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'कॉकरोच जितना प्रभाव नहीं छोड़ पाया कांग्रेस का प्रदर्शन', शशि थरूर ने फिर पार्टी की रणनीति पर उठाए सवाल

शशि थरूर ने कांग्रेस की युवा रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को Gen Z के बीच CJP के आंदोलनों जैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली। जानें पूरा मामला।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 08 Aug 2026 12:28:17

'कॉकरोच जितना प्रभाव नहीं छोड़ पाया कांग्रेस का प्रदर्शन', शशि थरूर ने फिर पार्टी की रणनीति पर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के प्रदर्शन और युवाओं से जुड़ने की रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को उन्होंने स्वीकार किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से हाल ही में किए गए छात्र आंदोलनों में जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया, उनमें से कई मुद्दे कांग्रेस पहले ही अपने छात्र आउटरीच अभियान 'छात्रों की गूंज' के तहत उठा चुकी थी। हालांकि, थरूर ने यह भी साफ तौर पर माना कि कांग्रेस का अभियान युवाओं और खासतौर पर Gen Z के बीच वह प्रभाव पैदा नहीं कर सका, जो CJP के आंदोलनों को देखने को मिला।

मुंबई में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में शशि थरूर ने पार्टी के मौजूदा तरीके पर आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि केवल मुद्दों को उठाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि युवा उन मुद्दों को किस तरह देख रहे हैं और किस माध्यम से उनसे बेहतर संवाद स्थापित किया जा सकता है।

क्या कांग्रेस Gen Z की सोच समझने में पीछे रह गई?

जंतर-मंतर पर CJP की ओर से आयोजित छात्र प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए शशि थरूर ने कहा कि जिन विषयों को लेकर CJP ने आंदोलन किया, कांग्रेस उनसे पहले ही जनता के बीच जा चुकी थी। उन्होंने बताया कि पार्टी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पहले से चल रहा था और इसी अभियान के तहत राहुल गांधी ने पेपर लीक सहित छात्रों से जुड़े कई मुद्दों पर युवाओं के साथ बातचीत की थी।

हालांकि, थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस को सिर्फ इस तथ्य से संतुष्ट नहीं होना चाहिए कि उसने मुद्दों को पहले उठाया था। उनके मुताबिक, पार्टी को यह भी देखना होगा कि आखिर उसके अभियान को युवाओं के बीच वैसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस छात्रों की चिंताओं को उस तरीके से समझने में सफल रही, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या पार्टी की Gen Z के साथ संवाद करने की शैली में कोई कमी रह गई या युवा वर्ग की बदलती सोच और राजनीतिक प्राथमिकताओं को समझने में कांग्रेस कहीं पीछे छूट गई।

NEET-UG 2026 विवाद के बाद तेज हुआ 'Gen Z' आंदोलन

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था। CJP ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई थी।

समय के साथ यह आंदोलन और व्यापक होता गया। छात्रों के प्रदर्शन को तब और मजबूती मिली, जब जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भी उनके समर्थन में सामने आए। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।

इसके बाद CJP ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च करने का आह्वान किया। प्रस्तावित मार्च से कुछ दिन पहले सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में उठाते हुए केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस ने भी पहले उठाया था पेपर लीक का मुद्दा

NEET-UG विवाद के दौरान पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले संगठनों में कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI भी शामिल था। मई 2026 में परीक्षा रद्द होने के बाद NSUI ने दिल्ली में प्रदर्शन कर छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे।

इसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य छात्रों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाना था।

कोटा से प्रयागराज तक राहुल गांधी ने उठाए युवाओं के मुद्दे

'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत राहुल गांधी ने अलग-अलग शहरों में जाकर छात्रों और युवाओं से जुड़े विषयों पर बात की।

कोटा: देश के प्रमुख कोचिंग हब कोटा में राहुल गांधी ने छात्रों के सपनों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने छात्रों पर पड़ने वाले दबाव और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने रखा।

देहरादून: उत्तराखंड में उन्होंने कथित धांधली और पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राहुल गांधी ने युवाओं के सामने मौजूद बेरोजगारी की समस्या को प्रमुखता से उठाया और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से सवाल किए।

राहुल गांधी ने उस समय कहा था कि देश का युवा मौजूदा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है और कांग्रेस उनकी चिंताओं को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का काम करेगी।

थरूर के बयान से कांग्रेस की रणनीति पर फिर चर्चा

शशि थरूर के ताजा बयान ने कांग्रेस के भीतर और बाहर एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि पार्टी युवाओं के बीच अपने संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने में कहां पीछे रह रही है। खासकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय Gen Z वर्ग के साथ राजनीतिक दलों के संवाद का तरीका तेजी से बदल रहा है।

थरूर की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने मुद्दों को उठाने और जनता के बीच उसका प्रभाव पैदा करने के बीच के अंतर को रेखांकित किया। उनका कहना है कि अगर किसी पार्टी ने किसी समस्या को पहले उठाया है, लेकिन दूसरी ओर से उसी मुद्दे पर अधिक प्रभावी आंदोलन खड़ा हो जाता है, तो पार्टी को यह समझने की जरूरत है कि जनता तक उसका संदेश क्यों नहीं पहुंच पाया।

ऐसे में शशि थरूर की टिप्पणी कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का संकेत मानी जा रही है। यह बहस अब सिर्फ छात्र आंदोलनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी केंद्रित है कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टियों में से एक कांग्रेस बदलते युवा वर्ग, डिजिटल राजनीति और नए तरह के आंदोलनों के साथ अपने जुड़ाव को किस तरह मजबूत कर सकती है।

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