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नितिन गडकरी का बड़ा रोडमैप: 100% इथेनॉल फ्यूल की ओर भारत, ऑटो इंडस्ट्री के सामने नई चुनौती

नितिन गडकरी ने भारत को 100% इथेनॉल फ्यूल की ओर ले जाने का बड़ा रोडमैप पेश किया। जानें किसानों, ऑटो इंडस्ट्री और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर इसका असर।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 22 Apr 2026 10:38:44

नितिन गडकरी का बड़ा रोडमैप: 100% इथेनॉल फ्यूल की ओर भारत, ऑटो इंडस्ट्री के सामने नई चुनौती

देश में फिलहाल E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सरकार चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में इथेनॉल की हिस्सेदारी और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसी बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसमें उन्होंने भारत को 100% इथेनॉल आधारित ईंधन की ओर बढ़ने की अपील की है।

इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी द्वारा आयोजित ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय बन चुका है। उनके अनुसार, फ्यूल इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना भारत के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्षों के कारण अस्थिरता का सामना कर रहा है। इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है और भारत के आयात खर्च को भी बढ़ा दिया है। फिलहाल देश अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिससे हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का भारी बोझ अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का विजन

गडकरी ने इस अस्थिरता को देखते हुए कहा कि भारत को अपने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से अलग करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ब्राजील की तरह E100 मॉडल को अपनाता है, तो देश अपने कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकता है।

इस बदलाव से न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि किसानों को भी नया आर्थिक अवसर मिलेगा। उन्हें केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में योगदान देने वाले ‘ऊर्जादाता’ के रूप में भी नई पहचान मिल सकती है।

वाहन तकनीक में बड़े बदलाव की जरूरत

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बायोफ्यूल सेक्टर में तेजी से प्रगति की है। 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 पेट्रोल का पूर्ण रूप से विस्तार होने के बाद अब सरकार अगली स्टेज पर काम कर रही है। मौजूदा इंजन तकनीक में E20 मिश्रण को मामूली बदलाव के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन E85 या E100 स्तर के लिए वाहनों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की आवश्यकता होगी।

इसके लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने इंजन डिजाइन में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे, ताकि अधिक इथेनॉल कंसंट्रेशन को संभाला जा सके। क्योंकि इथेनॉल, सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक संक्षारक (corrosive) होता है, इसलिए इंजन की मजबूती और टिकाऊपन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

सरकार की नीति और भविष्य की दिशा

गडकरी ने यह भी बताया कि आने वाले समय में लागू होने वाले CAFE III (Corporate Average Fuel Efficiency) मानक, जो 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे, इलेक्ट्रिक वाहनों और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही E85 फ्यूल को लेकर एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी अंतिम चरण में है, जो यह संकेत देता है कि सरकार उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए बुनियादी ढांचे को तेजी से तैयार कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा जरूर दे रही है, लेकिन किसी भी तकनीक को जबरन लागू नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं के पास विकल्प रहेगा और फोकस बेहतर तकनीक और आकर्षक उत्पादों पर होगा।

ऑटो कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती

इस पूरे बदलाव में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे इंजन विकसित करना है जो हाई इथेनॉल फ्यूल पर भी बिना किसी तकनीकी समस्या के काम कर सकें। इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भारी निवेश की जरूरत होगी, ताकि वाहन प्रदर्शन और सुरक्षा दोनों बरकरार रह सकें।

ग्रीन हाइड्रोजन पर भी फोकस

इथेनॉल के साथ-साथ गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन को भी भविष्य का प्रमुख ईंधन बताया। उन्होंने कहा कि अगर इसकी उत्पादन लागत को लगभग 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाया जा सके, तो यह भारी वाहनों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

हालांकि फिलहाल के लिए इथेनॉल को पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों का सबसे व्यवहारिक और तुरंत उपलब्ध विकल्प माना जा रहा है। यह मॉडल कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलकर एक सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देता है, जो भारत के लिए एक स्थायी और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

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