कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। हाथों में तिरंगा लेकर जैसे ही दीपके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SCP) के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास से बाहर निकले, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और एहतियाती हिरासत में लेने की बात कही। इस कार्रवाई पर दीपके ने नाराजगी जताते हुए पुलिस से सवाल किया कि उन्होंने आखिर क्या किया है और जब वह अकेले तिरंगा लेकर चल रहे थे, तो उन्हें हिरासत में क्यों लिया जा रहा है। दीपके ने पुलिसकर्मियों से कहा कि उनके आसपास दिखाई दे रही भीड़ प्रदर्शनकारियों की नहीं, बल्कि मीडियाकर्मियों की है। उनका कहना था कि उन्होंने कोई कानून नहीं तोड़ा है, फिर भी पुलिस उन्हें अपने साथ ले जा रही है। पुलिस ने जवाब दिया कि उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया जा रहा है, क्योंकि कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा लागू है।
तिरंगा लेकर घर से निकले तो पुलिस ने रोका
अभिजीत दीपके जब अनीश गवांडे के आवास से हाथों में तिरंगा लेकर बाहर आए, तभी एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें हिरासत में लेने की सूचना दी। अधिकारी ने कहा, “हम आपको प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) में ले रहे हैं। कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू है। इसलिए आपको हिरासत में लिया जा रहा है।” पुलिस की यह बात सुनकर दीपके ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह अकेले हैं और उनके साथ दिखाई दे रहे अन्य लोग मीडियाकर्मी हैं। ऐसे में उन्होंने किस नियम का उल्लंघन किया है? दीपके की आपत्ति का मुख्य आधार यही था कि वह अभी मार्च में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस पहुंचे भी नहीं थे, फिर भी उन्हें हिरासत में लिया जा रहा था। CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। इसी कार्यक्रम से पहले पुलिस ने दीपके के खिलाफ कार्रवाई की।
प्रदर्शन से पहले दीपके के आवास पर पहुंची थी पुलिस
अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने से पहले दिल्ली पुलिस की एक टीम उनके झंडेवालान स्थित आवास पर भी पहुंची थी। दिन में 20 से अधिक पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उन्हें एक नोटिस सौंपा। नोटिस में दीपके को ऐसा कोई कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया गया था, जिससे नागरिकों, व्यापारियों, यात्रियों, मरीजों और अन्य लोगों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। यह कार्रवाई राजधानी में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के बीच हुई। पुलिस ने मार्च को लेकर पहले ही आपत्ति जताई थी और कनॉट प्लेस में लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए वहां कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू होने का हवाला
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए कनॉट प्लेस में मार्च की अनुमति नहीं दी थी। इस निषेधाज्ञा के तहत कनॉट प्लेस और उसके आसपास के क्षेत्रों में लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। पुलिस की दलील इसी प्रतिबंध पर आधारित थी। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के एक सीमित समूह को किसी वैकल्पिक स्थान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा था। यानी कनॉट प्लेस में मार्च की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद, पुलिस की ओर से दूसरी जगह सीमित संख्या में लोगों के साथ तिरंगा फहराने का विकल्प पेश किया गया था।
सेंट्रल पार्क शुक्रवार और शनिवार को बंद रखने का फैसला
CJP ने अपने ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन के लिए कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को चुना था। लेकिन नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने कहा कि प्रशासनिक कारणों से शुक्रवार और शनिवार को पार्क आम लोगों के लिए बंद रहेगा। ऐसे में प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पार्क को बंद रखने का फैसला भी सामने आया। पुलिस की निषेधाज्ञा, दीपके को जारी नोटिस और एहतियाती हिरासत की कार्रवाई के बीच CJP के प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। दीपके ने हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस से सवाल किया कि जब वह अकेले तिरंगा लेकर चल रहे थे और उनके आसपास मौजूद लोग मीडियाकर्मी थे, तो उनके खिलाफ यह कार्रवाई क्यों की गई।














