मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के अभियान के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी है। पार्टी मुख्यालय में 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे एक अहम बैठक प्रस्तावित है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। बैठक में मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारी भी हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य SIR और निर्वाचन आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का राजनीतिक और संचार के स्तर पर जवाब तैयार करना है। पार्टी इस बात पर चर्चा करेगी कि टीवी चैनलों की बहस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विपक्ष के आरोपों का किस तरह जवाब दिया जाए और बीजेपी का पक्ष प्रभावी ढंग से कैसे रखा जाए।
बीएल संतोष और सुनील बंसल करेंगे बैठक की अध्यक्षता
इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और महासचिव सुनील बंसल कर सकते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के भी बैठक में शामिल होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, शीर्ष नेतृत्व और मीडिया तथा सोशल मीडिया सेल से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी भी प्रस्तावित है। बैठक ऐसे समय हो रही है, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाने की योजना बना रहा है। बीजेपी की बैठक में इसी अभियान के जवाब में पार्टी के संदेश और संचार रणनीति पर विचार होने की संभावना है।
टीवी चैनलों की बहस और सोशल मीडिया पर रहेगा खास फोकस
बीजेपी की बैठक में पार्टी के मीडिया प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। टीवी चैनलों पर होने वाली राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों के लिए एक समन्वित रणनीति बनाने पर जोर दिया जा सकता है। पार्टी चाहती है कि SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में उसके नेताओं और प्रवक्ताओं का पक्ष स्पष्ट रूप से सामने आए। बैठक में सोशल मीडिया सेल और मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों की भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी के सामने चुनौती विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ अपने समर्थकों और आम मतदाताओं तक अपना पक्ष पहुंचाने की भी है।
SIR को लेकर बीजेपी की ओर से गठित समिति के कामकाज पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में पार्टी की रणनीति इन आरोपों पर जवाब तैयार करने और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित अपने तर्कों को सार्वजनिक बहस में रखने पर केंद्रित रह सकती है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की ‘वोट बचाओ’ रैली
कांग्रेस के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत बड़ी रैली और ‘चलो दिल्ली मार्च’ आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अनियमितताएं हुई हैं। गठबंधन इस मुद्दे को मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर उठा रहा है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, SIR से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप विपक्ष के दावे हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर की रैली के लिए कांग्रेस को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया है। पुलिस के अनुसार, आयोजन से जुड़े कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाएगा।
रैली में 10 लाख लोगों को जुटाने की तैयारी
रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक स्तर पर बैठकें कर रहा है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के क्षेत्रीय नेताओं के साथ चर्चा की जा रही है। इन तैयारियों में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। कांग्रेस की योजना रैली में करीब 10 लाख लोगों को जुटाने की है। इसके लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जा रहा है। क्षेत्रीय इकाइयों के साथ बैठकों के जरिए लोगों तक अभियान का संदेश पहुंचाने और अधिक से अधिक समर्थकों को दिल्ली लाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष की इस लामबंदी के बीच बीजेपी की रणनीतिक बैठक को अहम माना जा रहा है। एक ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल SIR तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर अपना अभियान तेज कर रहे हैं, वहीं बीजेपी टीवी बहस और डिजिटल मंचों पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए अपने संदेश और संचार व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी में है।














