दिल्ली पुलिस ने सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके को शांति भंग करने के आरोप में नए मामले के तहत गिरफ्तार किया है। वहीं, नेहा बोरा को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों को एहतियाती कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया था। अभिजीत दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दर्ज नए मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आज दिन में नई दिल्ली की एसईएम (SEM) कोर्ट में पेश किया जाएगा।
अभिजीत दीपके की पेशी के बाद अदालत यह तय करेगी कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या जमानत पर रिहा किया जाएगा। फिलहाल, उनकी आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर फैसला अदालत को करना है। दूसरी ओर, नेहा बोरा की रिहाई के बाद इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मांगें चर्चा में हैं।
अभिजीत दीपके पर क्या हैं आरोप?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कनॉट प्लेस में आयोजित होने वाले तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में शांति भंग करने की आशंका के आधार पर उनके खिलाफ नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ पहले की गई कार्रवाई से अलग बताई गई है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया था। उस समय विमान से जुड़े मामले में उनके खिलाफ शांति भंग करने का एक अलग केस दर्ज किया गया था। उस मामले में उनसे बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराए गए थे, जिसके तहत उन्हें एक साल तक अशांति नहीं फैलाने की शर्त का पालन करना था। अब कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च से पहले हुई कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस बार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की है। अभिजीत दीपके को नई दिल्ली की एसईएम कोर्ट में पेश किए जाने के बाद उनकी हिरासत और रिहाई से संबंधित अगला फैसला लिया जाएगा।
क्या है BNSS की धारा 126 और 170?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 170 का इस्तेमाल शांति बनाए रखने और संभावित अपराध को रोकने के लिए की जाने वाली एहतियाती कार्रवाई में किया जाता है। BNSS की धारा 126 के तहत मजिस्ट्रेट शांति बनाए रखने के उद्देश्य से संबंधित व्यक्ति से मुचलका या बॉन्ड भरवा सकते हैं। इसका मकसद ऐसी स्थिति में शांति बनाए रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाना है, जहां अशांति की आशंका हो। वहीं, धारा 170 पुलिस को संभावित अपराध या शांति भंग होने की आशंका को रोकने के लिए एहतियातन गिरफ्तारी करने का अधिकार देती है। इन प्रावधानों के तहत की जाने वाली कार्रवाई का उद्देश्य संभावित अशांति को रोकना होता है। अभिजीत दीपके के मामले में दिल्ली पुलिस ने इन्हीं धाराओं के तहत नया केस दर्ज किया है।
नेहा बोरा की क्यों हुई रिहाई?
दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम (DP Act) की धारा 65 के तहत की गई कार्रवाई के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके छोड़ दिया। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी में उनकी रिहाई की पुष्टि की गई है। नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ देशभर में करीब 12 घंटे तक विरोध-प्रदर्शन हुए। इस दौरान उनकी हिरासत को अवैध बताते हुए विरोध जताया गया और लोगों ने उनकी रिहाई की मांग की। विरोध-प्रदर्शनों और लोगों के आक्रोश के बीच नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया। इस घटनाक्रम पर आईसा (AISA) ने मीडिया और उन लोगों का आभार जताया, जिन्होंने मुश्किल समय में उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया। संगठन ने कहा कि इस दौरान साथ देने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
आईसा ने क्या कहा?
नेहा बोरा की रिहाई के बाद आईसा ने स्पष्ट किया कि उसकी राजनीतिक मांगों को लेकर लड़ाई जारी रहेगी। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस मांग से पीछे नहीं हटेगा। आईसा ने कहा, “ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हमारी लड़ाई जारी रहेगी।” संगठन ने एसआईआर (SIR) को वापस लेने की मांग भी दोहराई। इसके साथ ही उसने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और उसकी स्वायत्तता को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। आईसा का कहना है कि एसआईआर को वापस लिया जाना चाहिए और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता को प्रभावित करने के मामले में मोदी सरकार को अपनी जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए। संगठन ने इन मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कही है। इस पूरे घटनाक्रम में जहां नेहा बोरा को कानूनी औपचारिकताओं के बाद रिहा कर दिया गया है, वहीं अभिजीत दीपके को नए मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत में पेश किया जाना है। उनकी आगे की हिरासत या जमानत को लेकर निर्णय एसईएम कोर्ट करेगी।













