कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को फिलहाल रोकने का ऐलान किया है। सीजेपी नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका के जेल में बंद होने और अन्य कानूनी मुश्किलों का जिक्र करते हुए दीपके ने समर्थकों से कुछ दिन अपने परिवारों के साथ बिताने की अपील की। त्योहारों के नजदीक आने के बीच उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुए घटनाक्रम से परिवारों की चिंता बढ़ी है। सौरभ दास और आशुतोष रांका के बारे में बात करते हुए दीपके भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू आ गए और बोलते समय उनका गला भी भर आया। इससे पहले एक अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयोग को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट के बाद अभिजीत दीपके ने अपना ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नए आंदोलन की शुरुआत की थी। कॉकरोच जनता पार्टी ने तब स्पष्ट किया था कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक वह पीछे हटने वाली नहीं है। हालांकि, पार्टी के नेताओं के कानूनी मुश्किलों में घिरने के बाद आंदोलन को लेकर अब अस्थायी विराम का फैसला लिया गया है।
मंगलवार को जारी करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में दीपके ने समर्थकों के संघर्ष, उनके परिवारों की चिंता और जेल में बंद सौरभ दास तथा आशुतोष रांका की स्थिति पर बात की। उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य समर्थकों को कुछ समय के लिए परिवार के साथ रहने और त्योहारों के दौरान अपनों को समय देने की सलाह देना था। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों के अब तक के संघर्ष की सराहना भी की।
संघर्ष कर रहे समर्थकों की हिम्मत को दीपके ने किया सलाम
अभिजीत दीपके ने वीडियो संदेश में आंदोलन से जुड़े लोगों के संघर्ष को याद करते हुए उनकी एकजुटता और हिम्मत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से समर्थक लगातार संघर्ष कर रहे हैं और इस दौरान उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। दीपके के मुताबिक, पूरा सिस्टम उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है, इसके बावजूद वे निस्वार्थ भाव से उनके साथ खड़े हैं।
दीपके ने अपने संदेश में कहा, ‘मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ दिनों से आप सभी संघर्ष कर रहे हैं। आप लोगों ने बहुत कुछ झेला है। जिस तरह पूरा सिस्टम आप लोगों को दबाने में लगा है। मैं भाग्यशाली हूं कि आप जैसे नि:स्वार्थ भाव से संघर्ष कर रहे हैं और मेरे, आशुतोष-सौरभ के साथ खड़े हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि वह शुरुआत से ही समर्थकों को आगाह करते रहे हैं कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां और मुश्किल हो सकती हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने पहले ही आशंका जताई थी कि आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस को पीछे लगाया जा सकता है, मामले दर्ज किए जा सकते हैं और समर्थकों को किसी न किसी तरह फंसाने की कोशिश हो सकती है। दीपके ने कहा कि अब जिस तरह की परिस्थितियां सामने आ रही हैं, वे उनकी पहले की आशंकाओं से मेल खाती हैं। हालांकि, इन मुश्किलों के बावजूद आंदोलन से जुड़े लोगों ने जिस साहस और एकता के साथ संघर्ष जारी रखा, वह सराहनीय है। उन्होंने समर्थकों के इस रवैये के लिए उनका आभार जताया और कहा कि वह दिल से उन्हें सलाम करते हैं।
परिवारों की चिंता का हवाला देकर कुछ दिन साथ रहने की अपील
आंदोलन को फिलहाल विराम देने की वजह बताते हुए अभिजीत दीपके ने पिछले 10-12 दिनों के घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन दिनों में जो कुछ हुआ है, उससे आंदोलन में शामिल लोगों के परिवार काफी चिंतित हैं। ऐसे में समर्थकों को कुछ समय अपने परिजनों के साथ बिताना चाहिए, खासकर तब जब त्योहार नजदीक हैं। दीपके ने कहा कि सौरभ दास और आशुतोष रांका के सामने जो मुश्किलें हैं, वैसी ही चुनौतियों का सामना आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों को सड़कों पर पीटा गया और हिरासत में लिया गया। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों का असर केवल आंदोलनकारियों पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है।
इस बारे में दीपके ने कहा, ‘जितनी चीजें सौरभ दास और आशुतोष रांका के लिए मुश्किलें हैं उतनी ही आपके लिए। बहुत से लोगों को सड़कों पर पीटा गया है। डिटेन किया गया। हम से ज्यादा हमारे परिवारों के लिए मुश्किल है। क्योंकि यह फैसला उनका नहीं, हमारा था।’
उन्होंने सभी कॉकरोचों से अपील की कि वे कुछ दिनों के लिए आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों से विराम लेकर अपने परिवार के साथ रहें। दीपके ने कहा कि त्योहारों का समय नजदीक है और पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस तरह सौरभ दास और आशुतोष रांका के परिवार परेशान होंगे, उसी तरह आंदोलन में शामिल अन्य लोगों के परिजन भी उनकी सुरक्षा और परिस्थितियों को लेकर चिंतित होंगे। दीपके ने समर्थकों से कहा, ‘मैं सभी कॉकरोच से अपील करता हूं कि कुछ दिन के लिए आप अपने परिवार के साथ वक्त बिताएं। त्योहार आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ है उससे परिवार बहुत चिंतित हैं। सौरभ और आशुतोष की तरह आपका परिवार भी चिंतित होगा। कुछ दिन अपने परिवार के साथ रहिए, कुछ समय अपने चाहने वालों के साथ रहिए।’
