पटना में चर्चित शिक्षक खान सर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर अब कानूनी और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मामले में खान सर की ओर से बड़ा संकेत मिला है कि वह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय अदालत से अग्रिम जमानत लेने की राह अपनाएंगे। जानकारी के अनुसार, सोमवार को उनके वकील पटना सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। इस बीच खान सर के अधिवक्ता ने पूरे मामले को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और एफआईआर को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
खान सर के वकील अरविंद कुमार मउआर का कहना है कि उनके मुवक्किल को जानबूझकर कानूनी विवाद में घसीटा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह प्राथमिकी किसी वास्तविक अपराध के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिशोध की भावना से दर्ज कराई गई है। उनके अनुसार, खान सर और उनके संस्थान की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कुछ लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
वकील ने पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि 2 जून को खान ग्लोबल इंस्टीट्यूट के बाहर हुई घटना के बाद संस्थान के एक कर्मचारी ने दूसरे कोचिंग संस्थान के संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसके जवाब में विरोधी पक्ष ने भी एक प्राथमिकी दर्ज करवाई, जिसमें खान सर का नाम शामिल कर दिया गया। उनका आरोप है कि जिस घटना का हवाला देकर एफआईआर दर्ज की गई, उसमें खान सर की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
अरविंद कुमार मउआर ने कहा कि वायरल वीडियो और तस्वीरों में केवल सुरक्षा कर्मी दिखाई दे रहे थे। उनके मुताबिक गार्डों ने उस समय केवल आत्मरक्षा और सुरक्षा के उद्देश्य से हवाई फायरिंग की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गोलीबारी में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ और न ही किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचा। इसके बावजूद पुलिस केस में खान सर का नाम जोड़ दिया गया, जिसे वह पूरी तरह अनुचित मानते हैं।
उन्होंने कहा, "यह एफआईआर बदले की भावना से दर्ज कराई गई है। हमारे संस्थान की ओर से पहले केस दर्ज किया गया था और उसके बाद जवाबी कार्रवाई के रूप में यह मामला सामने आया। जिस वीडियो के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, उसमें खान सर कहीं नजर नहीं आते। सुरक्षा कर्मियों ने केवल स्थिति को नियंत्रित करने और खुद की सुरक्षा के लिए हवाई फायर किया था। इसके बावजूद खान सर को आरोपी बना दिया गया है।"
वकील ने आगे कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और अदालत में अग्रिम जमानत याचिका के जरिए पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत इस मामले में उचित फैसला करेगी। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय के विवेक पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज होने के बाद से खान सर सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। फिलहाल वह कहां हैं, इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पुलिस भी मामले की जांच में जुटी हुई है, जबकि उनके समर्थकों और छात्रों के बीच इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
गौरतलब है कि 2 जून को खान ग्लोबल इंस्टीट्यूट में कथित तोड़फोड़ और हमले की घटना के बाद संस्थान की ओर से पास में स्थित ज्ञान बिंदु जी.एस. एकेडमी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित एकेडमी के संचालक रौशन आनंद को गिरफ्तार भी किया था। उस समय मामला केवल तोड़फोड़ और विवाद तक सीमित माना जा रहा था।
हालांकि बाद में एक नया वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया। वायरल फुटेज में घटना वाले दिन खान सर की सुरक्षा में तैनात दो गार्ड संस्थान परिसर के भीतर फायरिंग करते हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आते ही पुलिस ने जांच तेज कर दी और दोनों सुरक्षा कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान दोनों गार्डों ने फायरिंग किए जाने की बात स्वीकार की है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि गोली चलाने का फैसला विशेष परिस्थितियों में लिया गया था। इसी बयान और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में नई धाराएं जोड़ी हैं।
इसके बाद खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। अब इस केस की अगली दिशा काफी हद तक अदालत में दाखिल होने वाली अग्रिम जमानत याचिका और पुलिस जांच की प्रगति पर निर्भर करेगी। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह विवाद शिक्षा जगत और बिहार की राजनीति दोनों में चर्चा का विषय बन चुका है।













