की मांग

राजीव शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस की पहली मांग है कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। दूसरी प्रमुख मांग यह है कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर एक नया ट्रस्ट गठित किया जाए, जिसमें केवल प्रतिष्ठित धर्माचार्य, शंकराचार्य, संत और धार्मिक परंपराओं से जुड़े सम्मानित व्यक्तियों को स्थान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि देशभर से मंदिर ट्रस्ट के संचालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में मंदिरों के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिसमें ईमानदार, निष्पक्ष और धार्मिक मूल्यों से जुड़े लोगों की नियुक्ति सुनिश्चित हो। उनके अनुसार, श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना जरूरी है।

एफआईआर पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

राम मंदिर चढ़ावा मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर भी राजीव शुक्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब तक केवल सात-आठ छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता। यदि हजारों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के लोगों पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

राजीव शुक्ला ने प्रधानमंत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ था, तब देश के सभी प्रमुख नेता और गणमान्य लोग उसमें शामिल हुए थे। इसलिए अब जब दान प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब सरकार को भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए।

धार्मिक संस्थाओं के संचालन पर कांग्रेस का पक्ष

कांग्रेस सांसद ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उनका कहना था कि मंदिरों का प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए, जिन्हें धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और आस्था की गहरी समझ हो।

उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक ट्रस्टों के संचालन में राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों की भूमिका क्यों होनी चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के प्रबंधन में धर्माचार्यों, संतों और विद्वानों को प्रमुख स्थान मिलना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

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