उनकी इस अपील में समर्थकों के संघर्ष को स्वीकार करने के साथ-साथ उनके पारिवारिक जीवन और अपनों की चिंता को भी महत्व दिया गया। फिलहाल आंदोलन पर विराम लगाने का संदेश देते हुए दीपके ने लोगों को परिवार के साथ समय बिताने की सलाह दी।
सौरभ दास की मां ने बढ़ाया हौसला, जेल से बाहर आने पर सम्मान की बात कही
वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने सौरभ दास और आशुतोष रांका के परिवारों से बातचीत की है। उन्होंने खास तौर पर सौरभ की मां का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने खुद उनका हौसला बढ़ाया। दीपके ने इस बातचीत और दोनों नेताओं की स्थिति का उल्लेख करते हुए उनके प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। उन्होंने सीजेपी के आंदोलन में सौरभ दास और आशुतोष रांका की भूमिका तथा उनके महत्व पर भी बात की। दीपके ने माना कि फैसले लेने की उनकी क्षमता बेहतर है और वह खुद भी उनकी सलाह के मुताबिक काम करते हैं। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि वह आंदोलन में दोनों नेताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं। सौरभ दास और आशुतोष रांका के जेल में बंद होने का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि जब वे बाहर आएंगे, तब पूरा देश उन्हें सलाम करेगा। उन्होंने उन लोगों को भी जवाब दिया, जिनके बारे में उनका मानना है कि वे दोनों नेताओं को जेल में डालकर आंदोलन से जुड़े लोगों को डरा सकते हैं।
दीपके ने कहा कि सौरभ और आशुतोष को जेल में रखने से उन्हें डराया नहीं जा सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जेल से बाहर आने के बाद दोनों उसी मुस्कान के साथ लौटेंगे और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे लगाएंगे। उनके मुताबिक, दोनों नेताओं का जेल से बाहर आना समर्थकों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण होगा।
सौरभ दास और आशुतोष रांका का जिक्र करते हुए भावुक हुए दीपके
वीडियो संदेश का सबसे भावुक हिस्सा वह रहा, जब अभिजीत दीपके ने बार-बार सौरभ दास और आशुतोष रांका का जिक्र किया। दोनों नेताओं के जेल में होने और उनसे अपने रिश्ते की बात करते हुए दीपके की आंखों में आंसू आ गए। उनका गला भर आया और उन्होंने अपने भावुक होने की वजह भी स्पष्ट की। दीपके ने कहा कि कुछ लोग उनके इस भावुक व्यवहार का मजाक उड़ा सकते हैं और इसे उनकी कमजोरी के तौर पर पेश कर सकते हैं। उन्होंने पहले से ऐसी प्रतिक्रिया की आशंका जताते हुए कहा कि उनके लिए भावनाएं कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत हैं। उन्होंने सौरभ और आशुतोष को अपना भाई और परिवार का हिस्सा बताया। इस दौरान दीपके ने कहा, ‘अभी दो रुपये के ट्रोल कहेंगे कि इमोशनल हो गया है। देखो कैसे रुला दिया। हमारी इमोशन हमारी वीकनेस नहीं मजबूती है। मैं इमोशनल हो रहा हूं क्योंकि सौरभ दास और आशुतोष रांका मेरे भाई हैं। मेरे परिवार हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि दोनों नेताओं के प्रति उनके मन में प्यार और परवाह है, इसलिए उनके बारे में बात करते समय वह भावुक हो रहे हैं। दीपके ने स्पष्ट किया कि उनके आंसुओं का मतलब यह नहीं है कि वह डर गए हैं। उन्होंने अपने जेल में रहने का जिक्र करते हुए कहा कि वह पहले भी जेल में रखे जाने के बावजूद डरे नहीं थे और मौजूदा परिस्थितियों से भी भयभीत नहीं हैं।
दीपके ने अपने बयान में कहा, ‘इमोशन इसलिए हैं कि मैं उनकी परवाह करता हूं। मैं डरा नहीं हूं। मुझे भी जेल में रखा। मैं डरा नहीं हूं। मेरे इमोशन इसलिए बाहर आ रहे हैं कि मैं उनकी बहुत केयर करता हूं। मेरे दिल में उनके लिए प्यार है। यह मेरी मजबूती है।’
अपने भावुक होने पर मजाक उड़ाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने नफरत और संवेदनशीलता के बीच अंतर भी बताया। दीपके ने कहा कि कुछ लोग भावनाओं को कमजोरी समझते हैं, क्योंकि उनके अनुसार वे दूसरों की चिंता, प्यार और करुणा को नहीं समझते। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग नफरत फैलाते हैं और वास्तव में यही उनकी कमजोरी है।
उन्होंने कहा, ‘तुम लोगों को इमोशनल वीकनेस लगती होगी क्योंकि कभी किसी की चिंता नहीं की, प्यार, करुणा क्या है तुम्हें क्या पता क्योंकि तुम नफरत फैलाते हो। वह नफरत तुम्हारी कमजोरी है।’ इस तरह अपने वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके ने एक ओर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन पर अस्थायी रोक लगाने और समर्थकों को त्योहारों के दौरान परिवार के साथ समय बिताने की अपील की, वहीं दूसरी ओर सौरभ दास और आशुतोष रांका के प्रति अपना समर्थन जताया। दोनों नेताओं के जेल में होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके बाहर आने पर देश उन्हें सलाम करेगा। अपने साथियों को भाई और परिवार बताने वाले दीपके का भावुक संदेश आंदोलन में शामिल लोगों के संघर्ष, एकजुटता और उनके परिवारों की चिंताओं पर केंद्रित रहा।














