मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें 48 घंटे का समय दिया है। उन्होंने कहा कि तय समय में इस्तीफा नहीं हुआ तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। दीपके ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं।
दीपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि मौजूदा चुनाव व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच नाराजगी है। उन्होंने विपक्षी दलों से भी चुनाव में हिस्सा लेने को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष नहीं है तो राजनीतिक दलों को उसमें भाग लेने से बचना चाहिए। हालांकि, चुनाव में धांधली या किसी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के उनके दावों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि उनके आरोप और राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बीजेपी नेताओं के चुनाव हारने को लेकर भी किया दावा
दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता जो चुनाव हार चुके हैं, उनकी हार के लिए भी ज्ञानेश कुमार को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। उन्होंने इस दावे के समर्थन में किसी भाजपा नेता का नाम नहीं बताया।
उन्होंने विपक्षी दलों के चुनाव में हिस्सा लेने के सवाल पर कहा कि अगर किसी को लगता है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहा है तो उसे चुनाव में भाग लेने के फैसले पर विचार करना चाहिए। उन्होंने क्रिकेट मैच का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी को पहले से पता हो कि मैच फिक्स है, तो वह उसमें हिस्सा नहीं लेगा।
उत्तर प्रदेश चुनाव पर क्या बोले दीपके
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी दीपके से सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव उनकी अपील मानकर चुनाव से दूरी बना सकते हैं।
इस पर दीपके ने कहा कि किसी नेता को उनकी बात माननी है या नहीं, यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिसे उनकी बात स्वीकार करनी है, वह करे और जिसे नहीं करनी है, वह न करे।
48 घंटे में इस्तीफा नहीं तो देशभर में आंदोलन
CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समयसीमा रखी है। दीपके ने कहा कि अगर इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया गया तो उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन करेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता अलग-अलग राज्यों और शहरों में जाएंगे और लोगों के बीच अपनी बात रखेंगे। दीपके ने इसे पहले जंतर-मंतर पर किए गए आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि उस आंदोलन से पहले भी पार्टी देश के अलग-अलग हिस्सों में गई थी और इसी तरह इस मुद्दे को लेकर भी देशभर में अभियान चलाया जाएगा।
SIR को लेकर कई मांगें
CJP ने केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग नहीं की है। पार्टी ने SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने और इसे रोकने की भी मांग रखी है। इसके साथ ही पहले की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की गई है।
दीपके के मुताबिक, SIR से जुड़े रिकॉर्ड और फाइलों को सुप्रीम कोर्ट या स्वतंत्र न्यायिक निगरानी वाली जांच के हवाले किया जाना चाहिए। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग की है।
इसके अलावा CJP ने उन अधिकारियों की पहचान करने की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर विवादित बदलावों और निर्देशों को मंजूरी दी थी।
'वोट चोरी' को बताया बड़ा मुद्दा
दीपके ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर 'वोट चोरी' का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि लोगों के बीच चुनाव प्रक्रिया में छेड़छाड़ को लेकर नाराजगी है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा दे देते हैं तो स्थिति अलग होगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर देशभर में उनके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों का उदाहरण देते हुए बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग भी रखी।
SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद विवाद
ज्ञानेश कुमार को लेकर CJP की मांग ऐसे समय आई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर एक रिपोर्ट सामने आई है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों और मतदाता डेटा तथा फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 में SIR से जुड़े एक नए घोषणा खंड को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव को लेकर कहा था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की जरूरत होगी। 19 मई को सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने रिपोर्ट में सामने आए मतभेद के निष्कर्ष को खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किसी मुद्दे पर अलग राय होना और आयोग के अंतिम फैसले में असहमति होना एक ही बात नहीं है। आयोग के अनुसार SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सहमति से लिए गए हैं।
इसी विवाद के बीच अभिजीत दीपके और CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर स्वतंत्र जांच और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव सहित अपनी मांगें सामने रखी हैं। पार्टी ने 48 घंटे में मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।














