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'विरोध-प्रदर्शन का मतलब लाठीचार्ज नहीं', जंतर-मंतर मामले पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी; पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, विरोध-प्रदर्शन का मतलब लाठीचार्ज नहीं। कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार तक टाली।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 27 Jul 2026 12:12:51

'विरोध-प्रदर्शन का मतलब लाठीचार्ज नहीं', जंतर-मंतर मामले पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी; पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। नीट परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी विरोध प्रदर्शन को केवल इस आधार पर बल प्रयोग का कारण नहीं बनाया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रदर्शनकारियों और प्रशासन, दोनों को आत्मअनुशासन का पालन करना जरूरी है।

इसी सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी अदालत में पक्ष रखा गया। उनके वकील ने आग्रह किया कि घटना के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की बात भी सुनी जानी चाहिए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय किया है।

जंतर-मंतर कार्रवाई को लेकर दायर हुई थीं याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता फौजिया शकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर एके-47 और सी-1 जैसे हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया।

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहा कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार समेत देश के अन्य हिस्सों में भी छात्रों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।

CJI बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार देता है और इस अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल इसलिए कि लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट और समान प्रोटोकॉल होना चाहिए। प्रदर्शन के लिए उचित स्थान तय हो, अनावश्यक रोक-टोक न हो और यदि कहीं असामाजिक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करें तो प्रशासन उनके खिलाफ अलग से कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि यह केवल दिल्ली का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए। CJI ने दोहराया कि विरोध-प्रदर्शन का अर्थ यह नहीं है कि तुरंत लाठीचार्ज कर दिया जाए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को आत्मअनुशासन और संयम का परिचय देना होगा।

पुलिसकर्मियों के परिवारों ने भी रखी अपनी बात

सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि इस मामले में केवल प्रदर्शनकारियों का पक्ष ही नहीं, बल्कि घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की बात भी सुनी जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि घटना के दौरान कई पुलिसकर्मियों के साथ भी मारपीट हुई और उन्हें गंभीर चोटें आईं।

इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन समान रूप से महत्वपूर्ण है, चाहे वह प्रदर्शनकारी हो या पुलिसकर्मी। वहीं केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले में न्यायालय का पूरा सहयोग करेगी। इसके बाद CJI ने सभी संबंधित याचिकाओं को मंगलवार को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

संसद में भी उठा जंतर-मंतर का मुद्दा

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई का मामला संसद तक भी पहुंच गया। कांग्रेस सांसद विजय वसंत ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई को पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की मांग की।

अपने प्रस्ताव में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने के साथ-साथ आंसू गैस के गोले और पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और सादे कपड़ों में मौजूद कुछ कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है।

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